scriptsaw the pain of the nani village, hence the opposition to the project | नानी गांव का दर्द देखा, इसलिए 13 करोड़ के प्रोजेक्ट का विरोध | Patrika News

नानी गांव का दर्द देखा, इसलिए 13 करोड़ के प्रोजेक्ट का विरोध

सीकर. शहरी सरकार की लापरवाही नवलगढ़ रोड इलाके के लोगों का मर्ज बढ़ा रही है। 13 करोड़ का बजट स्वीकृत होने के बाद भी पानी निकासी का काम धरातल पर नहीं आने की पत्रिका टीम ने पड़ताल की।

सीकर

Updated: July 12, 2022 03:06:17 pm

सीकर. शहरी सरकार की लापरवाही नवलगढ़ रोड इलाके के लोगों का मर्ज बढ़ा रही है। 13 करोड़ का बजट स्वीकृत होने के बाद भी पानी निकासी का काम धरातल पर नहीं आने की पत्रिका टीम ने पड़ताल की। इसमें हर मुद्दे पर नगर परिषद की लापरवाही सामने आई। दरअसल, शहर के एक जोन का पानी नानी गांव के बीड़ की तरफ जाता है। बिना बारिश के ही गांव के खेत पानी में डूब जाते है। पिछले दो साल में 20 बार से ज्यादा इलाके के लोग प्रदर्शन कर चुके है। जिला कलक्टर से लेकर नगर परिषद आयुक्त और जनप्रतिनिधियों को कई बार नानी गांव के लोग खरी-खरी सुना चुके। लेकिन व्यवस्थाएं नहीं सुधरी। यही वजह है कि जगमालपुरा इलाके के कई लोग नानी गांव के लोगों की पीड़ा को देखते हुए पानी निकासी के 13 करोड़ के प्रोजेक्ट के पक्ष में नहीं है। जगमालपुरा इलाके के लोगों से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि नगर परिषद के वादों में दम नहीं है। यदि नवलगढ़ रोड इलाके का पानी उनके इलाके में आएगा तो हालात नानी गांव जैसे हो जाएंगे। यही वजह है कि 13 करोड़ का बजट होने के बाद भी काम शुरू नहीं हो पा रहा है।

नानी गांव का दर्द देखा, इसलिए 13 करोड़ के प्रोजेक्ट का विरोध
नानी गांव का दर्द देखा, इसलिए 13 करोड़ के प्रोजेक्ट का विरोध


व्यापारी बोले, नगर परिषद को चिंता होती तो आज इतने भयावह हालात नहीं होते...


इलाके के व्यापारी महेन्द्र काजला ने बताया नगर परिषद पिछले 20 सालों से इलाके के लोगों को गुमराह करने पर तुली है। पहले बजट नहीं होने का तर्क दिया जाता था। लेकिन पिछले राज्य सरकार ने बजट भी दे दिया तो अब काम शुरू नहीं हो रहा है। यदि नगर परिषद को चिन्ता होती तो आज नवलगढ़ रोड इलाके के यह हालात नहीं होते। व्यापारी मनोज कुमार ने बताया कि जब इलाके के हजारों परिवार और विद्यार्थी जलभराव की समस्या से परेशान है तो कोई नहीं आता। चुनाव के समय नेता झांसा देने आते है। नगर परिषद प्रशासन को यदि इतना ही दर्द होता तो अब तक काम शुरू करवा सकते थे। ऐसे में पानी निकासी की समस्या से तुरंत निजात मिलना जरूरी है। इलाके के व्यापारी मूलसिंह ने बताया कि लोग जनवरी-फरवरी महीने से नगर परिषद को जगा रहे थे। लेकिन नगर परिषद प्रशासन ने अभी तक काम शुरू नहीं कराया। इस वजह से शिक्षानगरी के हजारों विद्यार्थियों को गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। नगर परिषद प्रशासन सीधे तौर पर जिम्मेदार है। व्यापारी नेमीचंद कुमावत ने बताया कि नगर परिषद बोर्ड से लेकर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है। इसके बाद भी जिम्मेदार काम शुरू नहीं करवा सके। नगर परिषद प्रशासन का कहना है कि ग्रामीणों के विरोध की वजह से काम में बीच में अटक गया। ऐसे में जनता का सवाल है कि सहमति बनाने का काम भी तो नगर परिषद का ही था।

सियासी रुप से मजबूत, फिर भी अटका प्रोजेक्ट
नवलगढ़ रोड इलाका सियासी तौर पर काफी मजबूत है। पीसीसी अध्यक्ष व लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविन्द सिंह डोटासरा, दांतारामगढ़ विधायक वीरेन्द्र सिंह, उप जिला प्रमुख ताराचंद धायल व पूर्व उप सभापति विमल कुल्हरी का निवास इसी मार्ग पर है। जलभराव की वजह से इनको भी नवलगढ़ पुलिया के बजाय दूसरे मार्गो से आना पड़ता है। लोगों का कहना है इन सियासी दिग्गजों ने प्रोजेक्ट को मंजूरी तो दिलवाई लेकिन काम शुरू नहीं करवा सके।

पत्रिका टीम की ग्राउण्ड रिपोर्ट...ऐसे रहा जनता का दर्द
1. दुकानों में घुसा पानी, लाखों का नुकसान:

व्यापारी उमेश शर्मा ने बताया कि हर बारिश के सीजन में दुकानों के भीतर पानी भर जाता है। पानी को रोकने के लिए बंकर भी बनाए हुए है। फिर भी बारिश के पानी की वजह से लाखों रुपए का नुकसान हो जाता है। बारिश के साथ यहां कारोबार भी बंद हो जाता है।

2. विद्यार्थी बोले, कैसे जाए कोचिंग-स्कूल और कॉलेज:

विद्यार्थियों को जलभराव की वजह से समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इलाके के विद्यार्थियों का कहना है कि कई बार जलभराव की वजह से रास्ते बदलकर घर जाना मजबूरी हो जाता है। इस वजह से पढ़ाई भी प्रभावित होती है। इलाके की कई कोचिंग में तो जलभराव की वजह से छुट्टी घोषित करनी पड़ती है।

3. पुलिस तक भी नहीं पहुंच पा रहे फरियादी:

उद्योग नगर थाने के सामने भी बारिश के समय पानी भर जाता है। इस वजह से लोग यहां शिकायत देने भी नहीं पहुंच पाते है। लोगों का कहना है कि कई बार तो जलभराव की वजह से पुलिस स्टाफ भी थाने में ही फंस चुका है।

4. आमजन: 20 साल से झेल रहे है दर्द:

इलाके के लोगों का कहना है कि पिछले 20 साल से जलभराव की समस्या का दर्द झेल रहे हैं। यदि कलक्ट्रेट भी आना हो तो कई किलोमीटर दूर घूमकर आना मजबूरी है। ऐसे में समस्या से तुरंत निजात मिलना जरूरी है।

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