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यूक्रेन छोड़िये...जानें राजस्थान के किस हिस्से में गिर रहे हैं बम

राजस्थान के शेखावाटी इलाके में रोज गिराए जा रहे हैं सीड बम। दरअसल जिन इलाकों में पौधारोपण के लिए नहीं पहुंचा जा सकता है वहां ये बम रोज गिराए जा रहे हैं।

सीकर

Updated: May 23, 2022 06:44:04 pm

Seed bombs do not kill, they divide life
- 500 सीड बम पहाडिय़ों में बिखेरे
- बारिश के बाद बदलेगी शेखावाटी की सूरत


सीकर. बम का नाम सुन कर हम भले ही घबरा जाते हों, लेकिन यह बम प्रकृति को हराभरा करने के लिए तैयार किया जा रहा है। मानसून (monsoon) सीजन में इस बीज बम (Sead bomb) को सिर्फ जमीन पर फेंकना होगा और बस तैयार हो जाएंगे हजारों पौधे।
सीकर. भगोवा व शाकम्भरी की पहाडिय़ों में बिखेरे गए सीड बम।
सीकर. भगोवा व शाकम्भरी की पहाडिय़ों में बिखेरे गए सीड बम।

खुद-ब-खुद तैयार होते पौधे
बतादें कि बीज-बम फेंक कर पौधरोपण (plantation) को बढ़ाने में जुटा जा रहा है। अब नर्सरी में डेढ़ से दो महीने पौध तैयार करने की जरूरत नहीं है और ना ही गड्ढा खोदने की। बस कुछ बीज-बम साथ लेकर निकलिये और जहां उपयुक्त जगह दिखे, बम फेंक दीजिए। पौधा खुद-ब-खुद तैयार हो जाएगा। इस युक्ति से आप ट्रेन, बस, कार या किसी अन्य वाहन से सफर करते हुए भी सडक़ किनारे पौधरोपण करते हुए चल सकते हैं।

जानिए कैसे तैयार होता है बीज बम
दरअसल बीज बम मिट्टी का गोला होता है। इसमें दो तिहाई मिट्टी और एक तिहाई जैविक खाद रहता है। इसमें दो बीज अंदर धंसा दिए जाते हैं। इसे छह घंटे धूप में रखा जाता है। इसके बाद नमी रहने तक छांव में खुले में रख दिया जाता है। ठोस रूप लेते ही बीज बम तैयार हो जाता है। बारिश में इसे जमीन पर डालने से बीज जमीन पकड़ लेता है। पोषण के लिए उसमें पहले ही जैविक खाद रहती है।

जापान से हुआ इजाद
बीज बम बनाने में नीम, जामुन, परिजात, कपास और सीताफल के बीज का उपयोग किया जा रहा है। यह जापानी पद्धति है। वहां सालों से इस तरह से पौधरोपण और खेती की जाती है। इससे लागत और समय में कमी आती है।

अब क्यों पड़ रही है सीड बम की जरूरत?
सभी को मालूम है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर में होने वाली मौतें औक्सीजन की कमी की वजह से हुई थीं। गांव ढाणियां भी इस महामारी से प्रभावित तो हुए, लेकिन अच्छे पर्यावरण और पेड़-पौधों की अधिकता के चलते मौतें ज्यादा नहीं हुईं। जिसके बाद से हरीतिमा बढ़ाने पर जोर दिया जाने लगा है। हमें अपनी सेहत का ध्यान खुद रखना है।

सीड बम जो मौत नहीं, बांटते हैं जिंदगी!
लगातार घट रहे वनों के क्षेत्रफल और इस के चलते हो रहे वातावरण में बदलाव को देखते हुए वृक्षारोपण की सलाह दुनिया के सभी पर्यावरण विशेषज्ञ दे रहे हैं। वैसे तो हर साल मानसून के दौरान वृक्षारोपण होते हैं, लेकिन उन में से कितने पौधे पेड़ बन पाते हैं, यह बात सभी अच्छी तरह जानते हैं। इस समस्या को देखते हुए इन दिनों बड़ी संख्या में बीज बम बनाने पर जोर है।

आने दीजिए मानसून को फिर देखिए...
हरियााली को बढ़ावा देने के लिए हरीतिमा संस्थान ने यह पहल की है। संस्थान की ओर से रविवार को युवा सदस्यों को सीड बॉल बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान युवाओं ने स्थानीय व टिकाऊ पेड़-पौधों के बीजो को मिट्टी व खाद के मिश्रण मे लपेट कर बनाए 500 सीड बम बनाए। इन सीड बमों को भगोवा व शाकम्भरी की पहाडिय़ों में बिखेरा गया। बारिश के बाद 70 फीसदी की रफ्तार से फूलों के पौधे उगने की संभावना है। संस्थान की इस पहल को ग्रामीणों ने काफी सराहा।

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