चुनाव से चकनाचूर हो रहे रोजगार के सपने, दो साल से अटकी सात भर्तियां

राजस्थान में चुनाव बेरोजगारों को रोजगार से दूर कर रहे हैं। दो साल से एक के बाद एक चुनाव की लग रही आचार संहिता में सात भर्तियों के अभ्यर्थियों के सपने चकनाचूर हो रहे हैं।

By: Sachin

Updated: 11 Jan 2021, 02:28 PM IST

सीकर. राजस्थान में चुनाव बेरोजगारों को रोजगार से दूर कर रहे हैं। दो साल से एक के बाद एक चुनाव की लग रही आचार संहिता में सात भर्तियों के अभ्यर्थियों के सपने चकनाचूर हो रहे हैं। इसी क्रम में प्रदेश में अब पालिका चुनाव की आचार संहिता भी अभ्यर्थियों पर भारी पड़ रही है।

तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2018
दो साल के इंतजार के बाद सरकार की ओर से रिक्त पदों के लिए एक और प्रतीक्षा सूची जारी की गई। सूची में शामिल अभ्यर्थियों को पहले जिला आवंटन फिर जिला परिषद की स्थापना समिति की बैठक में भी अनुमोदन होना है। लेकिन आचार संहिता की वजह से मामला पूरी तरह उलझ गया है। इसी भर्ती में लेवल द्वितीय की सूची भी जारी नहीं हो सकी है।


प्रथम श्रेणी व्याख्याता: नौकरी का बढ़ता इंतजार

प्रथम श्रेणी व्याख्याता भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों को अभी तक नियुक्ति का इंतजार है। बेरोजगारों की ओर से लंबे समय से नियुक्ति देने की मांग की जा रही है। पहले परीक्षा की तिथि को लेकर काफी विवाद हुआ। लेकिन सरकार समय पर परीक्षा कराने में तो सफल रही लेकिन अब नौकरी तक पहुंचते-पहुंचते मामला दो बार आचार संहिता में उलझ चुका है।

पुलिस कांस्टेबल भर्ती: न्यायालय के स्थगन में उलझा मामला
पुलिस कांस्टेबल भर्ती की जिलेवार मेरिट सूची को लेकर मामला परिणाम से पहले ही न्यायालय तक पहुंच गया। न्यायालय के स्थगन से प्रदेश के दस लाख से अधिक बेरोजगारों की नौकरी आस टूट गई है। यह भर्ती भी आचार संहिता के फेर में उलझ चुकी है। इसके बाद जैसे-तैसे कोरोनाकाल में परीक्षा भी हुई।

पटवार भर्ती: दो बार परीक्षा स्थगित, नई तिथि का इंतजार

प्रदेश में आचार संहिता और कोरोना की वजह से पटवार भर्ती दो बार स्थगित हो चुकी है। अब मामला फिर से आचार संहिता में उलझता हुआ नजर आ है। कई जिलों में नगर निकाय के चुनाव होने है। इसके बाद कई जिलों में पंचायत समिति व जिला परिषदों के चुनाव होने है। ऐसे में चयन बोर्ड के सामने परीक्षा कराना चुनौती बना हुआ है।

यह भर्ती भी अटकी
एलडीसी 2018, सहायक अभियंता भर्ती, रेडियोग्राफर, छात्रावास अधीक्षक, सीएचओ, लैब टेक्निशियन सहित अन्य भर्ती परिणाम के फेर में उलझी हुई है। यदि अब इनका मुख्य व प्रतीक्षा सूची का परिणाम भी जारी हो जाता है तो चयनित अभ्यर्थियों को आचार संहिता के बाद ही नियुक्ति मिल सकेगी।


कब कब की गई चुनाव की घोषणा:

25 अक्टूबर 2019 को नगरपालिकाओं के लिए
26 दिसंबर 2019 को सरपंच एवं पंच के लिए

12 मार्च 2020 को 6 नगर निगमों के लिए लेकिन कोरोना के कारण निरस्त हुए चुनाव
7 सितंबर 2020 को शेष रही 3848 ग्राम पंचायतों के चुनाव की आचार संहिता

10 अक्टूबर 2020 को 6 नगर निगमों के चुनाव की आचार संहिता
26 अक्टूबर 2020 को 21 जिलों की जिला परिषदों एवं पंचायत समिति के लिए

7 नवंबर को 42 नगरीय निकायों के लिए
4 जनवरी 2021 90 नगर पालिकाओं के चुनाव के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित


अभी एक बार और लगेगी आचार संहिता
प्रदेश के दस जिलों में अभी तक पंचायत समिति व जिला परिषदों के चुनाव नहीं हुए है। इन जिलों में गांवों की सरकार के चुनाव के लिए जल्द चुनाव आयोग की ओर से कार्यक्रम घोषित किए जाने की संभावना है। ऐसे में प्रदेश में गांवों की सरकार के चुनाव के लिए एक बार और आचार संहिता लगना तय है।

इनका कहना है
प्रदेश में भर्तियों का कलैण्डर नहीं होने की वजह से बेरोजगारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कोरोना और आचार संहिता की वजह से भर्ती काफी प्रभावित हुई है। अब आचार संहिता लगने की वजह से युवाओं के नौकरी के अरमान एक बार फिर से अटक गए है।
उपेन यादव, प्रवक्ता, राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ

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