विशेष योग में आ रहे श्राद्ध करेंगे पितृ दोषों का निवारण

विशेष योग में आ रहे श्राद्ध करेंगे पितृ दोषों का निवारण

Vinod Chauhan | Publish: Sep, 16 2018 03:39:26 PM (IST) Sikar, Rajasthan, India

सीकर. इस बार श्राद्ध दुर्लभ योग में आ रहे हैं, जिससे पितृ की पूजा-अर्चना करने का अनंत गुना फल मिलेगा।

 

सीकर. इस बार श्राद्ध दुर्लभ योग में आ रहे हैं, जिससे पितृ की पूजा-अर्चना करने का अनंत गुना फल मिलेगा। श्राद्ध पक्ष की शुरुआत 24 सितम्बर से होगी। नौ अक्टूबर को अमावस्या के दिन समापन होगा। श्राद्ध पक्ष में सूर्य व राहु की युति से गजछाया योग बन रहा है। पंडित दिनेश मिश्रा के अनुसार आश्विन कृष्णपक्ष (महालय) तथा कनागत नाम से जाने वाले इस पक्ष को कन्या राशि गत सूर्य में श्रेष्ठ माना जाता है, जो कि इस बार पूरे पितृपक्ष में रहेगा। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध और तर्पण का अनंत गुना फल कन्या गत सूर्य के दौरान मिलता है। जिससे पितृ प्रसन्न हो जाएंगे।ज्योतिष के अनुसार पितृों का कारक माना जाता है सूर्य तथा ननिहाल पक्ष का कारक माना जाता है राहु। ये दोनों जब साथ में कुंडली में आ जाएं तब चतुर्थ तथा दशम भाव बैठते हैं। जिससे एक महत्वपूर्ण दोष उत्पन्न होता है और उसे पितृ दोष के नाम से जाना जाता है। इन श्राद्ध पक्ष में इस दोष् का निवारण भी अचूक उपाय है।
वर्षों बाद श्राद्ध पक्ष में सूर्य व राहु की युति से गजछाया योग बन रहा है। ऐसे योग में पितृकर्म (श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान) करने से उसका अनंत गुना अधिक फल प्राप्त होता है। इस योग में पितृों के निमित्त श्राद्ध आदि करने से वे पूर्ण तृप्त होंगे व श्राद्ध करने वाले को धन-धान्य, पुत्र-पौत्र, सुख-संपत्ति आदि का सुख प्राप्त होगा।
इसमें तर्पण श्राद्ध करना उत्तम फल दायक रहेगा। इसी दिन चतुदर्शी भी होने से योग्य विद्वान पंडित से विशेष पूजन, तर्पण, पितृ शांति करवाना अभीष्ट फल दाई रहेगा। श्राद्धपक्ष में अनेक लोग बिहारके गयाजी जाकर भी श्राद्धकर्म करते हैं।

तारीख श्राद्ध
24 पूर्णिमा का श्राद्ध
25 प्रतिपदा श्राद्ध
26 द्वितीया श्राद्ध
27 तृतीया श्राद्ध
28 चतुर्थी श्राद्ध
29 पंचमी श्राद्ध
30 षष्ठी श्राद्ध
01 सप्तमी श्राद्ध
02 अष्टमी श्राद्ध
03 नवमी श्राद्ध
04 दशमी श्राद्ध
05 एकादशी श्राद्ध
06 द्वादशी श्राद्ध
07 त्रयोदशी श्राद्ध,
08 चतुर्दशी का श्राद्ध
09 सर्वपितृ अमावस्या

 

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