पत्रिका अभियान: 12 साल से अटका है शहर का ये बड़ा सपना, सपने दिखाकर भूली दोनों सरकारें

सीकर. शहरवासियों की बड़ी आस मिनी सचिवालय अभी भी कागजों में उलझी हुई है।

By: Sachin

Published: 20 Nov 2020, 10:49 AM IST

सीकर. शहरवासियों की बड़ी आस मिनी सचिवालय अभी भी कागजों में उलझी हुई है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने मिनी सचिवालय के प्रोजेक्ट को धरातल पर लाने का दावा किया था। लेकिन अभी तक योजना आगे नहीं बढ़ सकी है। मिनी सचिवालय का निर्माण नहीं होने से आमजन की चुनौती बढ़ती जा रही है। पिछले 12 साल में भाजपा व कांग्रेस ने शहरवासियों को मिनी सचिवालय को खूब वादे भी किए। मिनी सचिवालय का निर्माण नहीं होने से शहर में जहां जाम की समस्या बढ़ रही है। वहीं आमजन को छोटे-छोटे कार्यो के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों में चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जिला मुख्यालय पर कई सरकारी कार्यालय तो ऐसी जगह है जहां सार्वजनिक आवागमन के साधन भी नहीं जाते हैं।

किस राज में मिनी सचिवालय के लिए क्या हुआ


कांग्रेस: घोषणा के बाद लग गई थी आचार संहिता

कांग्रेस सरकार ने पिछले कार्यकाल में सीकर में कलक्ट्रेट की जमीन को नीलाम कर मिनी सचिवालय का निर्माण करने की घोषणा की थी। इस दौरान सांवली रोड स्थित जलदाय विभाग बीड़ में मिनी सचिवालय के निर्माण को मंजूरी मिली। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत यहां शिलान्यास के लिए आने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई। ऐसे में यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। इस बार फिर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने मिनी सचिवालय को मुद्दा बनाया। लेकिन जनप्रतिनिधियों ने अभी तक कोई रूचि नहीं दिखाई है।
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भाजपा: अलवर की तर्ज पर तैयार कराई डीपीआर
भाजपा राज में दो साल तक मिनी सचिवालय को लेकर कोई कवायद नहीं हुई। तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने कलक्टर-एसपी कॉन्फ्रेन्स में तत्कालीन जिला कलक्टर एलएन सोनी को मिनी सचिवालय की डीपीआर तैयार कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अलवर की तर्ज पर मिनी सचिवालय का डिजायन तैयार किया गया। इसके बाद सरकार को नीलामी के लिए रिपोर्ट भेजी थी। पहले चरण में कलक्टे्रट के पिछले हिस्से और बाईपास इलाके की तहसील की जमीन नीलाम होनी थी। इस राशि से बीड़ इलाके में मिनी सचिवालय का निर्माण होना था। लेकिन नीलामी फाइल के अटकने से प्रोजेक्ट ही अटक गया।


शहर में जाम का बड़ा कारण कलक्ट्रेट

शहर में कलक्ट्रेट मुख्य शहर के बीच स्थित है। इस कारण यहां आए दिन धरना-प्रदर्शनों का दौर भी जारी रहता है। खुद सरकार के जिम्मेदार भी कई बार मान चुके है कि शहर के बीच में कलक्ट्रेट के होने के कारण जाम की समस्या बढ़ रही है। इसके बाद भी जिम्मेदारों की ओर से समस्या के समाधान की दिशा में कोई कदम आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।

सिर्फ इच्छा शक्ति की वजह से अटका प्रोजेक्ट
शिक्षानगरी का मिनी सचिवालय सरकारी इच्छा शक्ति के अभाव में अटका हुआ है। क्योंकि इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार के उपर कोई वित्तिय भार भी नहीं पडऩा है। कलक्ट्रेट की जमीन नीलाम कर आसानी से सांवली रोड पर मिनी सचिवालय का निर्माण हो सकता हैंं। नगर परिषद सहित कई संस्थाओं ने कलक्ट्रेट की जमीन को खरीदने के लिए रूचि भी दिखाई थी।

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