सीकर नगर परिषद बोर्ड बनाने में निर्दलीय होंगे किंगमेकर!आंकड़ेवार समझें पूरी गणित

सीकर निकाय चुनाव विशेष: बोर्ड बनाने के लिए जादुई आंकड़े से दूर रह सकते हैं भाजपा-कांग्रेस। सत्ता के जादुई आंकड़े के लिए भाजपा-कांग्रेस की निर्दलीयों पर निगाहें।

Gaurav Saxena

November, 1106:14 PM

सीकर. नगर परिषद चुनाव की रवानी चरम पर है। कांग्रेस व भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए पूरा दमखम लगा रखा है। दोनों दलों ने बोर्ड बनाने के लिए समीकरण गढऩे के साथ गठजोड़ की रणनीति पर भी काम शुरू कर दिया है। सूत्रों की मानें तो दोनों को बहुमत का आंाकड़ा जुटाने में पसीने आ सकते हैं। इनको 65 में से 33 वार्ड जीतने हैं। जबकि ऐसे में दोनों दलों को जादुई आंकड़े के लिए 8 से 13 निर्दलीयों का समर्थन लेना पड़ सकता है। इसके लिए जोड़ तोड़ कर गठजोड़ की नीति पर काम शुरू कर दिया गया है। इस बार सर्वाधिक 131 निर्दलीय मैदान में हैं।
भाजपा की मुस्लिम वार्डों में सेंध की कोशिश
बोर्ड बनाने के लिए भाजपा का मुस्लिम वार्डों पर भी खासा फोकस है। परंपरागत आधार पर भले ही यह वार्ड कांग्रेस समर्थक रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के बगावतियों में भाजपा को उम्मीद की किरण नजर आ रही है। इसके चलते भाजपा ने अपने अल्पसंख्यक मोर्चा को सक्रिय कर दिया है। उधर, कांग्रेस मुस्लिम वार्डों को ही अपना सबसे मजबूत पक्ष मान रही है।
08 माकपा समर्थित
सीकर निकाय में कुल 65 वार्डों के लिए होने जा रहे चुनावों में भाजपा ने जहां 53 वार्डों से उम्मीदवार उतारे हैं वहीं कांग्रेस ने सभी 65 वार्डों के लिए प्रत्याशी खड़े किए हैं। इनके अलावा 8 माकपा समर्थित उम्मीदवार हैं तथा सर्वाधिक 131 प्रत्याशी निर्दलीय खड़े हुए हैं।
दोनों दलों को बागियों से नुकसान, सेंधमारी का सता रहा डर
एक तरफ कांग्रेस और भाजपा एक दूसरे के मतों में सेंधमारी की कोशिश में हैं, वहीं उन्हें अपने बागियों का डर भी सता रहा है। एक वार्ड में निर्विरोध निर्वाचन होने के बाद 65 में से 64 वार्डों में हो रहे चुनावों में इस बार दोनों ही प्रमुख दलों को बागियों से जूझना पड़ रहा है। भाजपा ने सीकर में 53 वार्डों में प्रत्याशी उतारे हैं। दोनों ही दलों को बागियों से भीतरघात का सामना करना पड़ सकता है। वार्डों में इसको लेकर मेहनत करनी पड़ रही है।
राजेश्वरी सैनी ने रखी थी भाजपा की लाज
सीकर नगर परिषद पर हमेशा से कांग्रेस का कब्जा रहा है। करीब दो दशक के बाद 1994 में हुए चुनावों में कांग्रेस की सलमा शेख सभापति चुनी गई थी। इसके बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता मोहम्मद हनीफ खत्री ने नगर परिषद की कमान संभाली। वे लगातार दो बार सभापति चुने गए। 2014 में कांग्रेस की सलमा शेख के निधन के बाद प्रत्यक्ष प्रणाली से हुए उप चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की थी। उस चुनाव में भाजपा की राजेश्वरी सैनी, खतीजा बानो को हराकर पहली बार भाजपा की सभापति बनी थी।
इन वार्डों में खतरा
चुनाव में भाजपा के लिए 6 व कांग्रेस के लिए 14 वार्डों में निर्दलीय परेशानी खड़े कर रहे हैं। वार्ड 9, 12, 21, 31 और 50 में निर्दलीय भाजपा को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। जबकि वार्ड 2, 6, 9, 13, 16, 17, 20, 25, 36, 39 में निर्दलीय कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर रहे हैं। यहां तक की वार्ड 40 में सभापति जीवन खां के सामने भी निर्दलीय प्रत्याशी ने ताल ठोक रखी है। ऐसे में दोनों दल निर्दलीयों को पक्ष में करने की कवायद में जुटे हैं।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned