निकाय चुनाव: मतगणना कल, सबकी जुबां पर एक ही प्रश्न... जीतेगा कौन ?

Rajasthan Local Body Election 2019 : मंगलवार को होने वाली मतगणना ( Counting of Votes ) से पहले राजनीतिक हलकों के साथ शहर में भी चर्चा शुरू हो गई कि जीतेगा कौन...? यह चुनाव रोचक इसलिए हैं कि दोनों ही प्रमुख दलों ने इस बार अधिकतर नए चेहरों को मैदान में उतार है।

सीकर.

Rajasthan Local Body Election 2019 : नगर परिषद ( sikar nagar parishad ) के अब तक के सबसे रोचक चुनाव में दोनों ही पार्टियों के दिग्गज नेताओं की राजनीतिक किस्मत ईवीएम में कैद है मंगलवार को होने वाली मतगणना ( Counting of Votes ) से पहले राजनीतिक हलकों के साथ शहर में भी चर्चा शुरू हो गई कि जीतेगा कौन...? यह चुनाव रोचक इसलिए हैं कि दोनों ही प्रमुख दलों ने इस बार अधिकतर नए चेहरों को मैदान में उतार है। साथ ही अब तक बोर्ड पर काबिज रही कांग्रेस की कमान महज विधायक राजेन्द्र पारीक के हाथ रही। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष समेत दिग्गज नेताओं की सक्रियता कम रही।


साथ ही निर्दलीय प्रत्याशियों ने दिग्गज नेताओं के वार्डों में मुकाबले को त्रिकोण बना दिया है। टिकट वितरण में कमजोर रहीं भाजपा के नेताओं की नजर जीतने वाले निर्दलीय प्रत्याशियों पर है। खैर अब मतदान के बाद चर्चा है कि क्या कांग्रेस विधानसभा चुनाव की तरह अपना वर्चस्व कायम रख पाएगी या भाजपा लोकसभा चुनाव का फायदा लेकर सेंध लगाने में कामयाब होगी।

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क्या फिर कांग्रेस का बनेगा बोर्ड
आजादी के बाद से आज तक बोर्ड पर कायम रहीं कांग्रेस फिर बोर्ड बनाने के लिए आतुर है। विधायक राजेन्द्र पारीक के सामने अपने ही घर में वर्चस्व को कायम रखने की चुनौती है।इसके लिए जनसम्पर्क से लेकर मतदान तक पारीक ने अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। यहां तक की अपनी पार्टी के दूसरे दिग्गज नेताओं को भी सहयोग लेते कहीं नहीं देखे गए।


कांग्रेस का बोर्ड बना तो जीवण खां सभापति के प्रमुख दावेदार
नगर परिषद के निवर्तमान सभापति जीवण खां कांग्रेस का बोर्ड बनने पर सभापति के लिए पहले प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह पारीक का नजदीकी होना है। हालांकि कांग्रेस के नेताओं में इसे लेकर एकमतता नहीं है। स्पष्ठ बहुमत नहीं मिलने पर जोड़तोड़ में दूसरा नाम भी सामने आ सकता है।

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क्या खुलेगी सियासी किस्मत
भाजपा के लिए नगर परिषद में पहली बार बोर्ड बनाना भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। भाजपा ने राज्य सरकार की नाकामियां गिनाने के साथ शहर के विकास के दावे कर जनता से वोट मांगे। लेकिन टिकट वितरण में रहीं कमजोरी को मतदान तक वह पूरी तरह पाट नहीं सकी। सांसद, पूर्व विधायक और जिलाध्यक्ष पूरी तरह से प्रचार में सक्रिय रहे। पूर्व केन्द्रीय मंत्री सीआर चौधरी ने भी यहां डेरा डाले रखा। इतना होने के बाद भी भाजपा इस बार भी बोर्ड नहीं बना पाई तो प्रतिष्ठा को भारी चोट पहुंचेगी।


सबसे बड़ा सवाल, सभापति कौन ?
भाजपा में अभी तक सभापति का कोई भी चेहरा सामने नहीं आया है। ऐसे में सवाल यह है कि विधानसभा के मुकाबले लोकसभा में कम वोटिंग के फायदे की तरह नगर परिषद चुनाव में भी पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार हुई कम वोटिंग का फायदा मिलता है तो सभापति का चेहरा कौन होगा। हालांकि पार्टी ने राजनीतिक तजुर्बा रखने वालों को भी मैदान में उतार है, लेकिन मतदान के बाद उनकी हालत कमजोर आ रही है।

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