Rajasthan Budget 2020-21: चुनाव में दी सबसे ज्यादा सीट अब बजट से उतनी बढ़ी उम्मीद

Rajasthan Budget 2020-21 : पिछले विधानसभा चुनाव ( Assembly Elections ) में प्रदेश में सबसे ज्यादा सीट देने वाले सीकर जिले की राज्य बजट से उम्मीदें भी उतनी बढ़ी है। जिलेवासियों को अधूरे प्रोजेक्टों पर इस साल मुहर लगने की पूरी संभावना है।

सीकर.

Rajasthan Budget 2020-21 : पिछले विधानसभा चुनाव ( Assembly Elections ) में प्रदेश में सबसे ज्यादा सीट देने वाले सीकर जिले की राज्य बजट से उम्मीदें भी उतनी बढ़ी है। जिलेवासियों को अधूरे प्रोजेक्टों पर इस साल मुहर लगने की पूरी संभावना है। इलाके के लोगों ने अपने-अपने क्षेत्रों के विधायकों को भी मांग पत्र भिजवाए है। ऐसे में अब सभी की निगाह मुख्यमंत्री की ओर से पेश किए जाने वाले बजट पर टिकी है। क्योंकि पिछली बार सीकर जिले की पांच विधानसभा क्षेत्रों की झोली खाली रह गई थी। इस बार सीकर की जनता को मेडिकल कॉलेज, मिनी सचिवालय, कुम्भाराम लिफ्ट पेयजल परियोजना, नवलगढ़ पुलिया व उपखंड मुख्यालयों पर सरकारी कॉलेज के अलावा अन्य प्रोजेक्टों की आस है।


रसीदपुरा प्याज मंडी
मीठे प्याज की खेती के लिए शेखावाटी के कई गांव-ढाणी पहचाने जाते है। यहां का प्याज कई राज्यों में सप्लाई होता है। प्याज में पानी की मात्रा अधिक होने की वजह से प्याज को तत्काल सस्ते दामों में बेचना किसानों की मजबूरी बन गया। पिछली भाजपा सरकार के समय रसीदपुरा प्याज मंडी बन गई। आचार संहिता की वजह से उद्घाटन नहीं हो सका। दुकान आवंटन सहित अन्य काम पूरा करें तो किसानों को फायदा मिल सकता है।


कुम्भाराम योजना
कुम्भाराम लिफ्ट पेयजल परियोजना के दूसरे फेज को अब तक बजट नहीं मिला है। पिछली कांग्रेस सरकार के समय ही यह प्रोजेक्ट बना था। इस महीने इसकी डीपीआर भी जल संसाधन विभाग ने तैयार कर ली है। दस साल से यह पेयजल परियोजना डीपीआर के फेर में उलझी हुई है।


मेडिकल कॉलेज
सीकर मेडिकल कॉलेज का मामला पिछले पांच साल से कागजों में उलझा हुआ है। कांग्रेस ने सत्ता परिवर्तन से पहले एक साल में मेडिकल कॉलेज शुरू कराने का दावा किया था। लेकिन अभी तक सीकर मेडिकल कॉलेज शुरू नहीं हुआ है। हालांकि सरकार का दावा है कि जुलाई में शुरू होने वाले नए सत्र से सीकर मेडिकल कॉलेज शुरू होगा। कॉलेज शुरू होने से यहां के विद्यर्थियों को फायदा मिलेगा।


स्मृति वन,ऑडिटोरियम
शहर में सांवली रोड पर बने स्मृति वन को लेकर जो सपने दिखाए थे वह अभी अधूरे है। पिछली कांग्रेस राज में इसका काम हुआ था। लेकिन बाद में सत्ता परिवर्तन होने के बाद भाजपा ने इसकी डीपीआर में कुछ बदलाव किया था। इसके सौन्दर्यकरण सहित अन्य सुविधाओं के लिए बजट की आवश्यकता है। इसके अलावा सांवली रोड पर ऑडिटोरियम की मांग है। डीपीआर भी समय बन चुकी है।


नवलगढ़ पुलिया फोरलेन
नवलगढ़ पुलिया फोरलेन का मामला भी बजट की वजह से उलझा हुआ है। इस कारण नवलगढ़ रोड, पिपराली रोड व सार्वजनिक निर्माण विभाग कार्यालय के पास दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। पिछली भाजपा सरकार के समय पुलिया को फोरलेन करने के लिए डीपीआर बनाने की घोषणा हुई थी। लेकिन अभी डीपीआर को स्वीकृति नहीं मिली है। फोरलेन से जाम की समस्या हल होगी।


उपखंड पर कॉलेज
जिले के धोद, दांतारामगढ़ व फतेहपुर इलाके में अभी तक कॉलेज नहीं है। पिछले विधानसभा चुनाव में सरकारी कॉलेज की मांग को लेकर युवओं ने काफी आंदोलन किए थे। इस दौरान सरकार ने सभी उपखंड मुख्यालयों पर कॉलेज खोलने की घोषणा की थी। लेकिन पिछले बजट में लक्ष्मणगढ़ व नीमकाथाना क्षेत्र को ही सरकारी कॉलेज मिला। उपखंड स्तर पर कॉलेज खुलने से छात्रों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा।


खेल स्टेडियम
सांवली रोड स्थित खेल स्टेडियम में पिछले दस साल में इंडोर स्टेडियम बनने के अलावा कोई नया काम नहीं हुआ है। नए खेल मैदान व कोच सहित अन्य संसाधन नहीं होने के कारण युवाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले बजट में स्टेडियम में संसाधन बढ़ाने की आस थी। लेकिन बजट में स्टेडियम के लिए कोई बजट नहीं मिला। अब खेल प्रेमियों को इस बजट से आस है।


पर्यटन सर्कि ट
पर्यटन की अपार संभावना होते हुए भी शेखावाटी पर्यटन सर्किट को मंजूरी नहीं मिल पा रही है। सालासर, खाटूश्यामजी, जीण माता, शाकम्भरी सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर पर्यटकों की सुविधा के लिए बजट की दरकार है। पिछले दिनों देवस्थान राज्य मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने पर्यटन सर्किट के लिए जल्द मंजूरी दिलाने का आश्वासन दिया था। ऐसे में पर्यटन सर्कि ट की उम्मीद है।


मिनी सचिवालय
जिला मुख्यालय पर दिनभर जाम की बड़ी वजह कलक्ट्रेट का मुख्य शहर में होना है। पिछली कांग्रेस सरकार के समय सांवली रोड पर जलदाय विभाग के बीड़ में मिनी सचिवालय का प्रोजेक्ट बना था। लेकिन उस समय आचार संहिता लगने की वजह से यह प्रोजेक्ट अटक गया। इसके बाद भाजपा सरकार ने पीपीपी मोड पर मिनी सचिवालय बनाने के लिए डीपीआर बनाने का काम शुरू किया। भाजपा राज में मिनी सचिवालय का प्रोजक्ट डीपीआर में उलझा रहा। बजट में मिनी सचिवालय के लिए बजट मिले तो आमजन की राह आसान हो सकती है। मिनी सचिवालय बनने से सभी सरकारी कार्यालय एक जगह आ सकेंगे।

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