माइनस 39 डिग्री तापमान में सीकर के राजीव ने अंटार्कटिका में बर्फीले तूफान मेें यूं जीती मौत से जंग

Sikar Rajiv Birda : शेखावाटी में शून्य डिग्री तापमान में भी लोग कांप जाते है। वहीं सीकर का एक लाल अंटार्कटिका ( Rajiv Birda in Antarctica Mission ) में 13 माह खून जमा देेने वाली सर्दी में भारत के मिशन से लौटा है। माइनस 39 डिग्री तापमान और 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने बर्फीले तूफान ( Ice Storm in Antarctica ) में कई बार मौत से सामना हुआ।

नवीन पारमुवाल, सीकर.

Sikar Rajiv Birda : शेखावाटी में शून्य डिग्री तापमान में भी लोग कांप जाते है। वहीं सीकर का एक लाल अंटार्कटिका ( Rajiv Birda in Antarctica Mission ) में 13 माह खून जमा देेने वाली सर्दी में भारत के मिशन से लौटा है। माइनस 39 डिग्री तापमान और 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने बर्फीले तूफान ( Ice Storm in Antarctica ) में कई बार मौत से सामना हुआ। सीकर जिले की फतेहपुर तहसील के गांव रिणाऊ निवासी राजीव कुमार बिरड़ा दक्षिण अफ्रीका की राजधानी केपटाउन से रविवार को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे।

माइनस 39 डिग्री तापमान में सीकर के राजीव ने अंटार्कटिका में बर्फीले तूफान मेें यूं जीती मौत से जंग

तीसरी बार मिशन पर गए राजीव
राजीव तीसरी बार मिशन पर गए है। अंटार्कटिका में भारत के मैत्री व भारती दो स्टेशन संचालित है। इससे पहले दक्षिण गंगौत्री स्टेशन था, जो बर्फ में दब गया। वर्ष दिसंबर 2018 में 38वें मिशन पर गई राजीव समेत 23 सदस्यों की टीम मैत्री स्टेशन पर गए। इससे पहले भी राजीव 34वें और 36वें मिशन में भारती स्टेशन जा चुके है। इन स्टेशनों में टीम के रहने, भोजन और संचार के साधन हैं।

 

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63 दिन 24 घंटे की रात
54 लाख वर्ग मील क्षेत्रफल के लिहाज से अंटार्कटिका पांचवां सबसे बड़ा महाद्वीप है। यहां 3.4 किलोमीटर मोटी बर्फ की परत जमी हुई है। मई से अगस्त महीने तक सर्दी अपने चरम पर रहती है। इन चार महीनों में माइनस 39 डिग्री तापमान और 200 किलोमीटर की रफ्तार से चलने वाले बर्फीले तूफान में 50 मीटर देखना भी मुश्किल होता है। राजीव ने बताया कि यहां 63 दिन 24 घंटे की रात होती है। ऐसे मौसम में स्वास्थ्य बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। 38वें अंटार्कटिका मिशन के लिए राजीव बिरड़ा का चयन बतौर नर्सिंग ऑफिसर के रूप में हुआ। मिशन पर वैज्ञानिक समेत 23 लोगों की टीम की स्वास्थ्य का जिम्मा राजीव बिरड़ा का था।

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खतरों का सफर
राजीव बताते है कि मार्च में वह फ्यूल ला रहे थे। इनकी चार गाडिय़ां बर्फीले तूफान में फं स गई। दोनों और 500 मीटर की दूर पर समुद्र था। स्टेशन से वापस आने का कॉल आया लेकिन वह बर्फीले तूफान में फंस चुके थे। उस समय ऐसा लगा कि हमारी गाडिय़़ां समुद्र में समा रही है। उस समय मौत से सामना हुआ।


150 किलोमीटर दूर से आता राशन
मैत्री स्टेशन तक राशन लाना भी सबसे बड़ी चुनौती थी। दक्षिण अफ्रीका की राजधानी केपटाउन से विशेष जहाज एक वर्ष का राशन लेकर मैत्री स्टेशन से डेढ सौ किलोमीटर दूर आइएल इंडियन बैरियर तक पहुंचता। इसके बाद टीम को ही जहाज से राशन लेकर आना पड़ता। कई बार भयंकर बर्फीले तूफान आ जाने से फंस भी जाते।

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घर वालों से नहीं होता संपर्क
मिशन पर जाने वाले सदस्यों का घरवालों से नियमित संपर्क नहीं होता। सदस्यों को सैटेलाइट फोन के जरिए घरवालों से बात करने के लिए गर्मी के मौसम में छह मिनट और सर्दी में 20 मिनट मिलते थे। गांव में माता ग्रहणी गीता देवी व किसान पिता जीवणराम को बेटे पर गर्व है। राजीव की शादी संजू से हुई। इनकी 9 वर्षीय बेटी हर्षिता व 5 वर्षीय बेटा मानव स्कूल में पढ़ाई करते हैं।

Naveen Reporting
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