माह-ए-रमजान: बरकतों का महीना रमजान आज से शुरू, पहला रोजा व पहला जुमा आज

Vinod Chauhan

Publish: May, 18 2018 08:16:53 AM (IST)

Sikar, Rajasthan, India
माह-ए-रमजान: बरकतों का महीना रमजान आज से शुरू, पहला रोजा व पहला जुमा आज

बरकत व इबादत के पाक माह रमजान में शुक्रवार से पहला रोजा शुरू होगा। इसी दिन जुमे की नमाज होगी। रमजान माह की शुरुआत जुमे से हो रही है। अकीदतमंद

सीकर.

बरकत व इबादत के पाक माह रमजान में शुक्रवार से पहला रोजा शुरू होगा। इसी दिन जुमे की नमाज होगी। रमजान माह की शुरुआत जुमे से हो रही है। अकीदतमंद रोजे रखकर अल्लाह की इबादत शुरू कर देंगे। रमजान महीने के पहले दिन ही मस्जिदों में जुमे की नमाज अदा करने के लिए अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ा दिखाई देगा। शहर की मस्जिदों में नमाज अदा की जाएगी। गुरुवार को तरावीह की नमाज अदा गई। इससे पहले लोगों ने चांद देखा। चांद देखते ही एक दूसरे को रमजान की मुबारकबाद दी। खुशियां मनाई गई। सोशल मीडिया पर भी बधाई दी गई। इधर मुस्लिम मोहल्लों में विशेष रौनक रही। लोगों ने खजूर, सूखे मेवे व फलों की खरीदारी की। सीरत ए पाक कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद असलम फारूखी ने बताया कि चांद दिखाई देने के साथ ही रमजान का पहला रोजा शुक्रवार को होगा।


साथ मिलकर बाटेंगे खुशियां
रमजान माह के दौरान सौहाद्र्र का गुलदस्ता खिलेगा। हिन्दू भाई मुस्लिम भाइयों को रोजा इफ्तार कराते हुए एक दूसरे के पर्वों की खुशियां बांटेंगे।

हर बुराई से बचें
रोजा शब्द अरबी के सोम शब्द से बना है। रोजे का मतलब है सहरी खा लेने के बाद गुरुब-ए-आफताब (सूरज डूबने)तक ना सिर्फ खाने-पीने से रुकना, बल्कि झूठ, चुगली, गीबत से रुकना, किसी को तकलीफ देने से बचना। मतलब हर बुराई से बचना और खुद की मुकर की गई हदों में पाबंद रहना। रोजा एक पोशीदा इबादत (छुपी हुई) है, क्योंकि रोजादार की हकीकत खुदा के सिवा किसी को मालूम नहीं होती। रोजादार खुदा के लिए हर बुराई से बचता है, खाने-पीने से रुकता है। ये तकवा इंसान की सारी जिंदगी पर असर अंदाज होता है। रोजा इंसान को खुदा से करीब करता है। अल्लाह ने फरमाया है रोजा मेरे लिए है और मैं ही इसका अजर बदला अता करूंगा। रमजान का महीना रहमतों की बारिश का महीना है। इस मुबारक महीने में ही कुर्आन नाजिल हुआ। इस मुबारक महीने में अल्लाह ने शब ए कद्र (हजार महीनों की रातों से ज्यादा अफजल) अता की। जब माह ए रमजान आता है तो जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और दोजख के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। शैतान को कैद कर दिया जाता है। -मोहम्मद इब्राहिम, शहर इमाम सीकर

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