17 साल तक क्रिकेट का मैच तक नहीं देखा, फिर ऐसा अभ्यास किया कि सीधे राजस्थान टीम में चयन

(Sikar's daughter Bhavna selected for Ranji Trophy) 17 साल तक हमारी बेटी को क्रिकेट के बारे में कुछ पता नहीं..। सुना था तो बस इतना की क्रिकेट कोई खेल है..। सिर्फ पढ़ाई और घर में मां संतोष की मदद करना ही इनकी दिनचर्या। कक्षा 12 वीं 75 फीसदी अंकों के साथ पास की तो जयपुर के महारानी कॉलेज में दाखिला मिल गया। बस यही से जिदंगी में नया टर्निंग प्वॉइंट आ गया।

By: Sachin

Updated: 03 Mar 2021, 12:48 PM IST

सीकर/लक्ष्मणगढ़. 17 साल तक हमारी बेटी को क्रिकेट के बारे में कुछ पता नहीं..। सुना था तो बस इतना की क्रिकेट कोई खेल है..। सिर्फ पढ़ाई और घर में मां संतोष की मदद करना ही इनकी दिनचर्या। कक्षा 12 वीं 75 फीसदी अंकों के साथ पास की तो जयपुर के महारानी कॉलेज में दाखिला मिल गया। बस यही से जिदंगी में नया टर्निंग प्वॉइंट आ गया। एक दिन अभ्यास सत्र का मैच देखने गई बेटी पर कोच इमरान खान की नजर गई तो उन्होंने क्रिकेट की पिच पर उतरने की सलाह दी। इसके बाद बेटी को इसमें कॅरियर की नई राहें देखने लगी तो रात-दिन अभ्यास में जुट गई। जिसका परिणाम मिला राजस्थान टीम में चयन के रूप में। यह कहानी है तीन साल में गेंदबाजी के दम पर पूरे प्रदेश में सुखिर्र्याो में रहने वाली सीकर जिले की बेटी भावना मीना की। मूलत: लक्ष्मणगढ़ इलाके में मीना की ढाणी निवासी होनहार भावना फिलहाल बीए अंतिम वर्ष की छात्रा है।


पिता करते है मजदूरी, अभावों में देखा सपना
भावना के पिता रामकृष्ण मीणा गांव में ही मजदूरी करते है। अभावों में आगे बढऩे वाली बेटी ने संघर्ष को अपनी राह चुना। उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखकर भी हार नहीं मानी। यह बात उन्होंने कोच को बताई तो उन्होंने भी काफी मदद की। फिलहाल वह जयपुर की इवेंट क्रिकेट एकेडमी में चार से छह घंटे नियमित अभ्यास करती है।

लक्ष्य: भारतीय टीम से खेलकर सीकर का मान बढ़ाना

दो मैचों में सात विकेट झटके, मिली सीनियर टीम में जगह
हाल ही में आयोजित सीनियर महिला चैलेंजर ट्रॉफी में दो मैचों में सात विकेट लिए थे। इसके बाद वह चयनकर्ताओं की नजर में आ गई। उसे सीनियर टीम में शामिल किया है। इससे पहले वह अंतर विश्वविद्यालय, अंडर 19, अंडर 23 व वेस्ट जोन क्रिकेट प्रतियोगिता मेंं 40 से अधिक विकेट झटक चुकी है।


एक्सपर्ट व्यू: क्रिकेट में लगातार मजबूत हो रही है धाक

सीकर की धरती शिक्षा के साथ खेलों में भी काफी आगे है। यहां की धरती से आईपीएल तक का सफर आदित्य गढ़वाल ने तय किया। अब लक्ष्मणगढ़ की बेटी को रणजी टीम में जगह मिली है। क्रिकेट में सफलता हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण काम है। भावना की सफलता से अन्य बेटियों को भी प्रेरणा मिलेगी।
सुभाष जोशी, सचिव, जिला क्रिकेट संघ

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