सीकर में दिल्ली अग्निकांड जैसा खतरा ! संकरी गलियों में आग लगे तो दमकल भी नहीं पहुंचे

सूरत के कोचिंग सेंटर ( Surat Coaching Center Fire ) और अब दिल्ली में आग ( Delhi Fire ) से 43 की मौत ( 43 killed in Delhi Fire ) के बाद देश भर में लोग भले ही सहम गए हो, लेकिन सीकर में जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी है। आग के इंतजाम को लेकर सीकर ( Reality Test of Fire System in Sikar ) में चारों तरफ गड़बड़झाला है।

सीकर.

सूरत के कोचिंग सेंटर ( Surat Coaching Center Fire ) और अब दिल्ली में आग ( Delhi fire ) से 43 की मौत ( 43 killed in Delhi Fire ) के बाद देश भर में लोग भले ही सहम गए हो, लेकिन सीकर में जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी है। आग के इंतजाम को लेकर सीकर ( Reality Test of Fire System in Sikar ) में चारों तरफ गड़बड़झाला है। शहर की तंग गलियों में आग लगने के बाद दमकल घुस नहीं सकती। वहीं आवासीय और व्यवसायिक भवनों में चल रहे अधिकतर कोचिंग, गोदाम, फैक्ट्री, रेस्टोरेंट, विवाह स्थल में आग से इंतजाम के नाम पर हर तरफ लापरवाही सामने आती है। यहां सुरक्षा की अनदेखी कभी भी बड़ी समस्या पैदा कर सकती है। मई माह में सूरत में अग्नि हादसे के बाद नगर परिषद ( sikar nagar parishad ) की ओर से शुरू किया गया फायर फाइटिंग सिस्टम लगाने का जागरूकता अभियान भी कमजोर साबित हो गया। परिषद ने नियमों की पालना नहीं करने वाले भवनों को सीज करने की घोषणा की थी, लेकिन यह योजना भी मिलीभगत के खेल में उलझती हुई नजर आ रही है।


नियमों के पेच में उलझा दी फायर एनओसी ( Fire NOC )

नियमानुसार 15 मीटर से ऊंचे भवन के लिए फायर एनओसी लेना अनिवार्य है। सीकर में निर्माण स्वीकृति के दौरान इस नियम का ही फायदा उठाया गया। बिल्डर भवन की स्वीकृति 15 मीटर से कम की लेता है। लेकिन परिषद ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जहां पर 50 से अधिक लोगों की आवाजाही और 300 मीटर से बड़े कंस्ट्रक्शन एरिया के भवन के लिए भी फायर एनओसी लेना आवश्यक है। इसके अलावा 100 वर्ग मीटर से बड़े संस्थान, कार्यालय, गोदाम व गैराज के लिए भी फायर एनओसी लेना होगा। इसके अलावा विद्यालय, महाविद्यालय, एक हजार वर्गफीट क्षमता से बड़े रेस्टोरेंट, चिकित्सालय, बैंक, वित्तिय संस्थान और समस्त औद्योगिक इकाइयां भी इसके दायरे में आ गए हैं।

सीकर में दिल्ली अग्निकांड जैसा खतरा ! संकरी गलियों में बहुमंजिला भवन, आग लगे तो दमकल भी नहीं पहुंचे

हाइड्रोलिक प्लेटफार्म के लिए सात वर्ष पहले बना था प्रस्ताव
सीकर शहर के विस्तार के साथ परिषद ने सुविधाओं के लिए प्रस्ताव तो तैयार करती है, लेकिन अधिकतर प्रस्ताव यहीं पर कागजों में दबकर रह गए। बहुमंजिला भवन में आग बुझाने में काम आने वाले हाइड्रोलिक प्लेटफार्म और लिफ्ट के प्रस्ताव तैयार हुए। परिषद ने करीब सात वर्ष पहले बहुंजिला भवनों की आग बुझाने के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफार्म व लिफ्ट खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। लेकिन आज तक यह प्रस्ताव राज्य सरकार के पास अनुमति के लिए विचाराधीन है। इस संबंध में परिषद के एफओ सम्पत नारायण का कहना है कि इस संबंध में कई बार रिमाइंडर भी भेजे गए हैं।


दिल्ली में आग लगी तो फिर जागे
दिल्ली में आग के बाद नगर परिषद अग्निशमन के संसाधनों को लेकर एक बार फिर जागी है। परिषद के आयुक्त ने बहुमंजिला इमारतों के मालिकों को अग्नि सुरक्षा के लिए समुचित सुरक्षा करने के निर्देश जारी किए हैं। परिषद की टीम की जांच में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम ठोस नहीं पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। मई माह में परिषद की ओर से चलाए गए अभियान के बाद 67 संस्थाओं को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन महज दस संस्थाओं में ही इस पर कार्य हुआ।


गलियों में कैसे पहुंचेगी दमकल
शहर में अतिक्रमण के चलते कई इलाकों में दकमल की गाड़ी भी नहीं पहुंच सकती। यह समस्या वषों से चली आ रही है। सर्वाधिक खराब स्थिति भीतरी शहर की है। शहर की भीड़भाड़ वाले क्षेत्र तबेला की गलियों में कई बड़े मार्केट व शॉपिंग मॉल बन गए। लेकिन इन बाजारों में आग के इंतजाम का ध्यान निर्माणकर्ताओं और नगर परिषद ने नहीं रखा। शहर के पतासा की गली, सुभाष चौक की गलियों में भी यह ही स्थिति है। बाहरी क्षेत्र की स्थिति देखे तो बड़ी गंभीर है। नवलगढ़ और पिपराली रोड पर कई कोचिंग संस्थान और छात्रावास ऐसी गलियों में चल रहे हैं, जहां आग लगने पर दमकल का पहुंचना खतरे से खाली नहीं है।

सीकर में दिल्ली अग्निकांड जैसा खतरा ! संकरी गलियों में बहुमंजिला भवन, आग लगे तो दमकल भी नहीं पहुंचे

परिषद को नहीं पता कितनी है खतरे की इमारत
सीकर में बहुमंजिला भवनों की स्थिति यह है कि जिसको जहां पर जगह मिली, वहीं पर बहुमंजिला भवन खड़ा कर दिया। खतरों के बारे में परिषद और बिल्डर दोनों ने ही नहीं सोचा। बिल्डर की स्थिति भवन का निर्माण कर सौपने व बेचने तक की रही। परिषद ने कभी मजबूती से इन इमारतों का सर्वे तक नहीं किया। ऐसे मे स्थिति यह है कि नगर परिषद के पास अभी तक यह पता नहीं है कि शहर में कितनी बहुमंजिला इमारते हैं।


बड़ा सवाल: फायर एक्ट फाइलों में क्यों?
प्रदेशभर में आगजनी की घटनाओं के बावजूद सरकार फायर एक्ट प्रस्ताव को दबाकर बैठी है। वर्ष 2018 में नगर निकायों ने स्वायत्त शासन विभाग को पत्र लिखकर इसकी जरूरत बताई थी। हाईकोर्ट में विचाराधीन याचिका का हवाला दिया गया, जो आग की दुर्घटनाओं के मामले में लंबित है। निगम आयुक्त रवि जैन ने अलग से बायलॉज की जरूरत मानी थी। सरकार को दिल्ली फायर एक्ट, 2007 और पंजाब फायर सेफ्टी एक्ट, 2004 का हवाला दिया गया है। इसके कई प्रावधान जोडऩे की अनुशंसा की गई।


बहुमंजिला भवनों में अग्नि सुरक्षा के मापदंडों की जांच के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। तंग गलियों के मामले में जल्द रिपोर्ट ली जाएगी। संसाधन बढ़ाने के मामले में भी चर्चा की जाएगी। -रेखा मीणा, कार्यकारी आयुक्त, नगर परिषद, सीकर

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Naveen Reporting
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