यहां बीमार होने से पहले अस्पताल से पूछना पड़ता है पलंग मिलेगा या नहीं !

जिले के सबसे बड़े कल्याण अस्पताल की क्षमता 300 बैड है इनकी एवज में 450 मरीज भर्ती रहते हैं।

By: Vinod Chauhan

Published: 16 May 2018, 10:35 AM IST

सीकर.

जिले के सबसे बड़े कल्याण अस्पताल की क्षमता 300 बैड है इनकी एवज में 450 मरीज भर्ती रहते हैं। लेकिन मेल मेडिकल व सर्जिकल वार्डों में औसतन 80-100 मरीज भर्ती होते हैं। ऐसे में 30-40 मरीजों को पलंग ही नहीं मिल पाते। उपचार या तो जमीन पर मिलता है या एक ही पलंग पर दो मरीज रहते हैं। हर वार्ड की पलंग क्षमता अलग है, लेकिन अस्पताल के हालात कुछ इसी तरह हैं। पिछले कई दिन से मौसमी बीमारियों के मरीजों के बढऩे से कई बार 80 से 100 मरीज तक भर्ती हो जाते हैं। जबकि उन वार्डों के पास पलंग ही औसतन अधिकतम 50 तक ही होते हैं। पलंग की समस्या के चलते कई बार मरीजों को यहां आते ही पलंग नहीं मिल पाता।

 

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पलंग मिला, अगले दिन भगाया
पिछले दिनों मेल मेडिकल वार्ड देर रात एक मरीज को भर्ती कर लिया गया। रात को उसे तत्काल पलंग नहीं मिल पाया। उसने सिफारिश कर पलंग पाया, लेकिन अगले ही दिन उसे पलंग से हटाने के आदेश दे दिए गए। हतप्रभ मरीज फिर से सिफारिश का जुगाड़ करने लगा।


पलंग खाली, फिर भी अनुपलब्धता
कई बार मरीज भर्ती किसी वार्ड में होता है, लेकिन उस समय उस वार्ड का कोई पलंग खाली नहीं होता। जबकि दूसरे वार्ड में पलंग खाली होता है। ऐसे में मरीज को पलंग की अनुपलब्धता बताकर इनकार किया जाता है।


मिले खराब हालात
पत्रिका टीम ने पिछले कई दिनों के दौरान विभिन्न वार्डों का जायजा लिया तो हालात ज्यादा अच्छे नजर नहीं आए। मरीज इतनी तादाद में थे कि अस्पताल और अस्पताल प्रशासन इंतजाम कर ही नहीं पा रहे। कुछ जगह तो भर्ती क्षमता के मुकाबले दोगुने मरीज भर्ती किए जा रहे हैं।


अब नए से आस
मेडिकल कॉलेज से अटैच होने के बाद एसके अस्पताल परिसर में 300 बैड का नया अस्पताल बनाया जाएगा।

Vinod Chauhan
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