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...तो कैसे मिले अफसरों व बेरोजगारों को राहत

44 में से रोजगार अधिकारियों के 15 पद खाली पदोन्नति नहीं होने से अधिकारियों में मायूसी 11 अधिकारी राजधानी में अब मात्र 20 अधिकारियों के भरोसे प्रदेश के 33 जिले और अन्य 15 कार्यालय

सीकर

Published: June 24, 2022 12:12:53 pm

रविंद्र सिंह राठौड़
patrika.com
प्रदेश में एक तरफ बेरोजगारी भत्ते के लिए लगातार आवेदनों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं दूसरी तरफ प्रदेशभर के रोजगार कार्यालयों में लगातार अधिकारी व कर्मचारियों की कमी बढ़ती जा रही है। इस कारण कार्यालयों में लंबित आवेदनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इधर, विभाग में वर्ष 2002-03 से पदोन्नति लंबित होने की वजह से अधिकारियों में सरकार के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है। विभाग में फिलहाल दो उप निदेशक, महज एक संयुक्त निदेशक, 13 में से 11 सहायक निदेशक एवं 44 जिला रोजगार अधिकारियों में से 15 के पद खाली है। आरएएस परीक्षा 1992 बैच के अधिकारियों का अब तक पहला प्रमोशन नहीं हुआ हैं। विभाग के अधिकारियों के केडर स्ट्रेन्थ 61 में से 31 अधिकारी कार्यरत हैं। इन 31 में से 11 अधिकारी राजधानी जयपुर में कार्यरत हैं। मात्र 20 अधिकारियों के भरोसे राजस्थान के 33 जिलों व अन्य 15 कार्यालय हैं।
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शून्य पंजीयन, कार्यालयों पर करोड़ों खर्च
विभाग में निदेशालय के अलावा 48 जिला व राज्य स्तरीय कार्यालय हैं। बदलते परिवेश के कारण उप क्षेत्रीय कार्यालय, भिवाड़ी व ब्यावर, जन जाति मार्गदर्शन केंद्र बांसवाड़ा, उप कार्यालय सागवाड़ा, रावतभाटा, कुशलगढ़, स्वरोजगार कार्यालय अजमेर, संयुक्त निदेशक स्वरोजगार कार्यालय जयपुर, पीएडई कार्यालय जयपुर, विश्वविद्यालय मार्ग दर्शन केंद्र जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर कार्यालयों की प्रासंगिकता समाप्त हो चुकी है। इन कार्यालयों में बेरोजगारों का 0 पंजीयन हैं। इन पर करोड़ों का बजट खर्च हो रहा है।
अटका जयपुर का मॉडल कॅरियर सेंटर
भारत सरकार की ओर से रोजगार कार्यालयों को आधुनिक सुविधा संपन्न कर मॉडल कैरियर सेंटर (एमसीसी) के रूप में रूपांतरित करने की महत्वाकांक्षी योजना 2015 में शुरू की गई। देशभर में 997 रोजगार कार्यालय हैं। इनमें से 175 कार्यालयों को मॉडल कॅरियर सेंटर में परिवर्तित किया गया। इन 175 में से उत्तर प्रदेश के बाद सर्वाधिक 16 रोजगार कार्यालय राजस्थान में है। लेकिन राजस्थान में मात्र कोटा, बीकानेर व भरतपुर ही मॉडल कैरियर सेंटर बन पाए। प्रदेश की राजधानी जयपुर का मॉडल कैरियर सेंटर 2015 में स्वीकृत होकर भी लाल फीता शाही का शिकार होने से शुरू नहीं हो पाया। इससे प्राप्त करीब दो करोड़ रुपए के बजट का उपयोग नहीं हो सका। इन मॉडल कैरियर सेंटरों में बेरोजगारों को आधुनिक सुविधा टेक्नोलॉजी, रोजगार सहायता सहायता, साइको मैट्रिक टेस्ट का लाभ मिलता।
प्रदेश में नहीं नेशनल कैरियर सर्विस पोर्टल
भारत सरकार की ओर से नेशनल कैरीयर सर्विस (एनसीएस) शुरू कर एक ही पोर्टल पर युवाओं को रोजगार के लिए पंजीयन, मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शन, रोजगार सहायता शिविर की जानकारी, सरकारी व निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसरों की जानकारी मिलती हैं। इस पोर्टल पर निजी क्षेत्र के नियोक्ता लोकल सर्विस प्रोवाइडर, कैरियर काउंसलर, कौशल प्रदाता, कैरियर केंद्र भी अपना पंजीयन करवा सकते हैं। वर्तमान में इस पोर्टल पर 23 हजार 445 बेरोजगार, एक लाख 92 हजार 553 एक्टिव एम्पलॉयर, दो लाख 15 हजार 998 रिक्तियां प्रदर्शित हैं। महिला दिव्यांगों की रिक्तियां अलग से हैं। इसकी सेवाएं निशुल्क है। लेकिन राजस्थान सरकार के पोर्टल एम्पलॉयमेंट एक्सचेंज मैनेजमेंट सर्विस (इइएमएस) पोर्टल पर यह सुविधाएं नहीं हैं।
राज कौशल पोर्टल से युवा परेशान
कोरोना काल में करीब 80 लाख रुपए में श्रम विभाग की ओर से निर्मित पोर्टल राज कौशल में जनशक्ति पंजीयन, रोजगार की तलाश, प्रशिक्षण की आवश्यकता, नियोक्ता पंजीयन, प्लेसमेंट एजेंसी पंजीयन की सुविधा दी गई है। लेकिन इसकी प्रक्रिया जटिल है, न ही यह युवाओं में लोकप्रिय है। पोर्टल रोजगार विभाग को स्थानांतरित कर दिया है। इसमें नेशनल कैरीयर सर्विस, भारत सरकार की रोजगार कार्यालय नीतियां व प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया हैं। यह भारत सरकार के नवीन श्रम कानूनों के अनुसार भी नहीं हैं। रोजगार विभाग व बेरोजगारों के लिए सिरदर्द बन गया हैं।
एक साल में 19030 नवीन पंजीयन
श्रम विभाग के पोर्टल राज कौशल में 1317411 प्रवासी श्रमिक, 2411090 निर्माण श्रमिक, 1526540 रोजगार विभाग के इइएमएस पर पंजीकृत बेरोजगार 337724 आरएसएलडीसी के प्रशिक्षित युवा, 121351 आईटीआई प्रशिक्षितों का डाटा उठाकर शामिल किया गया है। हकीकत में स्वेच्छा से एक साल में नवीन पंजीयन 14725 ने करवाया हैं। उपलब्ध रोजगार के आंकड़े 9585 हैं, अब बेरोजगार तीनों में से किस-किस पोर्टल पर पंजीयन कराए। अब राजस्थान सरकार ई एम्पलायमेंट एक्सचेंज बनाने की योजना बना रही हैं।

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