राम मंदिर के लिए हलवाई तो कोई धोबी बनकर पहुंचा अयोध्या

सीकर. अयोध्या करती है आह्वान... ठाट से कर मंदिर निर्माण.... शिला की जगह लगा दे प्राण और रामजी की सेना चली....। 1990 के दौर में यह भजन हर मन मंदिर में गूंज रहा था।

By: Sachin

Updated: 05 Aug 2020, 12:43 PM IST

सीकर. अयोध्या करती है आह्वान... ठाट से कर मंदिर निर्माण.... शिला की जगह लगा दे प्राण और रामजी की सेना चली....। 1990 के दौर में यह भजन हर मन मंदिर में गूंज रहा था। पूरे देश में एक अलग जोशीला माहौल था। मंदिर निर्माण के लिए पूरे देश में आंदोलन तेजी से शुरू हो गया। विहिप सहित अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं के मन में अयोध्या जाने का उत्साह हिलौरे लेने लगा। इस बीच यूपी सरकार ने प्रदेश में प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी। लेकिन धोरों की धरती के लाल इस तरह की पाबंदी की धमकी से कहा रुकने वाले थे। सीकर से 200 से अधिक विहिप कार्यकर्ता व संतों की टोली 18 अक्टूबर 1990 को अलग-अलग स्थानों से रवाना हुई। जिले की सीमा पार करते ही सभी अलग-अलग टोलियों में बंट गए, ताकि किसी को शक नही हो। दिल्ली तक सफर आसानी से ट्रेन से पूरा किया। यहां से कानपुर की ट्रेन बदली। कानपुर पहुंचते ही पुलिस का सख्त पहरा शुरू हो गया। पुलिस ने रानोली, पलसाना, गोरिया इलाके के कार्यकर्ताओं से पूछताछ करना शुरू किया यहां कैसे आए। हमने पुलिस के सवालों से बचने के लिए रात को ही जवाब तैयार कर लिए थे। हमारे प्रखंड के तीन कार्यकर्ताओं ने कहा कि साहब... हम तो हलवाई का काम करते है और यहां शर्माजी के बेटे की शादी में जा रहे हैं। सीकर जिले के किसी कार्यकर्ता ने नाई तो किसी ने धोबी का काम होने की वजह से यहां पहुंचने की बात बताई। लेकिन पुलिस ने देर रात गिरफ्तार कर लिया।

25 हजार से अधिक कारसेवको को किया गिरफ्तार
कानपुर रेलवे स्टेशन से उस दिन लगभग 25 हजार से अधिक कारसेवकों को गिरफ्तार किया था। इन सभी को उत्तरप्रदेश की प्रमुख जेल फतेहगढ़ भेजा गया। सीकर के कार्यकर्ताओं को भी बाद में जेल भिजवा दिया गया।

दो नवम्बर को हुई थी रिहाई, जेल में भगवान के जयघोष
सरकार स्तर पर हुई बैठकों के बाद ज्यादातर कारेसवकों को दो नवम्बर 1990 को रिहा कर दिया गया। इस दौरान पूरा जेल परिसर भगवान श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। कारसेवकों का अपने-अपने क्षेत्रों में जाने जोरदार स्वागत हुआ।

जेल से रिहाई पर मिले प्रमाण
कारसेवकों को रिहाई के बाद उत्तरप्रदेश पुलिस की ओर से जेल में रहने का प्रमाण पत्र भी दिया गया था।

और सीकर की एक टोली तीन रात और चार दिन में पहुंची
सीकर के दूसरे जत्थे के कारसेवकों को सूचना मिली कि लखनऊ पहले स्टेशन से पहले कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा रहा है। इस पर सीकर के कार्यकर्ताओं ने लखनऊ से पहले ही चैन खींच कर ट्रेन रोक दी और पैदल ही रवाना हो गए। इस दौरान कार सेवक राम का जयघोष करते ही तीन रात और चार दिन में अयोध्या नगरी पहुंची। कारेसवक बताते है कि रात में जहां भी जगह मिलती सो जाते। एक रात तो नदी के पुल के उपर गुजारी। बाद में अयोध्या पहुंचने पर कुछ कारसेवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

बच्चे-बच्चे में ऐसा जोश कभी नहीं देखा
रामजन्म भूमि के आंदोलन के समय हर गांव-ढाणी व शहर के लोगों में काफी जोश था। गांव व शहरों में सुबह से भगवान राम के भजन शुरू हो जाते थे।

एक रुपया व सिला के लिए रथयात्रा
राम मंदिर में देश के हर व्यक्ति की भागीदारी को इसके लिए सीकर में संतों के सानिध्य में रथयात्रा निकाली गई थी। रथयात्रा जिले के हर गांव-ढाणी तक पहुंची। इस दौरान सवा रुपया व एक सिला ली गई थी।

(जैसा कि उस समय 17 साल दो महीने के सीकर निवासी कारसेवक महावीर प्रसाद ने पत्रिका संवाददाता को बताया)

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