जज्बे को सलाम: 11 साल की उम्र में दोनों हाथ गंवाए, आज बैंक क्लर्क बाहों से चलाते हैं बाइक और कंप्यूटर

International Disability Day 2019 : अपने हाथों की लकीरों को क्या देखते हो, किस्मत तो उनकी भी होती है, जिनके हाथ नहीं होते। इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है दिव्यांग ओमप्रकाश सैनी ( Story of Divyang Om Prakash Saini Mundru Sikar ) ने।

By: Naveen

Published: 03 Dec 2019, 12:36 PM IST

सीकर/मूंडरू.

International Disability Day 2019 : अपने हाथों की लकीरों को क्या देखते हो, किस्मत तो उनकी भी होती है, जिनके हाथ नहीं होते। इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है दिव्यांग ओमप्रकाश सैनी ( Story of Divyang Om Prakash Saini mundru Sikar ) ने। कुछ करने का जज्बा हो तो सौ बाधाएं भी बौनी साबित हो जाती हैं। विश्वास और हौसलों की उड़ान दम भरती हो तो शारीरिक दुर्बलता ही सफलता में बदल जाया करती है। जी हां, कुछ इसी तरह का उदाहरण है रतनपुरा गांव के दिव्यांग ओमप्रकाश सैनी का। दोनों हाथ गंवाने के बाद आज एसबीआई बैंक ( SBI Bank Clerk ) में क्लर्क हैं। 31 वर्षीय ओम प्रकाश सैनी लोगों के लिए जज्बा, हौसला तथा जिंदादिली का बड़ा उदाहरण है। 11 साल की उम्र में चारा काटने की मशीन में आने से दोनों हाथ कहानियों के नीचे से पूरी तरह कट गए। इसके बाद भी धैर्य नहीं खोया और संघर्ष करके पढ़ाई की और मुकाम हासिल भी किया। फिलहाल ओमप्रकाश एसबीआई बैंक चौमूं में क्लर्क है। रतनपुरा की झांझुड़ा ढाणी के किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले ओमप्रकाश सात भाइयों में छठे नंबर के हैं। वे कोहनियों से कंप्यूटर ऑपरेट करते हैं और बाहों की मदद से दुपहिया तथा चौपहिया वाहन भी आसानी से चला लेते हैं। ओमप्रकाश की शादी वर्ष 2012 में हुई। उनके 3 साल की बेटी मानवी व चार माह का बेटा है। ओमप्रकाश के पिता किसान थे तथा माता मंगली देवी ग्रहणी है।


तीसरी कक्षा में पढ़ते समय कट गए हाथ
ओमप्रकाश के साथ यह हादसा उस समय हुआ जब वे तीसरी कक्षा में पढ़ते थे। स्कूल से आने के बाद वे चारा काटने की इलक्ट्रॉनिक मशीन की चपेट में आ गए। इससे उनके दोनों हाथ कोहनियों तक पूरी तरह कट गए थे। बाद में उन्हें कई दिनों तक परेशानी होती रही। पहले तो उन्हें लिखने में परेशानी हुई। लेकिन निरंतर अभ्यास के बाद लेखन आसान हुआ।

जज्बे को सलाम: 11 साल की उम्र में दोनों हाथ गंवाए, आज बैंक क्लर्क बाहों से चलाते हैं बाइक और कंप्यूटर

यूं चलाते है कम्प्यूटर
ओमप्रकाश कंप्यूटर ऑपरेट करने के लिए कोहनियों तथा बाहों के बीच पैन को फंसाते हैं। फिर पेन से ही की-बोर्ड के बटन दबाते। वे एंड्रॉइड मोबाइल भी आसानी से चला लेते हैं।


साइकिल से शुरुआत, कई बार गिरे भी
सैनी बताते हैं कि हाथ गंवाने के बाद जब भी दूसरों को साइकिल चलाते देखते थे, तो उन्होंने तय किया कि वह भी अपनी कमजोरी को जीतने नहीं देंगे। 13-14 साल की उम्र में साइकिल सीखना शुरू किया। कई बार गिरे भी लेकिन हिम्मत नहीं हारी। साइकिल सीखने के बाद वे बाइक व चौपहिया वाहन भी चलाने लगे।


पेन पकड़ कर लिखना सीखा
ओमप्रकाश ने कोहनी और बाह से पैन पकड़ कर लिखना सीख लिया। दसवीं कक्षा में स्कूल भी टॉप किया। कड़ी मेहनत रंग लाई और नौकरी के लिए भटकना नहीं पड़ा। वर्ष 2012 में फस्र्ट ईयर की पढ़ाई के दौरान एसबीबीजे में नौकरी लग गयी। ओमप्रकाश बताते हैं कि ग्रेजुएशन के बाद बैंक में नौकरी तो मिल गई लेकिन सपना ऊंचे ओहदे पर जाने का था, जिसके लिए अभी भी पढ़ाई जारी है।

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