शिक्षक दिवस विशेष: सात साल में छह तबादले...जहां भी नियुक्त हुए बदल दी स्कूल की तस्वीर

सीकर. यदि मन में जुनून हो तो परिस्थिति भी बाधा नहीं बनती। लगन से काम किया जाए, तो समय व स्थान भी कोई मायने नहीं रखता..। सफलता के इसी फलसफे को साबित कर रहा है शहर के हाउसिंग बोर्ड निवासी विवेक जांगिड़ का संकल्पों से भरा सफर।

By: Sachin

Updated: 05 Sep 2020, 11:56 AM IST

सीकर. यदि मन में जुनून हो तो परिस्थिति भी बाधा नहीं बनती। लगन से काम किया जाए, तो समय व स्थान भी कोई मायने नहीं रखता..। सफलता के इसी फलसफे को साबित कर रहा है शहर के हाउसिंग बोर्ड निवासी विवेक जांगिड़ का संकल्पों से भरा सफर। जिन्होंने महज सात साल में सीकर से लेकर राजसमंद, अजमेर व बाड़मेर तक के छह तबादलों को न केवल बिना किसी शिकवा-शिकन के सहज स्वीकार किया, बल्कि जिन छह स्कूलों में नियुक्ति दी गई, वहीं की कायापलट कर दी। सरकारी स्कूलों में कला प्रदर्शनी, विज्ञान मेले, विद्यालय वाटिका, स्टाफ ड्रेस कोड, केरियर सेमिनार, आर्ट गैलरी व स्कूलों के सामूहिक मेलों के अलावा स्कूल में दुर्गा पूजा महोत्सव व दिवाली मनाने के अनूठे नवाचार कर चुके विवेक जिले से लेकर राज्य स्तर के कई सम्मान भी प्राप्त कर चुके हैं। पाटन की राजकीय महात्मा गांधी स्कूल छाजा की नांगल में हालिया साक्षात्कार से प्रधानाचार्य पद पर नियुक्त होने वाले विवेक का अगला मिशन अब अपनी मौजूदा स्कूल को प्रदेश की सर्वश्रेष्ठ स्कूल बनाना है।

विवेक भामाशाहों को प्रेरित कर छह स्कूलों में एक करोड़ रुपए से ज्यादा का निर्माण कार्य करवा चुके हैं। राउमावि काशी का बास में रहते हुए उन्हें इसके लिए राज्य स्तरीय भामाशाह प्रेरक पुरस्कार से भी नवाजा गया।

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कलक्टर से सम्मान, निदेशक ने भी सराहा
जांगिड़ ने 2013 में पहली नियुक्ति के साथ रामावि श्यामपुरा में विद्यालय वाटिका, आर्ट एंड क्राफ्ट, सरकारी स्कूलों का सामूहिक बाल मेला, प्रदर्शनी, स्टाफ के लिए ड्रेस कोड लागू करने व दिवाली के दिन स्कूल में ही पर्व मनाने की अनूठी परंपरा शुरू की। उनके नवाचारों से प्रभावित होकर उन्हें कलक्टर ने सम्मानित किया। इसके बाद राउमावि काशी का बास में भामाशाहों के सहयोग से अद्भुत भारत गलियारा, 14 स्कूलों का कॅरियर सेमिनार व दूर्गा पूजा महोत्सव का आयोजन करवाया। अजमेर की राउमावि शिखरानी में तबादला होने पर वहां बच्चों की प्रतिभाओं को देखते हुए उनकी रचनाओं पर स्पंदन पत्रिका का प्रकाशन कराया। जिसे तत्कालीन निदेशक सौरभ स्वामी ने भी सराहा। राउमावि काबरा गजानंद में डांडिया रास का आयोजन भी शिक्षा जगत में नवाचार की अनूठी मिसाल बना।

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