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9 साल पहले नौकरी देकर नियम बनाना भूल गई सरकार, उधर बच्चों की बढ़ी परेशानी

प्रदेश में बेरोजगारों के आक्रोश के बाद सरकार ने पूर्व प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती तो कर ली लेकिन सरकार नौ साल में अभी तक कायदे नहीं बना सकी है।

सीकर

Published: January 05, 2022 10:53:42 am

सीकर. प्रदेश में बेरोजगारों के आक्रोश के बाद सरकार ने पूर्व प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती तो कर ली लेकिन सरकार नौ साल में अभी तक कायदे नहीं बना सकी है। इस वजह से प्रदेश में पूर्व प्राथमिक शिक्षा की डोर मजबूत नहीं होने के साथ ड्रॉप आऊट का आंकड़ा भी कम नहीं हो पा रहा है। हालत यह है कि प्रदेश में फिलहाल पूर्व प्राथमिक शिक्षकों का आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा दे रखा है। जबकि सरकार ने इस बजट में महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पूर्व प्राथमिक कक्षा संचालित करने का ऐलान भी कर दिया है। लेकिन शिक्षकों को लेकर कोई ऐलान नहीं किया है। ऐसे में शिक्षा विभाग की ओर से फिलहाल तृतीय श्रेणी शिक्षकों को लगाने की तैयारी है। पूर्व प्राथमिक कक्षाओं को पढ़ाने के लिए अब बीएसटीसी के अंग्रेजी माध्यम विद्यार्थियो के साथ एनटीटी शिक्षकों ने अपना हक जताया है। हालात यह है कि प्रदेश में पूर्व प्राथमिक कक्षाओं के संचालन के बाद भी अलग से कैडर व सेवा नियम नहीं होने की व्यवस्था बेपटरी है। यदि अब भी नियम नहीं बनाए गए तो इसका खामियाजा पूर्व प्राथमिक कक्षाओं में पढऩे वाले विद्यार्थियों को भी भुगतना पड़ सकता है।

सरकार इसलिए उलझन में...

बीएसटीसी शिक्षक: स्कूलों में लगने से हमारे पद कम होंगे
पूर्व प्राथमिक स्कूलों में एनटीटी शिक्षकों के समायोजन के प्रस्ताव से बीएसटीसी शिक्षकों में नाराजगी है। इनका पक्ष है कि यदि पूर्व प्राथमिक स्कूलों में इन शिक्षकों को लगाया जाता है तो इनके पद कम होंगे। पहले ही सरकार ने सैकड़ों स्कूलों को कम नामांकन का तर्क देकर बंद कर दिया। तर्क है कि बीएसटीसी शिक्षक पूर्व प्राथमिक के साथ कक्षा एक से पांचवीं के बच्चों को पढ़ाने के लिए पात्र है।

एनटीटी शिक्षक: प्री स्कूल के बच्चों को मिलेगा फायदा
फिलहाल प्रूर्व प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक नहीं लगाए गए है। यदि सरकार कैडर बनाकर स्कूलों के साथ आंगनबाड़ी केन्द्रों में भी जोड़े रखती है तो प्री स्कूल के विद्यार्थियों को काफी फायदा मिलेगा।

अन्य राज्यों में क्या व्यवस्था
देश में अभी तक दिल्ली व चंडीगढ़ सरकार की ओर से पूर्व प्राथमिक कक्षाओं का सरकारी विद्यालयों में संचालन किया जा रहा है। इन स्कूलों में अध्यान के लिए एनटीटी शिक्षकों की सेवाएं ली जा रही है। खास बात यह है कि यहां नवाचार के तौर पर आधे दिन स्कूल और आधे दिन आंगनबाड़ी केन्द्रों पर सेवाएं ली जा रही है। इस वजह से वेतन विसंगति की समस्या भी दूर हो गई।

इधर, दूसरे राज्यों से एनटीटी करने वाले बेरोजगारों में आक्रोश
वर्ष 2018 की एनटीटी भर्ती के अब तक पूरी नहीं होने से बेरोजगारों में आक्रोश भी है। बेरोजगारों का कहना है कि विभाग की ओर से अब तक तीन सूची जारी कर दी गई। लेकिन पूरे पद नहीं भरे जा सके है। एनटीटी बेरोजगारों का कहना है कि प्रदेश में यह कोर्स बंद होने पर सैकड़ों विद्यार्थियों ने दूसरे राज्यों से कोर्स कर लिया। ऐसा कोई आदेश नहीं था कि दूसरे राज्य से पढ़ाई नहीं कर सकते। कई अभ्यर्थियों को बिना कारण के अयोग्य घोषित कर दिया। जबकि विभाग को स्पष्ट करना चाहिए इस वजह से इनको मौका नहीं दिया जा रहा है। इस मामले में पिछले दिनों बेरोजगारों की ओर से जयपुर में महिला एवं बाल विकास निदेशालय व मंत्री आवास के सामने प्रदर्शन किया था। इसके बाद भी अभी तक इस मामले में कोई निर्णय नहीं हो सका है।

सरकार बनाए नियम तो सुधरेगी व्यवस्था
राज्य सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग के जरिए एनटीटी शिक्षकों की भर्ती तो कर दी। लेकिन अभी तक सेवा व पदोन्नति नियम नहीं बनने से व्यवस्था बेपटरी है। जब अन्य राज्यों की स्कूलों में प्री प्राईमरी कक्षाओं के अध्यापन के लिए एनटीटी शिक्षकों को लगाया गया है तो फिर प्रदेश में क्यों नहीं है। सरकार को महात्मा गांधी स्कूलों में पद सृजित करने चाहिए।
टीटू शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, एनटीटी शिक्षक संघ

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