scriptThe idol of the temple came from the sky and the earth in sikar | महावीर जयंती विशेष: आकाश व भूगर्भ से आई मंदिर की मूर्ति, चोरी होने पर लौटी, 108 खंभे भी रहस्य | Patrika News

महावीर जयंती विशेष: आकाश व भूगर्भ से आई मंदिर की मूर्ति, चोरी होने पर लौटी, 108 खंभे भी रहस्य

आज महावीर जयंती है। जिलेभर में भगवान महावीर का जन्म आस्था व उल्लास से मनाया जाएगा। इस बीच हम आपको एक ऐसे जैन मंदिर के दर्शन करवा रहे हैं जो निर्माण की रौचकता के साथ खुद में कई चमत्कारिक रहस्य छुपाए हुए है।

सीकर

Published: April 14, 2022 10:14:18 am

सीकर. आज महावीर जयंती है। जिलेभर में भगवान महावीर का जन्म आस्था व उल्लास से मनाया जाएगा। इस बीच हम आपको एक ऐसे जैन मंदिर के दर्शन करवा रहे हैं जो निर्माण की रौचकता के साथ खुद में कई चमत्कारिक रहस्य छुपाए हुए है। जी, हां ये मंदिर रैवासा गांव का श्री दिगंबर जैन भव्योदय अतिशय क्षेत्र है। जहां 848 साल पहले स्थापित भगवान सुमतिनाथ की भूगर्भ से निकली मूर्ति चमत्कारिक मानी जाती है, तो मंदिर के आधार स्तंभों की गिनती सही नहीं होना भी अचरज का विषय है। मंदिर में हर साल हजारों श्रद्धालु दर्शनों के लिए पहुंचते हैं।

महावीर जयंती विशेष: आकाश व भूगर्भ से आई मंदिर की मूर्ति, चोरी होने पर लौटी, 108 खंभे भी रहस्य
महावीर जयंती विशेष: आकाश व भूगर्भ से आई मंदिर की मूर्ति, चोरी होने पर लौटी, 108 खंभे भी रहस्य

आकाश व भूगर्भ से निकली मूर्ति, चुराने पर भी लौटी
मंदिर में मूर्तियों से जुड़े कई चमत्कार माने जाते हैं। मान्यता है कि मंदिर में स्थापित मूलनायक भगवान आदिनाथ की मूर्ति आकाश से उतरी थी। जबकि भगवान सुमतिनाथ की अतिशय यानी चमत्कारी मूर्ति 1951 में भूगर्भ से निकली थी। जिसे ही मंदिर में प्रतिष्ठित किया गया। अतिशय क्षेत्र समिति अध्यक्ष दीपचंद काला ने बताया कि मंदिर से भगवान शांतिनाथ की दो मूर्ति एक बार चोरी होने के बाद वापस लौटी है। जो एक मुंबई ओर दूसरी नीमकाथाना से बरामद हुई। इसे भी एक बड़ा चमत्कार माना जाता है।


दक्षिण भारत शैली का मंदिर, अंदर शीश महल
मंदिर का निर्माण स्थानीय सेठ नथमल छाबड़ा ने करवाया था। जो पूरा दक्षिण भारत शैली में बना है। आकर्षक कलाकृतियों वाले मंदिर में गर्भ ग्रह शीश महल के रूप में विकसित है। प्राकृत भाषा में लिखे शिलालेख में मंदिर का इतिहास भी लिखा है। पास ही नशियां है। जहां भगवान चंद्रप्रभुु भगवान की प्रदेश की पहली पंचकल्याणक प्रतिष्ठा संपन्न हुई।

गिनती में नहीं आते 108 खंभे
जैन मंदिर की बनावट अद्भुद है। जो 108 खंभों पर टिकी बताई जाती है। लेकिन, गिनती में वह कभी सटीक नहीं बैठती। पत्रिका टीम की दो जांच में भी इनकी गिनती 109 व 111 मिली। काला ने बताया कि जैन मुनि सुधा सागर ने भी हर एक खंभे पर नारियल रखकर उन्हें गिनने की कोशिश की, तो भी आंकड़ा 108 नहीं बैठा।

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