राजस्थान में यहां के अफसर नहीं मानते कलक्टर के आदेश

vishwanath saini

Publish: Dec, 08 2017 10:41:08 (IST)

Sikar, Rajasthan, India
राजस्थान में यहां के अफसर नहीं मानते कलक्टर के आदेश

सीकर जिले के आला अधिकारी खुद जरूरतमंद सैनिकों की सहायता में रोड़ा बने हुए हैं।

सीकर. जिले के आला अधिकारी खुद जरूरतमंद सैनिकों की सहायता में रोड़ा बने हुए हैं। बानगी यह है कि इनकी मदद के साढ़े चार लाख रुपए प्रशासन के जिम्मेदार अफसर दबाए बैठे हैं। जिनमें एसडीएम व विकास अधिकारी सहित परिवहन अधिकारी शामिल हैं। जिन पर सहस्त्र झंडा दिवस के 18 से 32 हजार रुपए तक बकाया चल रहे हैं। बावजूद इसके इनका दिल पसीज नहीं रहा है।


जानकारी के अनुसार सैनिक कल्याण विभाग की ओर से हर बार सहस्त्र झंडा दिवस की राशि के लिए सरकारी अधिकारियों को प्लैग स्टीकर भिजवाए जाते हैं। ताकि इनसे प्राप्त होने वाली राशि से युद्ध व सेना में ड्यूटी के दौरान जख्मी तथा अंग-भंग होने वाले सैनिक की मदद की जा सके। लेकिन, हकीकत यह है कि सरहद की रक्षा करने वाले जवान मदद के अभाव में पीड़ा भोगने को मजबूर हैं। जिनकी चिंता न तो सरकारी नुमाइंदों को है और न ही इनकी परवाह प्रशासन के आला अधिकारी कर रहे हैं।

 

जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल सागरमल सैनी का कहना है कि सहस्त्र झंडा दिवस के सरकारी विभागों में साढ़े चार लाख रुपए अटके हुए हैं। बार-बार रिमाइंडर देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। लक्ष्य के अनुरूप केवल एक तिहाई रुपए ही जमा हो पाए हैं। पीडि़त सैनिकों की सहायता राशि के लिए कलक्टर से गुहार लगाई गई है।


कलक्टर के आदेश भी बेअसर


झंडा दिवस की राशि लौटाने के लिए खुद कलक्टर कई बार इन सरकारी अधिकारियों को लिख चुके हैं। लेकिन, आलम यह है कि इनके आदेश भी अधिकारी हवा में उड़ा रहे हैं।
गुरुवार को स्वयं कलक्टर ने अपने कार्यालय में सहस्त्र झंडा दिवस की राशि सैनिकों की सहायतार्थ पेटी में डालकर इसका श्रीगणेश किया है।

इन्होंने दबा रखा है हक


सैनिक कल्याण विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार जरूरतमंद पूर्व सैनिकों की सबसे अधिक राशि जिला परिवहन अधिकारी ने रोक रखी है। जो कि, 32 हजार रुपए के लिए बार-बार चक्कर कटवा रहे हैं। दूसरे नंबर पर जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक प्रथम व प्रारंभिक हैं। जिन्होंने इनके हक के 20 हजार रुपए अटका रखे हैं। इसके अलावा एसडीएम सीकर, लक्ष्मणगढ़, दांतारामगढ़, धोद व विकास अधिकारी धोद, लक्ष्मणगढ़, पिपराली, फतेहपुर, दांतारामगढ़ सभी ने 17-17 हजार से अधिक की राशि दबा रखी है। इनमें जिले के तहसीलदार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी ग्रामीण प्रकोष्ट, पीडब्ल्यूडी व विद्युत वितरण निगम के अधिशाषी अभियंता तक शामिल हैं।

इनको है दरकार
कारगिल युद्ध में अपना एक पैर गंवा चुके श्रवण सिंह का कहना है कि सरकारी सेवा के बाद मिल रही पेंशन ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। जबकि इससे ज्यादा रुपए तो वे अपने उपचार पर खर्च कर चुके है। इधर, बासनी के छोटेलाल ने बताया कि लड़ाई में आंख की ज्योति जाने के बाद कोई सरकारी सहायता उन्हें मुहैया नहीं करवाई गई है। जिसका मलाल उन्हें और उनके परिवार को है।

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