चोरी के लिए बदनाम गांव के बदमाश जीपीएस की मदद से कई राज्यों को बनाते थे निशाना

हरियाणा के पलवल जिले का घाघोट गांव एटीएम कार्ड बदल कर चोरी करने को लेकर बदनाम है। गांव में 50 से अधिक युवा चोरी करने में माहिर है।

By: Sachin

Published: 23 Aug 2020, 09:52 PM IST

सीकर. हरियाणा के पलवल जिले का घाघोट गांव एटीएम कार्ड बदल कर चोरी करनेको लेकर बदनाम है। गांव में 50 से अधिक युवा चोरी करने में माहिर है। चोरी करने के लिए अलग-अलग टीमें बनी हुई है। एक टीम में चार से पांच युवा ही शामिल होते है। खास बात है कि लग्जरी गाडियों में जीपीएस पर रूट बनाकर सेट कर देते है। इसके बाद जीपीएस के रूट के हिसाब से ही वारदातें करते हुए जाते है। उद्योगनगर थानाधिकारी पवनकुमार चौबे ने बताया कि पुलिस को पूछताछ में जॉनी बावरिया निवासी घाघोट पलवल ने बताया कि इसके बाद अलग-अलग शहरों से निकलते समय वारदात करते हुए जाते है। एक शहर में दो वारदातें करते है। बदमाश पलवल से कोटपूतली, जयपुर, सीकर, चूरू, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, जालौर से होते हुए गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटका व तमिलनाडू तक जाते है। पूरे रूट में घूमते हुए जाते है। इसके बाद वापस में उदयपुर, भीलवाडू, अजमेर, जयपुर, भरतपुर होते हुए घर चले जाते है। ऐसे ही अगली बार दूसरा रूट पर मथुरा, भरतपुर, आगरा होकर बेस्ट बंगाल तक जाकर वारदात करने निकलते है। उद्योगनगर पुलिस ने जॉनी बावरिया को एटीएम कार्ड बदलकर ठगी के मामले में गिरफ्तार किया था। पुलिस रिमांड पर लेकर जॉनी बावरिया से गिरोह में शामिल अन्य लोगों के बारे में पूछताछ कर रही है। गिरोह में शामिल अन्य लोग फरार चल रहे है।

एक महीने में 10-10 दिन के दो रूट
हैडकांस्टेबल सुरेश कुमार ने बताया कि वारदात करने के लिए हर बार गांव से नई टीमें बनती है। वारदात में चाचा-मामा सहित अन्य रिश्तेदारों के युवा भी शामिल होते है। वारदात करने के लिए एक रूट को 10 दिन का बनाते। महीने में 10-10 दिन के दो रूट तय करते है और 10 दिन घर पर आराम करते है। साथ ही अपने पास अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड़ भी रखते है। एटीएम कार्ड़ से रुपए निकालने के साथ ही ऑनलाइन शापिंग भी करते है। जॉनी बावरिया के मामा भूरा का 2010 में एनकाउंटर हो चुका है। मामा ने डकैती कर हत्या कर दी थी। वहीं दूसरा मामा जगदीश चेन्नई जेल में घर में घुस कर हत्या करने के आरोप में आजीवन सजा काट रहा है।

अधिकतर वारदातों का खुलासा नहीं

सीकर जिले में हर महीने औसतन 10 से अधिक कार्ड़ बदलकर ठगी की वारदातें होती है। साथ ही एटीएम पिन पूछताछ कर ऑनलाइन ठगी के भी 50 से अधिक मामले दर्ज होते है। हैरानी की बात है कि पुलिस इन मामलों को अब गंभीरता से नहीं लेती है। अधिकतर मामलों में पुलिस बिना जांच के एफआर लगाकर फाइल को बंद कर देती है। ऐसे मामलों में पुलिस को विशेष सायबर क्राइम की जानकारी होना आवश्यक है। पुलिस अगर गंभीरता बरतें तो आरोपियों के पकड़े जाने से वारदातों पर रोक लगे।

Show More

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned