कोराना वायरस के बीच एनजीओ के घपलों को लेकर आई यह बड़ी खबर

हर साल साढ़े चार हजार एनजीओ का पंजीयन, हिसाब देने में फिसड्डी
विभाग के पास नहीं है लेखा-जोखा
शेखावाटी में 140 से अधिक सामाजिक संगठनों पर भ्रष्टाचार सहित अन्य अनियमितताओं के आरोप भी...

By: Ajay

Updated: 19 Mar 2020, 12:19 PM IST

सीकर. प्रदेश में समाजसेवा करने की राह चुनने वाले सामाजिक संगठनों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। हर साल प्रदेश के सभी पंजीयक कार्यालयों में 4500 से अधिक नई सोसायटियों का गठन हो रहा है। लेकिन हिसाब देने में 70 फीसदी से ज्यादा पीछे है। कई सामाजिक संस्थाओं की ओर से तो होने वाले चुनावों की जानकारी भी विभाग को नहीं दी जा रही है। प्रदेश में पंजीयन का आंकड़ा लगभग 3.40 लाख को पार कर गया है। इनमें से ज्यादा सामाजिक संस्थान महज कागजों में संचालित है। हालत यह है पिछले एक साल में अकेले शेखावाटी में 140 से अधिक सामाजिक संगठनों पर भ्रष्टाचार सहित अन्य अनियमितताओं के आरोप भी लगे। लेकिन विभाग के पास जांच का अधिकार ही नहीं होने की वजह से मामला कागजों में ही उलझा हुआ है।

फैक्ट फाइल:
प्रदेश में सामाजिक संस्था: 3.40 लाख से अधिक
हर साल नए आवेदन: 4500 से अधिक
हिसाब देनी वाली संस्थाएं: 45 हजार
सीकर में सामाजिक संस्था: 6022
सीकर में हिसाब देने वाली संस्था: 1022

कमजोर एक्ट की बुनियाद में उलझी ‘सेवा’
समाज की विभिन्न बुराईयों को मिटाने व बदलाव की नई कहानी के दावों के बीच नई सामाजिक संस्थाओं का पंजीयन होता है। लेकिन सोसायटी विभाग के पुराने एक्ट की कमजोर बुनियाद के सहारे कुछ सामाजिक संस्थाएं सेवा के बजाए दूसरे फेर में उलझ जाती है। विभग के 1958 के एक्ट के तहत विभाग को पंजीयन का ही अधिकार दिया गया थ। जिस समय एक्ट बना था उस दौरान सामाजिक संस्थाओं के पंजीयन का क्रेज काफी कम था। ऐसे में इनको प्रोत्साहित करने के लिए विभाग ने कभी सख्ती नहीं की। विभाग ने कई बार विधानसभा में एक्ट में बदलाव का दावा किया लेकिन अभी तक बदलाव नहीं हो सका है।

दावों का सच क्या, कौन करें जांच
सामाजिक संस्थाओं के पंजीयन के समय पांच से सात कार्यो का मुख्य तौर पर जिक्र करना होता है वह किन क्षेत्रों में कार्य करेगी। पंजीयन के बाद संस्थान ने उस क्षेत्र में क्या काम किया और कितना पैसा सामाजिक कार्यो पर खर्च किया इसकी जांच कोई नहीं कर पाता है। हालत यह है कि प्रदेश में 35 फीसदी से अधिक एनजीओ तो चुनाव कराने तक ही सीमित है।

इनका कहना है
विभाग के पास पंजीयन के ही अधिकार है। 1958 एक्ट के तहत पंजीयन होने वाली संस्थाओं की जांच करने का अधिकार नहीं है। इस वजह से कार्रवाई नहीं कर पाते है। नए एक्ट के तहत पंजीकृत संस्थाएं निश्चित समय पर ऑडिट व चुनाव की सूचना देते है।
बीएल मीणा, डिप्टी रजिस्ट्रार, कॉपरेटिव सोसायटी विभाग, सीकर

Ajay Reporting
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