वट सावित्री अमावस्या आज: बड़ की पूजा कर उपवास कर रही महिलाएं, खास है आज का दिन

सीकर. वट सावित्री अमावस्या का पर्व आज जिलेभर में आस्था व उल्लास से मनाया जा रहा है। महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के साथ बड़ के पेड़ का पूजन कर और पत्तों को गहने के रूप में धारण कर रही है।

By: Sachin

Updated: 10 Jun 2021, 10:04 AM IST

सीकर. वट सावित्री अमावस्या का पर्व आज जिलेभर में आस्था व उल्लास से मनाया जा रहा है। महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के साथ बड़ के पेड़ का पूजन कर और पत्तों को गहने के रूप में धारण कर रही है। पति की लंबी उम्र के लिए उपवास भी रख रही है। ज्येष्ठ अमावस्या शनि भगवान का जन्म दिवस होने पर शनि मंदिरों में भी विशेष- पूजा अर्चना का दौर चल रहा है। हालांकि कोरोना गाइडलाइन की वजह से मंदिरों में सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं हो रहे।


रोहिणी नक्षत्र का संयोग
अमावस्य पर आज रोहिणी नक्षत्र का शुभ योग भी है। ज्योतिषाचार्य पंडित नागरमल लोकनाथका ने बताया कि ग्रंथों के मुताबिक पेड़-पौधे लगाने के लिए रोहिणी नक्षत्र को शुभ माना जाता है। इसलिए शुभ वार और नक्षत्र के संयोग में पेड़-पौधे लगाना चाहिए। अग्निपुराण में पौधारोपण को एक पवित्र मांगलिक समारोह बताया गया है। ग्रंथों में लिखा है कि बहुत अच्छी मिट्टी और खाद के साथ शुभ मुहूर्त में पौधारोपण किया जाना चाहिए।

यमराज से पति के प्राण लाई थी सावित्री
पुराणों के अनुसार आज ही के दिन सावित्री के पतिव्रत तप को देखते हुए यमराज ने उसके पति सत्यवान के प्राण वापस करते हुए जीवनदान दिया था। इसी वजह से पति की लंबी उम्र की कामना के साथ सुहागिन महिलाएं इस दिन उपवास करती है और बरगद की पूजा के साथ सत्यवान और सावित्री की कथा भी सुनती हैं।

भविष्य व नारद पुराण में जिक्र
वट सावित्री व्रत का जिक्र भविष्य व नारद पुराण में आता है। जिसमें व्रत की महिमा व करने की विधी भी बताई गई है। इस दिन को सुहागिन महिलाओं का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं सौलह श्रृंगार से सजकर पति की लंबी उम्र के लिए भगवान शिव-पार्वती, सत्यवान-सावित्री और बरगद की पूजा करती हैं। साथ ही दिनभर व्रत भी रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत और पूजा करने से सौभाग्य, समृद्धि और सुख बढ़ता है। साथ ही जाने-अनजाने में हुए गलत कामों का दोष नहीं लगता। सारी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।

स्नान, दान व पितृ पूजा जरूरी
पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि अमावस्या के दिन नदी स्नान, दान, व्रत और पूजा-पाठ से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पितरों की तृप्ति के लिए पिंडदान और श्राद्धकर्म इस दिन करना शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण और उनकी उपासना की जाती है। हमारे जितने भी व्रत त्योहार ,व्रत उत्सव आदि मनाए जाते हैं, ये सब वैज्ञानिक और प्राकृतिक प्रकृति को संरक्षण प्रदान करने के लिए मनाए जाते हैं। इसी क्रम में हर पर्व पर किसी न किसी पेड़ की पूजा का महत्व है। वट सावित्री व्रत पर बड़ अमावस्या पर बड़ के पेड़ का पूजन करना चाहिए। बड़ का पेड़ लगाकर इसका संरक्षण करना चाहिए। पेड़ हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं इनकी पूजा करनी चाहिए।

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