पत्रिका अभियान: सूखे हलक नहीं हो रहे तर, ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश

सीकर. जलदाय विभाग के दावे धरातल पर पूरी तरह कागजी नजर आ रहे हैं। विभाग के तमाम दावों के बाद भी ग्रामीणों के सूखे हलक तर नहीं हो पा रहे हैं।

By: Sachin

Published: 12 Apr 2021, 10:17 AM IST

सीकर. जलदाय विभाग के दावे धरातल पर पूरी तरह कागजी नजर आ रहे हैं। विभाग के तमाम दावों के बाद भी ग्रामीणों के सूखे हलक तर नहीं हो पा रहे हैं। इस कारण जलदाय विभाग के प्रति लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि अप्रेल महीने में यह हाल है तो फिर मई-जून की भीषण गर्मियों में क्या होगा। जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक में मामला गूंजने के बाद भी जिम्मेदार आमजन को राहत नहीं दे सके। ग्रामीणों की ओर से टैंकर सप्लाई शुरू करने की मांग गूंजने लगी है।


विधायक की गृह पंचायत गोवटी में ग्रामीणों को मिल रहा है दो दिन में एक दिन पानी

पलसाना. दांतारामगढ़ विधायक वीरेन्द्रसिंह की गृह पंचायत गोवटी गांव के ग्रामीणों को पिछले एक साल से ज्यादा समय से पेयजल समस्या से जूझना पड़ रहा है। गांव में कई मौहल्लों में दो दिन में तो कहीं तीन दिन में जलापूर्ति हो रही है। साथ ही कई मौहल्ले तो ऐसे है जहां नलों में पानी आए एक साल से ज्यदा समय हो गया। जिससे महिलाओं को दिनभर पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। गांव में भूमिगत जल का स्तर पिछले काफी सालों से लगातार गिरते जा रहा है और गांव के अधिकांश जलस्त्रोत में पानी सूख चुका है। ऐसे में गांव में लोगों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था भी चुनौती बन गया है। गांव में फिलहाल पेयजल व्यवस्था ग्राम पंचायत के अधीन है। गांव में एक उच्च जलाशय बना हुआ है लेकिन वो भी काफी जर्जर हालत में हो गया है। लेकिन फिलहाल उसी से गांव में जलापूर्ति की जा रही है। गांव में पानी के स्त्रोत सूखने से अलोदा गांव में बने ट्यूबवेलों से गांव में पानी लाकर जलापूर्ति की जा रही है। लेकिन राईजिंग लाइन में अवैध कनेक्शनों के चलते गांव में पूरा पानी नही पहुंच पा रहा है। जिससे गांव की जरूरत के अनुसार गांव में पानी नही पहुंचने से लोगों को नियमित रूप से पानी नही मिल पा रहा है। ऐसे में कई मौहल्लों में दो दिन से तो कहीं तीन दिन से जलापूर्ति हो रही है और वो भी कुछ देर के लिए। जिससे जरूरत का पानी नही मिल पा रहा है। ऐसे में लोगों को टैंकरों से पानी डलवाकर प्यास बुझानी पड़ रही है।


सार्वजनिक टंकियों में भी नही डलता पानी

गांव में पानी की किल्लत का आलम यह है कि गांव के सार्वजनिक स्थलों पर बनी टंकियों में भी नियमित रूप से पानी नही डल पा रहा है। टंकियों में सुबह के समय पानी डाला तो जाता है। लेकिन घरों में पानी नही जाने से लोग कुछ देर में ही टंकियों को खाली कर देते है। ऐसे में सार्वजनिक स्थलों की टंकिया कुछ देर में ही खाली हो जाती है।


ट्यूबवेल तो बन गई लेकिन कनेक्शन नही
गांव के रामदेवरा के पास खटीकों के मौहल्ले में बनी सार्वजनिक टंकी में पानी नही डलने से लोगों को पीने की पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ता था। लेकिन पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव के बाद हारे हुए जिला परिषद सदस्य एवं जीते हुए पंचायत समिति सदस्य की ओर से खराब पड़े हैंडपम्प में सिंगल फैस की मोटर डलवाकर ट्यूबवेल बनवा दी गई थी। लेकिन अब बिजली का कनेक्शन नही होने से इसमें भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोग पड़ोस के घरों से कनेक्शन जोड़कर टंकी में पानी डाल रहे है। ऐसे में यहां ट्यूबवेल में ग्राम पंचायत की ओर से कनेक्शन करवा दिया जाए तो गर्मी के दिनों में कुछ राहत मिल सकती है।

 

वार्ड दो में एक साल से नही जा रहा पानी
गांव के वार्ड दो परनामी मंदिर के पिछे के मोहल्ले में पिछले एक साल से नलों में पानी ही नही जा रहा है। ऐसे में इस मोहल्ले के लोग परनामी मंदिर के पास बनी टंकी से पीने का पानी लेकर जाते है और बाकी जरूरतें टैंकरों से पानी डलवाकर पूरी करते है।

डेढ़ करोड़ की योजना से आस
गांव में पानी की समस्या को देखते हुए इसी वर्ष सरकार की ओर से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की पेयजल योजना स्वीकृत की गई है। ऐसे में योजना स्वीकृत होने के बाद लोगों को पानी की समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है। लेकिन देखने वाली बात होगी कि इस योजना का काम कब शुरू होता है और कब तक पूरा होता है और किस प्रकार घरों तक जलापूर्ति होती है।


इनका कहना है

गांव में करीब डेढ़ करोड़ रुपए की पेयजल योजना स्वीकृत हुई है। ऐसे में योजना का कार्य पूरा होने के बाद पेयजल समस्या का समाधान हो जायेगा। फिलहाल जलस्त्रोतों में पानी कम होने से समस्या बनी हुई है। लेकिन इसके बावजूद जितना पानी है उससे गांव में व्यवस्था के तौर पर काम चला रहे है।

सोनू कुमावत, सरपंच गोवटी


पानी नहीं आने से लोग परेशान
खाटूश्यामजी. पालिका के 4, 10, 12 सहित कई वार्डो में नलों में पानी नहीं आने से लोग परेशान हो रहे है। वार्डवासियों का कहना है कि पानी नहीं आने से मोल का पानी मंगवाने पर मजबूर हो रहे है। उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर जलदाय विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को कई बार अवगत करवा दिया, मगर अभी तक समाधान नहीं हुआ है।

दो दिन में एक बार मिलता है पीने का पानी वह भी 10 मिनिट
श्रीमाधोपुर. गांव भारणी में गर्मी के तेवर बढऩे के साथ पीने के पानी की समस्या बढ़ती जा रही है। ग्राम के लोगो ने बताया कि गांव की डूंगरी पर जीएलआर बनी हुई है जिससे दो दिन में एक बार महज 10 मिनट पानी दिया जा रहा है। जिससे पीने का काम भी नहीं चल पाता जिससे गांव के लेाग खासे परेशान है। सभी घरों में टैंकर से पानी डलवाकर काम चला रहे हैं। करीब 550 घरों की आबादी में अधिकतम लोग मजदूर वर्ग के है जो टैंकर से पानी नहीं डलवा सकते। ऐसे में वह स्कूल के पास बनी टंकी से पानी ले जाकर काम चला रहे है। इस टंकी पर भी 18 धण्टे पानी लेने वालों की लाइन लगी रहती है लोग मजदूरी कर शाम को घर आने व काम पर जाने से पहले पानी के लिए लाइन में लगे रहते है या घर की महिलाये व बेटियां पानी के लिए भरी दोपहरी में भी पानी के लिए भटकती रहती है। जिम्मेदारों का कहना है कि जल स्तर नीचे जाने से पानी की समस्या बनी हुई है हाल ही दो नलकूप ओर स्वीकृत हुए है जिससे कुछ समाधान तो हो जाएगा पर स्थाई समाधान कुम्भाराम लिफ्ट योजना का पानी आने पर ही संभव हो पायेगा।

कोछोर में पेयजल संकट
रानोली. कोछोर पंचायत में पानी की समस्या दिन प्रतिदिन विकट होती जा रही ह। यहां पेयजल की आपूर्ति 10 से 15 दिन में एक बार होती है। इससे महिलाएं परेशान हो रही हैं। ऐसा नहीं है कि इन समस्याओं के बारे में सरकार व जनप्रतिनिधियों को पता नहीं है। गांव के लोगों के द्वारा बड़े से बड़े अधिकारी को बार-बार अवगत करवा दिया गया। सरकार चाहे किसी भी पार्टी की हो कोई सांसद हो कोई विधायक हो ग्राम कोछोर व उसके आसपास के दर्जनों गांव हमेशा सरकारी उपेक्षा का शिकार रहे हैं। लेकिन क्षेत्र की जनता में इन समस्याओं को लेकर धीरे-धीरे रोष बढ़ रहा है। क्षेत्र के लोगों ने एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। अगर शीघ्र ही इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो सरकार व जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र की जनता के विरोध में आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।

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