सोशल मीडिया पर कोरोना के इससे दयनीय हालात नहीं देखे होंगे आपने...!

हालात दयनीय! घर के बाहर लिखा...अगर मेरी मौत हो जाए तो लाश को पुलिस के सुपुर्द कर देना

By: Gaurav

Published: 22 Apr 2021, 06:13 PM IST

You may not have read the painful news of Corona on social media…

कोरोना की दर्दनाक तस्वीर रोज सामने आ रही है। मजबूरियों के आगे लोग विवश हो रहे हैं और अपनों का भी समय पर साथ नहीं दे पा रहे हैं। दिल्ली में एक घर के बाहर कोरोना संक्रमित बुजुर्ग ने लिखा कि अगर उसकी मौत हो जाए तो लाश पुलिस को सुपुर्द कर दी जाए। जिस पर उसकी बेटी ने दिल्ली में सीकर निवासी एक पुलिसकर्मी को फोन कर मदद करने की गुहार लगाई। कांस्टेबल ने घर का पता लगा बुुजुर्ग को एम्बुलेंस में ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराया।

-भयावह हाल...कोरोना के डर से परिजनों ने खींचे हाथ तो कांस्टेबल ने बचाई बुुजुर्ग की जान, मानवता की मिसाल की पेश


सीकर. कोरोना(corna) से पीडि़त दिल्ली में रह रहे एक अकेले बुजुर्ग ने दयनीय हालत में घर के बाहर लिखा कि उसकी मौत होने पर उसका शव पुलिस को सुपुर्द कर दिया जावे। बुजुर्ग की पुत्री ने अपने पहचान के सीकर निवासी पुलिस कांस्टेबल को फोन कर सहायता करने की गुहार लगाई। जिसके बाद पुलिस कांस्टेबल ने फौरन घर का पता लगा बुजुर्ग को अस्पताल में भर्ती कर बुजुर्ग की जान बचाई।


शेखावाटी के लाल ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है। कोरोना के डर के साए में परिजनों ने बुजुर्ग को भगवान भरोसे छोड़ दिया तो ऐसे में दिल्ली पुलिस में कार्यरत सीकर के लाल ने पहुंच कर जान बचाई। कांस्टेबल राजूराम ने कोरोना संक्रमित बुजुर्ग को दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में भर्ती करवाया। कांस्टेबल राजूराम सीकर के गुनाठू गांव के रहने वाले हैं। मामला रविवार का है। कांस्टेबल राजूराम ने बताया कि दिल्ली पुलिस के पास एक युवती ने कॉल किया। उसने कहा कि पिता को कोरोना है और इसलिए वह उनके पास जाना नहीं चाहती है। राजेंद्र नगर थाने में कार्यरत कांस्टेबल राजूराम वहां पर पहुंचे। तीसरी मंजिल में सीआइडी से रिटायर्ड 80 वर्षीय मुरलीधर रहते थे। वह काफी कमजोर लग रहे थे। उन्होंंने बुजुर्ग को ले जाने के लिए एंबुलेंस मंगवा ली। बुजुर्ग ने उनको अस्पताल जाने से मना कर दिया तो एंबुलेंस वापस लौट गई। कांस्टेबल ने बुजुर्ग से समझाइश की। उन्होंने हिम्मत बंधा कर वापस एंबुलेंस मंगाई। तब पीपीई किट पहनकर बुजुर्ग को एंबुलेंस तक लेकर आए। कांस्टेबल राजूराम को भी संक्रमित होने का खतरा था। ऐसे में पूरी सावधानी बरतते हुए लाया गया। उन्हें अस्पताल में शिफ्ट करने में करीब तीन घंटे लग गए। कांस्टेबल ने बुजुर्ग मुरलीधर के खाने-पीने की व्यवस्था की, लेकिन बुजुर्ग ने कुछ भी खाने से मना कर दिया। उन्होंने केवल पानी पिलाने की बात कहीं। तब कांस्टेबल ने उन्हें पानी लाकर दिया। डॉक्टरों ने जांच की तो पता लगा कि छाती में काफी इंफेक्शन था और ऑक्सीजन लेवल भी बहुत कम था। डॉक्टरों ने उनका तत्काल उपचार शुरू कर दिया। अब बुजुर्ग की हालत में काफी सुधार है।


घर के बाहर लिखा देख सन्न रह गए राजूराम
कांस्टेबल राजूराम ने बताया कि वह बुजुर्ग के घर के बाहर पहुंचे तो काफी हैरान हो गए। उन्होंने घर के बाहर लिखा था कि अगर मेरी मौत हो जाए तो लाश को पुलिस के सुपुर्द कर देना। यह पढ़ कर कांस्टेबल राजूराम भी सन्न रह गए। उन्होंने खुद को बचाते हुए बुजुर्ग को अस्पताल में भर्ती करवाया। इसके बाद बुजुर्ग की बेटी को भी फोन कर अस्पताल में भर्ती किए जाने व तबियत की सूचना दी। मुरलीधर सीआइडी में कार्यरत थे। उनकी तीन बेटियां हैं। एक बेटी दिल्ली के कालकाजी में रहती है।


2010 में हुए दिल्ली पुलिस में भर्ती
कांस्टेबल राजूराम ने बताया कि वे 2010 में दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए थे। वह न्यू राजेंद्रनगर थाने में कार्यरत है। पत्नी, दो बेटियां व मां गांव में ही रहते है। पिता की 2001 में मौत के बाद परिवार ने काफी संघर्ष किया। उन्होंने बताया कि पिता की मौत के बाद आर्थिक स्थिति भी खराब हो गई। काफी संघर्ष किया। फिलहाल वे पांचों भाई सरकारी सेवा में है। उनके बड़े भाई गोपाल सेकेंड ग्रेड टीचर है। मुकेश कुमार जयपुर में रेलवे में है। विजय कुमार नेवी में है और विशाखापटनम में कार्यरत है। सबसे छोटा भाई बाबूराम नोखा में सैंकेड ग्रेड टीचर है।

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