scriptAnganwadi Center of Singrauli, Parent, Student, School, Education | आंगनबाड़ी केंद्रों में केवल एक दिन की चमक, दूसरे ही दिन पसर गया सन्नाटा | Patrika News

आंगनबाड़ी केंद्रों में केवल एक दिन की चमक, दूसरे ही दिन पसर गया सन्नाटा

डेढ़ वर्ष बाद खोले गए केंद्र, अभिभावक नहीं ले रहे रुचि ....

सिंगरौली

Published: November 18, 2021 12:09:44 am

सिंगरौली. शासन के निर्देश के बाद करीब डेढ़ वर्ष बाद आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चे पहुंचे तो लेकिन यह रौनक मात्र एक दिन के लिए रही। दूसरे ही दिन केंद्रों में फिर से सन्नाटा पसर गया। ग्रामीण अंचल के ही नहीं बल्कि शहरी क्षेत्र में भी यही हाल देखने को मिला। केंद्रों में बच्चों की बात तो दूर कार्यकर्ता व सहायिका भी नदारद मिली।
Anganwadi Center of Singrauli, Parent, Student, School, Education
Anganwadi Center of Singrauli, Parent, Student, School, Education
हैरत की बात यह है कि अधिकारियों ने दूसरे दिन वस्तुस्थिति को देखने की भी जरूरत नहीं समझी है। महिला एवं बाल विकास विभाग को शासन स्तर से निर्देशित किया गया है कि वह बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्र बुलाएं। कोविड प्रोटोकाल के तहत निर्धारित मानकों का पालन करते हुए वहां बैठाया जाए। साथ ही उन्हें पोषण आहार दिया जाए और उनकी शैक्षणिक गतिविधि शुरू की जाए।
निर्देशों के अनुपालन में सोमवार को बच्चों को बुलाया गया। लंबे समय के बाद केंद्र में पहुंचने वाले बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। यह बात और रही कि दूसरे ही दिन केंद्रों में सन्नाटा पसर गया। अधिकारियों की इस संबंध में दलील है कि बच्चों को केंद्र में भेजना अभिभावकों की स्वेच्छा पर निर्भर है। निर्देश के मुताबिक उन्हें बच्चों को केंद्र में भेजने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।
टीकाकरण में ड्यूटी का हवाला
आंगनबाड़ी केंद्र माजनखुर्द में पहुंची पत्रिका की टीम को वहां कोई बच्चा नहीं मिला। केंद्र के बाहर बैठी सहायिका ने बताया कि बच्चे नहीं आए हैं और कार्यकर्ता सहित अन्य स्टॉफ की कोरोना टीकाकरण में ड्यूटी लगी है। बिलौंजी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिली। वहां मालूम हुआ कि स्टॉफ टीकाकरण कराने के बावत लोगों को प्रेरित करने मोहल्लों में भ्रमण पर है।
अभिभावक भी नहीं ले रहे रुचि
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि अभी अभिभावक बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र में भेजने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। दलील है कि पहले दिन भी बच्चों को बुलाने के लिए अभिभावकों को समझाइस देनी पड़ी। अभिभावक कोरोना संक्रमण का हवाला दे रहे हैं। फिलहाल अधिकारियों का कहना है कि अभिभावकों को प्रेरित किया जाएगा। ताकि वह बच्चों को वह केंद्र भेजें, जिससे उन्हें लाभ मिले।

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