रबी में 3 हजार से अधिक हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई, अब सिंचाई का सवाल

बांधों में पानी पर नजर....

सिंगरौली. जिले में सबसे बड़ी काचन सिंचाई परियोजना में मौसम के साथ देने के चलते रबी के चालू सीजन में लगभग 32 सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की फसल की बुवाई हुई है। किसानों ने तत्परता के साथ परियोजना के इतने बड़े क्षेत्र में गेहूं की बुवाई करने में सफलता पाई है। इसके अलावा मामूली संख्या में दूसरी अन्य फसल की भी बुवाई हुई है पर सबसे अधिक क्षेत्रफल गेहूं का है। अब इतने बड़े क्षेत्रफल में फसल पकने तक उसमें सिंचाई व्यवस्था को लेकर जल संसाधन विभाग में मंथन हो रहा है। इसका कारण काचन बांध में केवल 42 प्रतिशत मात्रा में ही जल भराव है।

काचन बांध में उपलब्ध पानी और परियोजना के 32 सौ हेक्टेयर में बोए गए गेहूं को सिंचाई की जरूरत का जल संसाधन विभाग को पूर्वानुमान लगाना पड़ रहा है। इससे पहले परियोजना क्षेत्र के किसानों को पलेवा के लिए बांध से एक बार सिंचाई के लिए पानी दिया जा चुका। इस कारण भी बांध का जल स्तर नीचे आया। अब विभाग के स्तर पर बांध में संग्रहित जल व बोए गए गेहूं को पकने तक होने वाली पानी की जरूरत का आकलन किया जा रहा है। आरंभिक तौर पर इसमें सामने आया कि बांध में उपलब्ध जल के अनुपात मेंं परियोजना क्षेत्र के किसानों को गेहूं की सिंचाई के लिए दो बार ही सिंचाई के लिए पानी दिया जा सकेगा। इसके बाद बचने वाले पानी को नियमानुसार गर्मी में आपातकालीन जरूरत के लिए संरक्षित रखा जाएगा।

विभाग का अनुमान है कि फरवरी के बाद तापमान बढऩे पर किसानों की आेर से सिंचाई के लिए पानी की मांग होने लगेगी जबकि गेहंूं पकने तक अपे्रल माह का इंतजार करना होगा। इस बीच तापमान अधिक बढऩे पर मार्च व अपे्रल में मांग के आधार पर किसानों को विभाग दो बार सिंचाई पानी देने पर लगभग सहमत है मगर गर्मी के कारण फसल पकने से पहले यदि किसी क्षेत्र से तीसरी बार पानी की मांग आती है तो विभाग के पास देने के लिए बांध में पानी नहीं होगा। इसलिए अभी आकलन के बाद विभाग की ओर से सभी किसानों को इस संबंध में अवगत कराने पर विचार किया जा रहा है ताकि किसी भी परिस्थिति में किसान विभाग से तीसरी बार सिंचाई के लिए पानी की उम्मीद नहीं रखें। जल संसाधन विभाग के स्थानीय अधिकारी सूत्रों ने बताया कि इसे लेकर परियोजना क्षेत्र के किसान प्रतिनिधियों व जल उपयोक्ता संघ पदाधिकारियों के साथ जल्द अनौपचारिक बैठक की जाएगी। इसमें बांध में जल की उपलब्धता के संबंध में किसानों को अवगत कराया जाएगा व उनसे विभाग को सहयोग का आग्रह किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी परेशानी से बचा जा सके।

Amit Pandey
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