औद्योगिक कंपनियों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं तो शहर में जनता बनी लापरवाह

स्वच्छता मामले में औद्योगिक क्षेत्रों व शहर का एक जैसा हाल ....

By: Ajeet shukla

Published: 05 Sep 2020, 11:00 PM IST

सिंगरौली. स्वच्छता के मामले में औद्योगिक क्षेत्र व शहर की स्थिति लगभग एक जैसी है। कारण भले ही अलग हो, लेकिन स्वच्छता सर्वेक्षण और स्टार रैंकिंग में अंक की गणित दोनों की बिगाड़ सकते हैं। कचरा मुक्त शहर के मामले में पिछले दो वर्षों को नगर निगम को झटका लग रहा है और फाइव स्टार सिटी का तमगा मिलना संभव नहीं हो सका है।

सपना अधूरा रह जाने के पीछे एनसीएल व एनटीपीसी की शिथिलता मुख्य वजह बनी है। नगरीय ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम के तहत शहरी क्षेत्र के अलावा एनसीएल व एनटीपीसी की ओर से भी कचरा प्रबंधन के लिए प्लांट बनाए जाने का निर्देश है। इसके लिए प्रशासन की ओर से कई बार निर्देश जारी किए गए लेकिन नतीजा सिफर रहा। कंपनियों में कचरा एकत्र करने की तो व्यवस्था है, लेकिन कचरा का प्रबंधन किए जाने का प्रबंध नहीं है।

इसको लेकर पिछले वर्ष कई बार कंपनियों को नोटिस दी गई, लेकिन अभी तक कचरा प्रबंधन प्लांट की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। स्थिति यह है कि कंपनियों की कालोनी से निकलने सूखा व गीला कचरा भी अलग-अलग न ही एकत्र किया जा रहा है और की भंडारित हो रहा है।

एनटीपीसी का कचरा विंध्य नगर बस डिपो से तेलगवा के बीच खुले में कचरा फेंका जा रहा है। जबकि एनसीएल क्षेत्र में अमलोरी, जयंत रोड व निगाही रोड पर जगह-जगह खुले में कचरा डंप हो रहा है। शहर को कचरा मुक्त शहर घोषित कर दिया गया है। इसके बावजूद एनसीएल व एनटीपीसी की ओर से जगह-जगह सीमेंट की दीवार बनाकर कचरा प्वाइंट बना दिया गया है।

शहरी क्षेत्र में भी डंप कर रहे कचरा
शहरी क्षेत्र में वैसे तो कचरा डंप करने के लिए कोई प्वाइंट नहीं बनाया गया है। सूखा व गीला कचरा अलग-अलग एकत्र कर सीधे कचरा प्रबंधन प्लांट में भेजा जा रहा है। इसके बावजूद कई शहरी क्षेत्र में कूड़े का ढेर देखा जा सकता है। तमाम तरह की जागरूकता अभियान चलाए जाने के बाद भी लोग कचरे ढेर लगा दे रहे हैं। नतीजा स्वच्छता और कचरा मुक्त शहर बनाने की सारी कवायद पर पानी फिर रहा है।

आवेदन सेवेन स्टार का, मिला थ्री स्टार का तमगा
कंपनियों और आम पब्लिक की उदासीनता के चलते शहर को फाइव स्टार का तमगा नहीं मिल पा रहा है। पिछली बार आवेदन सेवेन स्टार के लिए किया गया था, लेकिन रैंक थ्री स्टार की मिली। हालांकि स्वच्छता सर्वेक्षण में जिले का प्रदर्शन संतोषजनक रहा है। 2020 में जिले के देश में 15 वां स्थान मिला है। जबकि 2019 में 21 वां, 2018 में 23 वां व 2017 में 51 वां स्थान था।

फैक्ट फाइल
हर रोज निकलने वाला कचरा
45 से 50 टन कचरा प्रति दिन शहरी क्षेत्र के 45 हजार घरों से
25 से 30 टन कचरा प्रति दिन एनसीएल की कालोनियों से
15 से 20 टन कचरा प्रति दिन एनटीपीसी की कालोनियों से

Ajeet shukla Reporting
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