स्वरोजगार की जब सबसे अधिक जरूरत, बंद हैं मुख्यमंत्री की योजनाएं

रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत केवल 52 को मिला लाभ ....

By: Ajeet shukla

Published: 03 Jul 2021, 12:55 AM IST

सिंगरौली. कोरोना संक्रमण की आपदा और लॉकडाउन के चलते भारी संख्या में प्रवासी घर लौटे। ऐसे में रोजगार व स्वरोजगार की सबसे अधिक जरूरत महसूस की गई, लेकिन इस दौरान मुख्यमंत्री स्वरोजगार की योजनाएं बंद रही। पहली व दूसरी लहर के बाद स्थिति अब सामान्य हो गई है। परदेश से लौटे प्रवासी स्वरोजगार को लेकर उत्सुक हैं। इसके बावजूद स्वरोजगार योजनाओं पर लगा ताला खुला नहीं है।

जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र में हर रोज स्वरोजगार से योजनाओं की जानकारी लेने के लिए युवा पहुंच रहे हैं, लेकिन बेबस अधिकारी उन्हें पिछले डेढ़ वर्ष से यही दिलासा दे रहे हैं कि योजनाएं बंद हैं। योजनाओं के शुरू होने के साथ आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि युवाओं को प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की योजना का लाभ लेने की सलाह ली जाती है, लेकिन इस योजना में लक्ष्य सीमित होने के चलते केवल मु_ी भर लोगों को लाभ मिल पाता है।

गौरतलब है कि जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र की ओर से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अलावा मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना व मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना संचालित की जाती रही है। मुख्यमंत्री की इन दोनों योजनाओं पर पिछले वर्ष मार्च में लॉकडाउन की शुरुआत से ही ताला लग गया, जो अभी तक नहीं खुला है। गौरतलब है कि इन दोनों ही योजनाओं में युवाओं को स्वरोजगार व उद्यम शुरू करने के लिए न केवल बैंक से ब्याज दर में छूट के साथ आर्थिक सहयोग मिल जाता है बल्कि सरकार की ओर से 15 फीसदी मार्जिन मनी भी प्राप्त होती है।

पिछले वित्तीय वर्ष में केवल 52 को मिला लाभ
जिले में संचालित व्यापार एवं उद्योग केंद्र पिछले वित्तीय वर्ष 2020-21 में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत केवल 52 लोगों को लाभ दिला सका है। जबकि इस कार्यक्रम के तहत लाभ लेने के लिए आवेदन सैकड़ों में प्राप्त हुए थे। अधिकारियों के मुताबिक इस योजना में केवल 52 लोगों को लाभ दिलाने का लक्ष्य दिया गया था, इसलिए बाकी को लाभ से वंचित होना पड़ा। केंद्र द्वारा उद्योग संवर्धन नीति के तहत भी युवाओं को लाभ नहीं मिल सका है।

नहीं लौटे 20 हजार से अधिक प्रवासी
अधिकारियों के मुताबिक पहली और दूसरी लहर में लॉकडाउन के चलते करीब 60 हजार प्रवासी घर लौटे हैं। एक अनुमान के मुताबिक 20 हजार से अधिक प्रवासी वापस परदेश नहीं गए। उनकी ओर से यहां घर पर ही रहकर रोजगार व स्वरोजगार की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। फिलहाल कहने को तो जिला व विकासखंड स्तर पर कई रोजगार मेलों का आयोजन किया गया, लेकिन 10 फीसदी को भी रोजगार दिला पाना संभव नहीं हुआ है। ज्यादातर को मनरेगा के तहत मजदूरी करने की राह सुझायी जाती है। जबकि प्रवासी इसके लिए तैयार नहीं हैं।

Ajeet shukla Reporting
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