कोयला संकट: एनसीएल अधिकारी खदान पर उतरे, उत्पादन बढ़ाने पर जोर

सीआइएल की ओर से लगातार बनाया जा रहा कोयला उत्पादन बढ़ाने का दबाव .....

By: Ajeet shukla

Updated: 11 Oct 2021, 12:04 AM IST

सिंगरौली. कोयला के बढ़ते संकट से अब कोयला कंपनियों पर उत्पादन बढ़ाने का दबाव है। नार्दन कोलफील्डस लिमिटेड (एनसीएल)ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अधिकारी भी दफ्तर छोड़कर खदान का भ्रमण कर रहे हैं। एनसीएल के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक कंपनी अक्टूबर महीने में 11 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन करने की कोशिश में है। यही वजह है कि कंपनी के सीएमडी सहित निदेशक स्तर के अधिकारी खदानों में पहुंचकर न केवल कार्य की समीक्षा कर रहे हैं। बल्कि उत्पादन बढ़ाने के लिए संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही सुझाव भी दे रहे हैं।

पिछले साल की तुलना में इस माह उत्पादन की मात्रा बढ़ाने पर जोर है। शनिवार को सीएमडी पीके सिन्हा ने फिर निदेशक तकनीकी परियोजना एवं योजना एसएस सिन्हा ने ब्लॉक- बी खदान का दौरा कर उत्पादन सहित अन्य बिन्दुओं पर जानकारी ली। अधिकारियों ने मशीनों के निरीक्षण के साथ ही उत्पादन व प्रेषण में बढ़ोत्तरी के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए। अधिकारियों ने कहा कि बिजली घरों में अचानक से बढ़ी हुई कोयला मांग को ध्यान में रखते हुए कोयला उत्पादन व प्रेषण में तेजी लाना है।

119 मिलियन टन है लक्ष्य
गौरतलब है कि एनसीएल को इस वित्तीय वर्ष में 119 मिलियन टन कोयला का उत्पादन करना है, लेकिन पहली छमाही में 53.4 मिलियन टन कोयला का उत्पादन किया गया है। यह उत्पाद पिछले वर्ष की तुलना में कम है। जबकि आवश्यकता अधिक उत्पादन की है। अधिकारियों के मुताबिक सीआइएल इस वित्तीय वर्ष में एनसीएल से 122 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन की उम्मीद लगाए बैठा है। कंपनी को पहले से ही प्रेषण यानी डिस्पैच का लक्ष्य 126.5 मिलियन टन का दिया गया है, लेकिन बढ़ी मांग को देखते हुए कंपनी इससे अधिक डिस्पैच की कोशिश में लगी हुई है।

बिजली कंपनियां पूरी क्षमता से कर रही काम
बिजली की बढ़ी मांग के मद्देनजर विद्युत उत्पादक कंपनियां भी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। एनटीपीसी विंध्याचल के अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान में सभी 13 यूनिट से विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। विंध्याचल परियोजना की क्षमता 4783 मेगावाट है। वर्तमान में लगभग सभी यूनिट 100 प्रतिशत पीएलएफ (प्लांट लोड फैक्टर) पर कार्य कर रही हैं और क्षमता से अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है। यही हाल दूसरी निजी कंपनियों का भी है।

Ajeet shukla Reporting
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