भोजन बनाने वाले हाथ मानदेय को मोहताज, आर्थिक संकट मंडराया

कई बार लगाई गुहार फिर भी अधिकारियों ने नहीं फरमाया गौर

By: Anil kumar

Published: 29 Mar 2019, 05:22 PM IST

सिंगरौली/गजरा बहरा. भोजन हर रोज पकाते हैं, लेकिन मानदेय नहीं मिल रहे। वजह जिम्मेदारों की लापरवाही बनी है। बात आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार करने वाली रसोइयों की कर रहे हैं। जिले के ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों के रसोईयों को महीनों से मानदेय नहीं मिला है। अधिकारी सारा दारोमदार स्वयं सेवी संस्थाओं पर थोप रहे हैं।
स्वयंसेवी संस्थाओं की जिम्मेदारी
आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए माध्यह्न भोजन बनाने की जिम्मेदारी स्वयंसेवी संगठनों को दी गई है। आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों का भोजन या तो अलग से तैयार होता है या फिर साझा चूल्हा के तहत संबंधित शासकीय विद्यालय के माध्यम से मिलता है। ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए भोजन अलग से ही स्वयं सेवी संस्था तैयार करती हैं। व्यवस्था के तहत संस्था रसोईयों के माध्यम से भोजन तैयार कराती हैं। रसोइयों को बदले में मानदेय मिलता है, जिसका भुगतान महिला बाल विकास विभाग की ओर से कराया जाता है, लेकिन रसोइयों को पिछले कई सालों से मानदेय नसीब नहीं हुआ है। नतीजा मानदेय मिलने की उम्मीद में भोजन पकाने के कार्य में लगी महिलाओं की उम्मीद टूटती जा रही है।

बिल प्रस्तुत नहीं करने का बहाना
इधर महिला बाल विभाग के अधिकारी सारा ठीकरा संस्थाओं के सिर फोड़ रही हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी सुमन वर्मा का कहना है कि जिनकी ओर से बिल प्रस्तुत किया गया, सभी का भुगतान कर दिया गया है। जिन संस्थाओं ने बिल प्रस्तुत नहीं किया है उनका भुगतान रुका है। बिल प्रस्तुत करने को कईबार संस्थाओं को निर्देशित किया जा चुका है।

Anil kumar Reporting
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