साहब भी सडक़ पर रोज खाते हैं झटके, फिर भी नहीं गंभीर

साहब भी सडक़ पर रोज खाते हैं झटके, फिर भी नहीं गंभीर

Ajit Shukla | Publish: Apr, 23 2019 11:43:20 AM (IST) Singrauli, Singrauli, Madhya Pradesh, India

साढ़े छह किलोमीटर की सडक़ में दर्जनभर जानलेवा गड्ढे...

सिंगरौली. कलेक्टर से लेकर कमिश्नर व एसडीएम तक सभी हर रोज सडक़ से झटके खाते हुए गुजरते हैं, लेकिन कोई भी गौरफरमाने की जरूरत नहीं समझ रहा है। नतीजा जिले के आला अधिकारियों के साथ शहर के आम लोग भी दुर्घटनाओं को दावत दे रहे सडक़ के गड्ढों को झेलने के लिए मजबूर हैं। बात जिला मुख्यालय स्थित बैढऩ के मुख्य मार्ग की कर रहे हैं।

माजन मोड़ से नवजीवन बिहार चौराहे तक साढ़े छह किलोमीटर की इस सडक़ में वैसे तो गड्ढों की संख्या ५५ से अधिक है, लेकिन इनमें से आधा दर्जन गड्ढे ऐसे हैं जिनमें आए दिन कोई न कोईदुर्घटना का शिकार बन जाता है। खासतौर पर दो पहिया वाहन चालकों के लिए ये गड्ढे जानलेवा हैं। जगह-जगह बनाए गए ब्रेकर को काटकर सडक़ की और दुर्दशा कर दी गई है।

नगर निगम के हिस्से की इस सडक़ की दुर्दशा बयां करते हुए लोगों ने दुरूस्त कराने की कई बार अधिकारियों से अपील की है, लेकिन अधिकारी पहले तो प्रक्रिया जारी होने का हवाला देते रहे और अब आचार संहिता खत्म होने का दिलासा दे रहे हैं। नतीजा वाहन चालकों की दुश्वारियां महीनों से बरकरार हैं। जबकि अधिकारी चाहे तो आवश्यक कार्य के तहत सडक़ के गड्ढों की पैचिंग करा सकते हैं।

गड्ढों के रास्ते गुजरते हैं ज्यादातर अधिकारी
जिला प्रशासन, नगर निगम व पुलिस सहित अन्य विभागों के ज्यादातर वरिष्ठ अधिकारी हर रोज इसी रास्ते से गुजरते हैं। विभिन्न विभागों के लगभग सभी वरिष्ठ अधिकारियों का आवास एनटीपीसी कॉलोनी में है और कॉलोनी के लिए जाने और आने का यही मात्र एक रास्ता है। हर रोज इसी रास्ते कार्यालय आने और लौटने के बावजूद कोई भी अधिकारी गड्ढों को संज्ञान में नहीं ले रहा है।

17 करोड़ में तैयार की गई थी सडक़
जिला मुख्यालय के इस मुख्य मार्ग की 12 वर्ष बादभी कोई सुध लेने को तैयार नहीं है। वर्ष 2006-07 में इस मार्ग को 17 करोड़ की लागत से तैयार कराया गया था। करीब 12 वर्ष का समय बीत जाने के बावजूद इस सडक़ को रिपेयरिंग नसीब नहीं हुआ है। पिछले एक वर्ष से सडक़ को लेकर निगम अधिकारियों की सारी कवायद केवल कागजी प्रक्रिया पूरी करने तक सीमित है।

दूसरे मार्गों का यही हाल
मुख्य मार्ग के अलावा बैढऩ के दूसरे मार्गों का भी हाल कुछ ऐसा ही है। कोतवाली की ओर जाने वाला रास्ता हो या फिर कृषि उपज मंडी के बगल से जाने वाली सडक़ हो, उन सबका हाल भी बुरा है। सडक़ में बड़े-बड़े गड्ढे हादसों को न्यौता दे रहे हैं और जिम्मेदार तमामबीन बने हुए हैं।

तीन करोड़ की राशि स्वीकृत
निगम अधिकारियों का कहना है कि सडक़ को आचार संहिता के बाद दुरूस्त कराया जाएगा। डामरीकरण के लिए तीन करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत है। निविदा प्रक्रिया भी शुरू है। आचार संहिता के बाद सडक़ का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

फैक्ट फाइल
6.5 किलोमीटर लंबी सडक़
50 से अधिक हो चुके हैं गड्ढे
12 वर्ष पहले तैयार हुई थी सडक़
17 करोड़ रुपए निर्माण में हुए थे खर्च
03 करोड़ रुपए रिपेयरिंग के लिए स्वीकृत

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