सिंगरौली में शराब की दुकानें खुलने की आस जगी

-अपेक्षाकृत बेहतर टेंडर मिलने से आबकारी ने ली राहत की सांस
-मुख्यालय पर लगी टकटकी

By: Ajay Chaturvedi

Updated: 24 Jun 2020, 11:21 PM IST

सिंगरौली. तकरीबन एक महीने की जद्दोजहद के बाद जिले में शराब की लाइसेंसी दुकानों के फिर से खुलने की आस जगती दिख रही है। हालांकि गेंद शासन के पाले में है। फिर भी आबकारी विभाग को यह उम्मीद है कि फैसला सकारात्मक होगा।

बता दें कि सिंगरौली में शराब की ज्यादातर लाइसेंसी दुकानें 23 मई से बंद हैं जिससे आबकारी विभाग को रोजाना लाखों रुपये का नुकासन हो रहा है। ये दुकानें आबकारी कर को लेकर बंद हैं। हालांकि विभाग ने इन एक महीने के दौरान दो बार शराब की दुकानों की नीलामी कराई लेकिन दोनों ही बार विभाग स्तर से तय लक्ष्य के सापेक्ष टेंडर नहीं मिले जिसके चलते नीलामी रद करनी पड़ी। ऐसे में लगातार हो रहे राजस्व घाटे की भरपाई के लिए विभाग ने चालू वित्त वर्ष की शेष अवधि में जिले में शराब की दुकान संचालन के लिए मंगलवार को तीसरी बार नीलामी के लिए निविदाएं आमंत्रित कीं। तय कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को दोपहर तक टेंडर लिए गए। इस दौरान एक ही समूह की ओर से विभाग को अलग-अलग राशि के चार टेंडर दिए गए। इनमें अंतिम टेंडर में विभाग को सर्वाधिक 72 करोड़ 52 लाख रुपए से कुछ अधिक का आफर मिला है। यहां बता दें कि इसी अवधि में बीते वर्ष में विभाग को आबकारी शुल्क से 70 करोड़ 30 लाख रुपए मिले थे। इस प्रकार बीते वर्ष की तुलना में अधिक राशि का आफर होने के कारण इस टेंडर को मुख्यालय स्तर से हरी झंडी मिल जाने का अनुमान लगाया जा रहा है।

हालांकि विभागीय सूत्रों के मुताबिक इसमें एक पेच भी है। दरअसल इस वित्त वर्ष की शेष अवधि में शराब की दुकानों के संचालन के लिए विभाग की ओर से आरक्षित किया गया न्यनूतम शुल्क बुधवार को खुले टेंडर के आफर के मुकाबले अधिक है। विभाग की ओर से तय न्यूनतम आरक्षित शुल्क 88 करोड़ रुपए रखा गया है जबकि टेंडर में 72 करोड़ रुपए का ही आफर किया गया है। लेकिन यह माना जा रहा है कि विभाग इसे तूल नहीं देगा क्योंकि मामला लंबा खिंचने से विभाग को जिले में हर रोज लगभग 33 लाख रुपए आबकारी शुल्क का घाटा हो रहा है। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि मुख्यालय स्तर पर मामला निबटाने की पहल की जा सकती है। उम्मीद की जा रही है कि देर रात तक मुख्यालय से सकारात्मक फैसला हो जाएगा।

Ajay Chaturvedi
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