दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया : भूमि के मुआवजे का तीन वर्ष लंबा इंतजार, साजापानी परियोजना के 21 किसानों का मामला

दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया : भूमि के मुआवजे का तीन वर्ष लंबा इंतजार, साजापानी परियोजना के 21 किसानों का मामला
Farmers awaiting compensation in Singrauli

Amit Pandey | Updated: 14 Jun 2019, 09:52:49 PM (IST) Singrauli, Singrauli, Madhya Pradesh, India

मुआवजे का तीन वर्ष लंबा इंतजार.....

सिंगरौली. सरई तहसील में साजापानी लघु सिंचाई परियोजना से प्रभावित करीब 21 परिवारों को मुआवजे के लिए प्रशासनिक कार्रवाई अंतिम चरण में हैं। इस परियोजना के तहत वर्ष 2015 में साजापानी के पास जलाशय का काम पूरा हुआ तथा इसमें वर्ष 2016 से जल संग्रह किया गया मगर यह आसपास के 21 निर्धन आदिवासी परिवारों पर भारी पड़ गया। इन परिवारों की लगभग साढ़े आठ हेक्टेयर कृषि भूमि भी डूब में समा गई। यह जलाशय के लिए पूर्व में अर्जन हुई भूमि के अतिरिक्त थी। इसके साथ ही डूब में आने वाली अतिरिक्त भूमि के मालिक 21 आदिवासी परिवार मुसीबत में घिर गए और उनको अपनी भूमि का कोई मुआवजा भी नहीं मिला। अब तीन वर्ष बाद फरवरी माह में इन परिवारों को मुआवजा की प्रक्रिया शुरु हुई। किसानों को इसके जल्द पूरा होने का इंतजार है। शासन से इन परिवारों को मुआवजे के लिए एक करोड़ 11 लाख रुपए मंजूर हैं।

बताया गया कि प्रक्रिया के तहत इन प्रभावित भूमि मालिक आदिवासी किसानों को अपनी डूब मेंं आई भूमि के मालिकाना हक वाले कागजात तथा अपना आधार कार्ड व परिचय पत्र कलेक्टर कार्यालय में जमा कराने हैं। शासन के निर्देशानुसार दस्तावेज सत्यापन आदि के बाद इन किसानों की प्रभावित भूमि का जल संसाधन विभाग के पक्ष में नामांतरण कराया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित 21 किसानों को उनकी भूमि के अनुसार तहसील कार्यालय के मार्फत राशि का भुगतान किया जाना है। बताया गया कि इसी प्रक्रिया के तहत शुक्रवार को प्रभावित आठ किसानों की ओर से कलेक्टर कार्यालय में अपनी भूमि व पहचान संबंधी दस्तावेज जमा कराए गए।

इससे पहले 13 किसानों की ओर से अपने दस्तावेज जमा कराए जा चुके। इसके साथ ही शुक्रवार को सभी प्रभावित 21 किसानों के दस्तावेज कलेक्टर कार्यालय मेंं जमा कराने की प्रक्रिया पूरी हो गई। अब इनके दस्तावेजों का सरकारी रिकार्ड से सत्यापन किया जाएगा व इसके बाद नामांतरण की कार्रवाई होगी। शासन की ओर से इन 21 किसानों को मुआवजे के रूप में वितरण के लिए एक करोड़ 11 लाख रुपए कुछ माह पहले मंजूर हो गए। अनुमान है कि दस्तावेज सत्यापन व नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन किसानों को तीन वर्ष इंतजार के बाद मुआवजे के रूप में राहत मिल सकेगी।

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