लोक अदालत : सैकड़ा तक अटक गया आंकड़ा, बिजली चोरी के पहुंचे कम प्रकरण

लोक अदालत : सैकड़ा तक अटक गया आंकड़ा, बिजली चोरी के पहुंचे कम प्रकरण
Figures stuck up to hundreds in Lok Adalat in Singrauli

Amit Pandey | Updated: 14 Jul 2019, 02:57:50 PM (IST) Singrauli, Singrauli, Madhya Pradesh, India

लोक अदालत में कम आए उपभोक्ता.....

सिंगरौली. बिजली चोरी व इससे जुड़ी अनियमितता के लंबित तीन हजार से अधिक प्रकरण में से निपटने वाले मामलों की संख्या केवल सौ तक ही सिमट गई। हालांकि बैढन स्थित जिला न्यायालय व देवसर न्यायालय में जुटी लोक अदालत में बिजली कंपनी ने निपटारे की आस में इतने प्रकरण रखे थे। मगर काफी भागदौड़ के बावजूद बिजली अमले के लिए निराशा जैसी स्थिति रही।

आरंभिक सूचना के अनुसार लोक अदालत में बिजली चोरी व अनियमितता से संबंधित निपटने वाले प्रकरणों का आंकड़ा सौ से भी कम रह गया। इन मामलों को सहमति से निपटाने के लिए बिजली कंपनी के आठ अधिकारी व कार्यालय कर्मी शनिवार को लोक अदालत में मौजूद भी रहे। बिजली अधिकारियों ने बताया कि लंबित लिटिगेशन व प्री लिटिगेशन वाले प्रकरण निपटाने व छूट का लाभ उठाने की सूचना दिए जाने के बावजूद कम संख्या में संबंधित उपभोक्ता लोक अदालत में पहुंचे। इस कारण इतनी कम संख्या में मामले निपट सके।

अधिकारियों के अनुसार लोक अदालत में आए कई संबंधित उपभोक्ताओं के पास अपने प्रकरण से संबंधित कागजात कम थे या उनके पास पहचान संबंधी दस्तावेज नहीं मिले। इस पर लोक अदालत में मौजूद अधिकारियों व कर्मचारियों ने उनके दस्तावेज तैयार करवाए तथा कुछ कागजात के संकलन में सहयोग किया। इसके बाद उपभोक्ता की सहमति से उसके प्रकरण का निपटारा किया जा सका। आरंभिक जानकारी के अनुसार लोक अदालत में बिजली चोरी से संबंधित जिले के जो प्रकरण निपटाए गए, उनमें उपभोक्ता से लगभग 78 हजार रुपए की वसूली हुई है। इन उपभोक्ताओं को ब्याज आदि की छूट भी दी गई।

बिजली कंपनी के अधीक्षण अभियंता जीपी तिवारी ने कहा कि अब शेष रह गए प्री लिटिगेशन वाले प्रकरणों को लेकर संबंधित न्यायालय में परिवाद दायर किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि जिले में बिजली चोरी व अनियमितता के ३०७९ प्रकरण न्यायालय या कार्यालय स्तर पर लंबित थे। इनमें संबंधित उपभोक्ताओं से लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपए की वसूली की जानी है। जिले में बिजली चोरी के लंबित मामले व उनमें अटकी वसूली की राशि सामान्य से बहुत अधिक है। बिजली कंपनी मुख्यालय इसे चितांजनक मानता है।

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