गौ-संवर्धन योजना: हितग्राहियों के हित में बैंकों का 'अड़ंगा', आवेदन देने के बाद भी बैंक से नहीं मिल रही राशि

पशु पालन विभाग दे चुका है स्वीकृति, आवेदन देने के बाद भी बैंक से नहीं मिल रही राशि

By: suresh mishra

Published: 13 Aug 2018, 03:00 PM IST

सिंगरौली। बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने एवं दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। पशु चिकित्सा विभाग से स्वीकृति मिलने के बाद भी बैंक से हितग्राहियों को रुपए नहीं मिल पा रहे हैं। जिसकी वजह से इस योजना का आम लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।

महज एक-दो हितग्राहियों को ही बैंक से ऋण मिल पाया है। विभाग एवं जिला प्रशासन उसी में अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, जबकि पशु चिकित्सा विभाग में करीब दर्जन भर आवेदन पड़े हुए हैं, जिसमें से कुछ आवदेनों को पशु चिकित्सा विभाग से स्वीकृति भी मिल चुकी है। इसके बावजूद बैंक के ऋण नहीं मिल पा रहा है।

यह है योजना
आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना के तहत हितग्राहियों को 10 लाख रुपए तक का ऋण प्रदान किया जाता है। इसके लिए आवश्यक है कि हितग्राही के पास कम से कम एक एकड़ जमीन का होना आवश्यक है। प्रदेश सरकार की इस योजना 2018 में शुरू की गई। इस योजना के लाभ लेने के हितग्राही ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसका उद्देश्य युवओं को रोजगार उपलब्ध कराना एवं दुग्ध उत्पादन में बढ़ाना है।

अधिकारियों से गुहार
बैंक से ऋण नहीं मिलने पर हितग्राही कलेक्टर एवं सत्ता पक्ष से जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद ऋण नहीं मिल पा रहा है। हितग्राही जिला पंचायत अध्यक्ष अजय पाठक, कलेक्टर अनुराग चौधरी को आवेदन देकर ऋण दिलाने की मांग की। इसके बावजूद उसका काम नहीं हो पाया। कुछ दिनों पहले सामुदायिक भवन में आयोजित रोजगार मेले में भी हितग्राही ने कलेक्टर से मिलकर आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना का लाभ दिलाने की गुहार लगाई। इसके बावजूद उसे ऋण नहीं मिल पाया।

डेयरी फार्म खोलकर शुरू किया रोजगार
कुछ लोगों को गौ संवर्धन योजना के तहत लाभ मिला, जिससे उसके जीवन में बदलाव आ गया। ऐसा एक ओडग़ड़ी का कुशवाहा परिवार है। बैंक से ऋण मिलने के बाद उसने गाय खरीदा। अब उसने कुशवाहा डेयरी फार्म बेटहाडांड़ ओडग़ड़ी में खोल लिया है, जिससे उसे अच्छी आमदनी हो रही है। एक ओर उसे रोजगार मिल गया वहीं दुग्ध उत्पादन भी बढ़ा। कुशवाहा परिवार की तरह ही अन्य बेरोजगार युवा भी गौ संवर्धन योजना के तहत अपना रोजगार करना चाहते हैं। लेकिन बैंक आड़े आ रहे हैं।

केस नं.-1
ढ़ोंगा निवासी धीरज तिवारी ने गौ संवर्धन योजना के तहत पशु स्वास्थ्य विभाग में आवेदन दिया। कई महीनों तक तो पशु स्वास्थ्य विभाग में ही आवेदन पड़ा रहा। काफी मशक्कत के बाद फाइल बैंक पहुंची, लेकिन कलेक्टर एवं जिला पंचायत से गुहार लगाने के बाद भी काम नहीं हुआ।

केस नं.-2
देवसर निवासी विनोद ने गौ संवर्धन योजना के तहत पशु स्वास्थ्य विभाग में आवेदन दिया है। वहां से स्वीकृति भी मिल गई है। स्वीकृति के बाद ऋण के लिए फाइल बैंक भेजी गई है। चार महीने से ज्यादा का समय गुजर गया लेकिन बैंक ने ऋण नहीं दी।

केस नं.-3
त्रिभुवन सिंह गोंड़, निवासी गड़वानी ने गौ संवर्धन योजना के तहत आवदेन दिया। इसे भी अभी तक ऋण नहीं मिल पाया है। ये सभी लोग बेरोजगार है। यदि इन्हें इस योजना का लाभ मिल जाता तो इनकी बेरोजगारी दूर होती साथ ही दूध उत्पादन भी बढ़ता।

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