कहीं जान पर न बन आए स्कूल जाना, जिम्मेदार नहीं फरमा रहे गौर

स्कूलों का नहीं बदला समय....

By: Ajeet shukla

Published: 04 Apr 2019, 10:04 PM IST

सिंगरौली. तपती धूप से बच्चों को राहत देने के लिए निजी स्कूल संचालकों ने भले ही स्कूल के समय में परिवर्तन कर दिया हो, लेकिन शासकीय स्कूलों के खुलने और बंद होने का समय पहले ही भांति ही जारी है, जबकि बढ़ते तापमान के बीच सूरज की तपिश हर रोज बढ़ रही है।

नए शैक्षणिक सत्र में ज्यादातर निजी स्कूलों में खुलने का सुबह सात बजे से कर दिया है। जबकि शासकीय स्कूलों के खुलने का समय अभी भी सुबह 10 बजे से है। इस स्थिति में बच्चों को तपती दोपहर स्कूल में ही गुजारना पड़ रहा है। वैसे तो छुट्टी का समय शाम चार बजे से है, लेकिन स्कूलों में बच्चों की कम संख्या और वर्तमान में चल रहे प्रवेश के चलते ज्यादातर स्कूल बच्चों को दोपहर तीन बजे ही छोड़ दे रहे हैं।

नतीजा उन्हें घर जाते समय मजबूरन गर्म हवा के थपेड़े सहने पड़ रहे हैं। बढ़ते तापमान में जहां बच्चों के साथ अभिभावक परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन व शिक्षा अधिकारी संवेदनहीन बना हुआ है। लगातार बढ़ता तापमान निजी स्कूलों के बच्चों पर भी भारी पड़ रहा है। क्योंकि दोपहर डेढ़ बजे छुट्टी के वक्त उन्हें भी तेज धूप सहना पड़ता है।

कई जिलों में बदल गया स्कूलों का समय
ऊर्जाधानी में भले ही शासकीय स्कूलों के समय में परिवर्तन करने की जरूरत नहीं समझी जा रही हो, लेकिन बढ़ते तापमान के मद्देनजर कई दूसरे जिलों के स्कूल के समय में परिवर्तन किया जा चुका है। यह बात और है कि यहां अभी शिक्षा अधिकारी स्कूल समय को अनुकूल मान रहे हैं।

लगातार बढ़ रहा है तापमान
अप्रेल महीना लगने के साथ ही गर्मी भी अपना रंग दिखाने लगी है। गुरुवार को तापमान ४० डिगी सेल्सियस के पार चला गया। न्यूनतम तापमान भी २२ डिग्री तक बना रहा।आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोत्तरी की संभावना जताई गई है। इस सप्ताह पारा ४४ डिग्री तक पहुंचने की उम्मीद है।

बढ़ती गर्मी के बीच स्कूल में छात्रों को परेशानी
- विद्युतविहीन स्कूलों में पसीना बहाने को मजबूर हैं बच्चे।
- जहां बिजली है, वहां भी दोपहर में हवा काफी गर्म होती है।
- तपती जमीन पर पड़ रहा है बैठना, कुर्सी-टेबल भी हो रहे गर्म।
- तीन सौ से अधिक स्कूलों के परिसर में पेयजल मुहैया नहीं।
- स्कूल आते और जाते समय गर्म हवा के थपेड़े सहना मजबूरी।

उदाहरण :-1
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला माजन मोड़ में खिड़कियों और दरवाजों के जरिए कक्षाओं में भीतर तक जाती हैं गर्म हवाएं। यही वजह है कि स्कूल पहुंचने वाले छात्रों की संख्या में इजाफा होने का नाम नहीं ले रहा है। पंजीकृत छात्रों की संख्या १५० से अधिक है, लेकिन उपस्थिति एक दर्जन तक सीमित है।

उदाहरण :-2
शासकीय माध्यमिक शाला मधुरा में बिजली नहीं होने के चलते छात्रों को पढ़ाई करने के लिए पसीना बहाना पड़ रहा है। पूरी दोपहर स्कूल में गुजरती है, इसलिए छात्रसंख्या हर रोज घटती जा रही है। हालांकि शिक्षकों के दबाव में यहां छात्र-छात्राओं की संख्या आधा सैकड़ा से अधिक होती है।

Ajeet shukla Reporting
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