गजबः आइसोलेशऩ वार्ड शहरी अस्पतालों में और पॉजिटिव मरीज रखे जा रहे पंचायत भवन में

-ग्रामीणो ने किया जबरदस्त विरोध
-नहीं माना प्रशासन, बताया सभी ठीक

By: Ajay Chaturvedi

Updated: 23 May 2020, 03:55 PM IST

सिंगरौली. एक तरफ मुख्यमंत्री रीवा और सिंगरौली को लेकर चिंतित हैं। व स्थानीय जिला प्रशासन से वीडियो कांफ्रेंसिंग कर रहे हैं। वहीं जिले का हाल यह कि कोरोना पॉजिटिव आने के बाद भी ग्रामीण अंचल के मरीजों को शहरी अस्पतालो में बने आइसोलेशन सेंटर नहीं भेजा जा रहा। उल्टे उन्हें उसी गांव के पांचत घर में रखा जा रहा है। इससे ग्रामीणों में भय के साथ गुस्सा भी है।

बता दें कि चितरंगी क्षेत्र के रमछिहा गांव में 6 कोरोना संक्रमित मरीज मिले। एक गांव से 6 लोगों के संक्रमित पाए जाने की सूचना से ही गांव में हड़कंप मच गया। लोगों को उम्मीद थी कि जिला प्रशासन तत्काल इन सब को शहर ले जा कर आइसोलेशन वार्ड में रखेगा। लेकिन नहीं, प्रशासन ने इन्हें गांव के पंचायत भवन में रखने का फैसला सुनाया। इसे सुनकर ग्रामीणों ने इसका विरोध भी किया। लेकिन उनकी एक न सुनी गई।

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यहां यह भी बता दें कि सिंगरौली प्रशासन ने जिला अस्पताल और एनसीएल के नेहरू अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड तैयार किया है। इसके बावजूद रमछिहा गांव के 6 कोरोना पॉजिटिव को पंचायत भवन में जगह दी गई। उन्हें शहर नहीं ले जाया गया। इससे मरीज के परिजनों में अपनों की सेहत को लेकर डर है। प्रशासन ऐसा क्यों कर रहा है, इसे लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे है। लेकिन बात ग्रामीणों को हजम नहीं हो रही।

बताया जा रहा है कि गुरुवार देर रात 6 लोगों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद अधिकारी दूसरे दिन यानी शुक्रवार को मरीजों को रमडिहा के शासकीय स्कूल में आइसोलेट करने की कवायद में जुट गए। ग्रामीणों को इसकी भनक लगी तो विरोध शुरू हो गया। ग्रामीणों के विरोध के बाद अधिकारियो ने स्कूल से हटा कर पंचायत भवन ठठरा में ठहरा दिया गया।

यह सही है कि पंचायत भवन बस्ती से थोड़ी दूरी पर है लेकिन ग्रामीणो का सवाल है कि जब शहर के दो अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है तो स्कूल या पंचायत भवन में आइसोलेशन क्यों? वो पूछ रहे हैं कि क्या यहां इन सभी 6 लोगों का सही इलाज हो पाएगा। वो सारी सुविधा जो अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में है वो यहां उपलब्ध हो पाएगी?
इन सारे सवालों के साथ उन्हें भय सता रहा है कि 6 संक्रमित लोगों को पंचायत भवन में रखने से गांव के अन्य लोग भी संक्रमित न हो जाएं।

उधर एसडीएम नीलेश शर्मा का तर्क है कि मरीजो को कम से कम मूवमेंट हो इसकी कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि पंचायत भवन में आइसोलेट कर पूरी सुविधा दी जाएगी। चिकित्सकों की टीम उन पर लगातार नजर रखेगी। मूवमेंट कम हो इसीलिए उन्हें गांव से दूर दूसरी जगह नहीं ले जाया जा रहा। अधिक मूवमेंट से संक्रमण का खतरा है।

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