प्रतिबंध के बावजूद खपाया जा रहा सड़ा चावल, गेहूं की गुणवत्ता भी है निम्न

गोदामों में भंडारित 2.5 लाख क्विंटल चावल को लेकर चल रही है जांच ....

By: Ajeet shukla

Published: 12 Sep 2020, 10:28 PM IST

सिंगरौली. शासकीय उचित मूल्य की दुकान से हितग्राहियों को अच्छी क्वालिटी का राशन मिले। शासन स्तर से भले ही इससे संबंधित तटस्थ आदेश जारी किए गए हों, लेकिन यहां स्थानीय अधिकारियों का रवैया उदासीनतापूर्ण है। यही वजह है कि महकमे के अधीनस्थ अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। बात प्रतिबंध के बावजूद कोटेदारों की ओर से परोसा से घटिया चावल की कर रहे हैं। उपभोक्ताओं को कोटेदारों द्वारा दिया जा रहा गेहूं भी दोयमदर्जे का है।

उचित मूल्य की दुकानों से उपभोक्ताओं को घटिया चावल दिया जा रहा है। प्रदेश के अन्य जिलों की तरह यहां से भी हुई शिकायत पर गोदामों में भंडारित चावल की न केवल जांच शुरू कर दी गई है। बल्कि वितरण पर भी रोक लगा दिया गया है। इसके बावजूद कोटेदारों के यहां से चावल का वितरण जारी है। गौरतलब है कि एफसीआइ के केंद्रीय दल ने यहां से जांच के लिए 135 सेंपल एकत्र किया है। सेंपल जांच के लिए ले जाया गया है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक गोदामों में 11 मीलरों के ढाई लाख क्विंटल भंडारित चावल जांच के दायरे में हैं।

कुछ इस तरह किया गया खेल
विभागीय सूत्रों की माने तो सेंपलिंग के दौरान गोदामों में जुलाई और अगस्त का चावल भी मौजूद रहा है। क्योंकि वह चावल कोटेदारों तक नहीं पहुंच पाया था। जांच की प्रक्रिया के दौरान गोदामों में रखा चावल रिकॉर्ड में वितरित किया गया बताया गया। अब वह चावल कोटेदारों के यहां पहुंचा दिया गया है और कोटेदार सड़े चावल का वितरण कर रहे हैं। यह बात और है कि महकमे के अधिकारी सारा दारोमदार कोटेदारों पर डाल रहे हैं। दलील है कि कोटेदारों को पहले ही चावल उपलब्ध करा दिया गया था, लेकिन वह अब वितरित कर रहे हैं।

गेहूं की गुणवत्ता की भी होनी चाहिए जांच
वर्तमान में कोटेदारों के यहां से चावल के साथ गेहूं का भी वितरण किया जा रहा है। चावल की तरह ही गेहूं भी घटिया क्वालिटी का है। वर्तमान में कोटेदारों के यहां जो गेहूं पहुंचाया जा रहा है। वह गुणवत्ता में निम्न स्तर का है। इसलिए उपभोक्ताओं को परोसे जा रहे, गेहूं की भी जांच कराई जानी चाहिए। अधिकारियों के मताबिक गेहूं सतना जिले की समितियों का है। गौरतलब है कि गेहूं में न केवल कचरा की मात्रा अधिक है। बल्कि गेहूं की दाने भी सूखे हुए हैं।

वर्जन -
प्रतिबंध के बाद कोटेदारों को चावल नहीं दिया गया है। कोई बांट रहा है तो वह पुराना स्टॉक होगा, जिसे वितरित नहीं गया रहा होगा। अब उसका वितरण किया जा रहा है।
आरपी पाण्डेय, सुपरवाइजर नागरिक आपूर्ति सिंगरौली।

Ajeet shukla Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned