अदालत में हुआ कुछ ऐसा कि खुश होकर घर लौटे एक दूसरे के बैरी पति-पत्नी

अदालत में हुआ कुछ ऐसा कि खुश होकर घर लौटे एक दूसरे के बैरी पति-पत्नी

Ajit Shukla | Publish: Dec, 08 2018 11:39:57 PM (IST) | Updated: Dec, 08 2018 11:39:58 PM (IST) Rewa, Rewa, Madhya Pradesh, India

सुलझाए गए एक साथ कई केस....

सिंगरौली. जिला मुख्यालय सहित अन्य जगह शनिवार को जुटी लोक अदालत के दौरान कुटुंब न्यायालय में पीठासीन अधिकारी अमरनाथ की खंडपीठ ने कुल चार प्रकरण निबटाए। अजय व प्रियंका और विकास पुरी व उनकी पत्नी के मामले में पीठासीन अधिकारी सहित अधिवक्ता एचपी शर्मा व मनोज कुमार की समझाइस पर दंपतियों ने दाम्पत्य जीवन के निर्वाह के लिए न केवल अपनी सहमति दी बल्कि खुशी-खुशी घर वापस गए।

इसी प्रकार आवेदिका आरती की ओर से प्रस्तुत धारा 13 अंतर्गत तलाक के मामले में भी समझाइस के बाद साथ-साथ जीवनयापन के लिए राजी हुए। आवेदिका राजकुमारी की ओर से प्रस्तुत आवेदन पर सुनवाई करते हुए अनावेदक शिवदास की पत्नी एवं पुत्री को जीवन निर्वाहन के लिए हर महीने आठ हजार रुपए प्रतिमाह देने पर समझौता किया गया है। आवेदिका की पुत्री के विवाह के लिए अनावेदक पिता की ओर से सात लाख रुपए की राशि देने पर सहमति बनी।

लोक अदालत में अन्य प्रकरणों सहित बिजली चोरी से संबंधित लगभग चार सौ मामलों का भी निपटारा हुआ। दोनों पक्षों में समझाईश से प्रकरण निपटाने की थीम पर बिजली चोरी से जुड़े शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के लगभग 13 सौ प्रकरणों को बिजली कंपनी की ओर से लोक अदालत में पेश किया गया।

इसके तहत न्यायिक अधिकारियों सहित बिजली कंपनी अधिकारियों व अधिवक्ताओं की समझाईश से चार सौ से अधिक प्रकरणों का निपटारा हो सका। इन सभी मामलों का निपटारा होने से बिजली कंपनी को लगभग 17 लाख रुपए राजस्व मिला। इसी प्रकार अन्य दूसरे कई मामलों में 918 प्रकरणों का निस्तारण किया गया। इनमें से कुल 990 लोग लाभान्वित हुए। इसके अलावा कई प्रकरणों को न्यायालय में सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।

लोक अदालत में शहरी क्षेत्र के बिजली चोरी वाले लगभग एक हजार व ग्रामीण क्षेत्र के लगभग साढ़े तीन सौ प्रकरण निपटारे के लिए प्रस्तुत किए गए। इन सभी मामलों से जुड़े उपभोक्ताओं को बिजली कंपनी की ओर से नोटिस भेजकर लोक अदालत में हाजिर होने की सलाह दी गई। लोक अदालत में प्रकरण का निपटारा करने पर बिजली कंपनी की ओर से संबंधित उपभोक्ता को ब्याज में संपूर्ण व जुर्माना राशि मेें भी काफी छूट देना तय किया गया।

इसी छूट का लाभ देते हुए शहरी क्षेत्र से जुड़े ३४९ प्रकरणों का उपभोक्ता को समझाइश कर निपटारा करने में सभी पक्षों को सफलता मिली। इनसे बिजली कंपनी को 16 लाख 11 हजार रुपए का राजस्व मिला। इनमें से न्यायालय में लंबित प्रकरणों की संख्या 12, प्री लिटिगेशन प्रकरणों की संख्या 72 व नोटिस वाले प्रकरणों की संख्या 265 रही।

सामने आया कि इतने प्रकरणोंं का निपटारा करने पर बिजली कंपनी की ओर से उपभोक्ताओं को बिजली चोरी पर लगाए गए जुर्माने के रूप में दो लाख 56 हजार रुपए की छूट देनी पड़ी। इसके साथ ही ब्याज के तौर पर भी 11 हजार रुपए की छूट उपभोक्ताओं को दी गई।

शहरी क्षेत्र के मुकाबले शनिवार को जुटी लोक अदालत में ग्रामीण क्षेत्र के बिजली चोरी से जुड़े प्रकरण कम संख्या में निपट पाए। इसका कारण संबंधित उपभोक्ताओं के प्रकरण निपटारे के लिए लोक अदालत मेंं उपस्थित नहीं होना रहा। शनिवार को लोक अदालत में ग्रामीण क्षेत्र के कुल 71 प्रकरणों का ही निपटारा हुआ और इसकी एवज में बिजली कंपनी को एक लाख रुपए से अधिक आय हुई।

इनमें न्यायालय में लंबित प्रकरणों की संख्या 20 व प्री लिटिगेशन के प्रकरणों की संख्या 51 रही। सामने आया कि ग्रामीण क्षेत्र में बिजली चोरी वाले पांच सौ से अधिक उपभोक्ताओं को लोक अदालत के आयोजन की सूचना देते हुए छूट का लाभ उठाकर प्रकरण का निपटारा करने की सलाह संबंधी नोटिस भेजे गए थे मगर इनमें से बहुत कम संख्या में ही उपभोक्ता लोक अदालत मेंं आए और इस कारण उनसे जुड़े प्रकरण निपटने से रह गए।

खूब बंटी ब्याज व जुर्माने में छूट
बिजली चोरी के अधिकाधिक प्रकरणों को निपटाने के लिए बिजली कंपनी ने लोक अदालत में आने वाले उपभोक्ताओं को खूब छूट देना तय किया गया। इसके तहत घरेलू, कृषि व 10 हार्स पावर तक के औद्योगिक श्रेणी वाले उपभोक्ताओं को ब्याज की राशि पूरी तरह माफ कर दी गई तथा जुर्माना राशि में भी 25 से 40 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान किया गया।

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