घर पहुंचने हैदराबाद से पैदल ही निकल पड़े, जानिए रास्ते में हुई किस तरह की फजीहत

अब किए गए होम क्वारंटीन....

By: Ajeet shukla

Published: 12 May 2020, 09:48 PM IST

सिंगरौली. मालूम नहीं किसे बस की सुविधा मिल रही है और किसे ट्रेन की। हम तो पैदल ही जैसे-तैसे घर पहुंचे। हैदराबाद से निगरी पहुंचे राजकुमार केवट ने बताया कि वह फैक्ट्री में काम करते थे, लेकिन मार्च में जब फैक्ट्री बंद हो गई तो कोई काम नहीं रह गया। पास में जब तक पैसा था, तब तक जैसे-तैसे दिन बिताए।

उसके बाद यह सोच कर घर से लिए निकल दिए कि कैसे भी पहुंचेंगे, लेकिन अब यहां नहीं रहेंगे। राजकुमार केवट ने आप बीती बताते हुए कहा कि दोस्त द्वारिका प्रसाद के साथ घर के लिए निकले तो रास्ते में एक ट्रक मिल गया। वहां से सिवनी आए और करीब 10 किलोमीटर पैदल चला तो एक दूसरा ट्रक मिल गया।

ट्रक ने कटनी में छोड़ दिया। वहां से कोई वाहन नहीं मिला। पैदल ही चल दिए। द्वारिका प्रसाद ने बताया कि वह दोनो 30 अप्रैल को रात में कटनी पहुंचे थे। पैदल चलने हुए वह तीन मई को यहां सीमा पर पहुंचे। पैदल चलते-चलते पैर में छाले पड़ गए हैं। रास्ते में भूख-प्यास से बुरा हाल था। एक घर में खाना मांग कर खाया। तीन दिनों में केवल एक टाइम खाना मिला।

साइकिल से सात दिन की यात्रा की, फिर भी नहीं पहुंचे घर
खरगौन जिले से घर के लिए सात साथियों के साथ साइकिल से निकले मुकेश चौधरी सात दिन की यात्रा के बाद भी घर नहीं पहुंचे। उन्हें यहां स्थानीय प्रशासन ने रास्ते में रोक कर शेल्टर होम में क्वारंटीन कर दिया। झारखंड के पलामू जिले में स्थित घर जा रहे मुकेश ने बताया कि यह सात दिन उन्हें जीवन भर याद रहेंगे।

रास्ते में वह वहीं पर अपना डेरा डाल देते जहां रात होती। राशन उन सभी ने साथ में ले रखा था। ईधन का प्रबंध करते और रास्ते में कुछ भी रूखा-सूखा बनाकर खा लेते और फिर आगे बढ़ जाते। फिलहाल वह सब सिंगरौली की सीमा पार कर आगे बढ़ पाते कि सरई पुलिस ने उन्हें रोककर क्वारंटीन कर दिया।

Ajeet shukla Reporting
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