MP Assembly Election 2018: सिंगरौली में किसको मिलेगा टिकट, किसका दावा, क्यों मजबूत..पढ़िए पूरी रिपोर्ट

MP Assembly Election 2018: सिंगरौली में किसको मिलेगा टिकट, किसका दावा, क्यों मजबूत..पढ़िए पूरी रिपोर्ट

suresh mishra | Publish: Sep, 08 2018 08:02:39 PM (IST) Singrauli, Madhya Pradesh, India

आसान नहीं भाजपा की राह, सपाक्स और आप भी बिगाड़ेंगे समीकरण

सिंगरौली। विधानसभा चुनाव की तिथि घोषित होने में दो महीने से अधिक का समय अभी बाकी है, लेकिन जिले में सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। देश की ऊर्जाधानी सिंगरौली विधानसभा सीट में इस बार भाजपा को कड़ी चुनौती मिल रही है। विधानसभा चुनाव के लिए अभी से दावेदार सामने आने लगे हैं। भाजपा में सबसे ज्यादा उथल-पुथल सिंगरौली सीट को ही लेकर है।

भाजपा के रामलल्लू बैस दूसरी बार विधायक बने हैं। भाजपा बैस की उम्र को लेकर संशय में है। ऐसे में नए दावेदार आगे आ रहे हैं। बसपा, सपा और आम आदमी पार्टी भी दोनों ही दलों के समीकरणों को बिगाडऩे के लिए तैयार बैठे हैं। सपाक्स ने चुनाव में दावेदारी जताकर मामले को और रोचक बना दिया है। कांग्रेस-बसपा गठबंधन की कयास सही हुई तो भाजपा को कड़ी टक्टर से गुजरना होगा।

सिंगरौली: कांग्रेस चाहती है सीट छीनना
यहां भाजपा के रामलल्लू बैस लगातार दो बार से विधायक हैं। बैस इस बार भी टिकट के प्रबल दावेदार हैं। पर उनकी बढ़ती उम्र से पार्टी भी चिंतित है, हालांकि उनकी सक्रियता क्षेत्र में बनी हुई है। कांग्रेस एंटी इंकम्बेंसी का फायदा उठाकर सीट अपने पाले में करना चाहती हैं। आम आदमी पार्टी ने रानी अग्रवाल को प्रत्याशी बना दिया है, वे अभी से जनसंपर्क में जुट गई हैं।

विधानसभा चुनाव 2013 के वोट
- भाजपा रामलल्लू बैस 48293
- कांग्रेस बीपी सिंह 37733

ये हैं चार मुद्दे
- विद्युत परियोजना से विस्थापन
- हटाए गए लोगों का पुनर्वास
- बेरोजगारी और सड़कें

भाजपा के मजबूत दावेदार
- रामलल्लू बैस- विधायक
- रामनिवास शाह- पूर्व जिलाध्यक्ष
- कांत देव सिंह-भाजपा जिलाध्यक्ष

कांग्रेस के मजबूत दावेदार
- बीपी सिंह - पूर्व सीएम अर्जुन सिंह के रिश्तेदार।
- अरविंद सिंह चंदेल, जिला कांग्रेस कमेटी वरिष्ठ उपाध्यक्ष

ये भी ठोंक रहे ताल
- रेनू शाह - पूर्व महापौर
- रानी अग्रवाल - आम आदमी पार्टी

जातिगत समीकरण
- ब्राह्मण, कायस्थ और ठाकुर वोट ज्यादा हैं। बैस भी अपने परंपरागत वोटरों के भरोसे हैं। व्यापारियों में अच्छी पैठ है।

चुनौतियां
- परंपरागत वोटरों को एकजुट रखना।
- पार्टी में आपसी मतभेद कार्यकर्ताओं में निरंतरता का अभाव।

विधायक की परफॉर्मेंस
- विकास कार्य भी किए हैं। मगर, बेराजगारी दूर करने में विफल रहे हैं। विकास के मामले में कुछ खास नहीं कर सके।

सड़क, बिजली और ट्रैफिक की समस्या है। जनप्रतिनिधि को बार-बार याद दिलाएं तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
- बीएल गुप्ता, समाजसेवी

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