प्रदूषण का सबब बनी फ्लाइऐश से मिलेगी निजात

एमपीआइडीसी ने बनाई योजना ....

By: Ajeet shukla

Published: 17 Feb 2021, 11:51 PM IST

सिंगरौली. विद्युत उत्पादक कंपनियों से निकलने वाला फ्लाइऐश जिले में प्रदूषण और दुर्घटनाओं का प्रमुख सबब बना हुआ है। पिछले वर्ष हुई डैम फूटने की तीन घटनाओं में एक ओर जहां पेयजल का मुख्य स्रोत रिहंद जलाशय सहित अन्य जल स्रोत प्रदूषित हुए। वहीं भारी जन-धन हानि भी हुई।

फिलहाल १२ फरवरी को कलेक्ट्रेट में आयोजित एक बैठक के दौरान एमपीआइडीसी की ओर से इससे राहत पाने के लिए कंपनियों को एक बड़ा सुझाव दिया गया है। एमपीआइडीसी की ओर से विद्युत उत्पादक कंपनियों को सुझाव दिया गया है कि वह औद्योगिक विकास को लेकर चिह्नित जमीन को भरने के लिए फ्लाइऐश का उपयोग कर सकते हैं।

बलियरी के अलावा बरगवां व मोरवा में चिह्नित 250 हेक्टेयर से अधिक जमीन ऐसी है, जो काफी उबड़-खाबड़ है। वहां लाखों टन फ्लाइऐश खपाया जा सकता है। एमपीआइडीसी के कार्यकारी निदेशक एपी सिंह के मुताबिक इसमें आने वाले खर्च को भी वहन किया जाएगा।

फ्लाइऐश से औद्योगिक क्षेत्र के गड्ढों को भरा गया तो इससे जमीन सुव्यवस्थित भी हो जाएगी और फ्लाइऐश का उचित उपयोग भी हो जाएगा। गौरतलब है कि कंपनियों को शासन स्तर से भी निर्देश है कि वह बंद खदानों सहित अन्य गड्ढों को फ्लाइऐश से भरें।

औद्योगिक उपयोग की भी तैयारी
फ्लाइऐश के औद्योगिक उपयोग की भी तैयारी है। औद्योगिक क्षेत्र में ऐसे उद्योग स्थापित किए जाने की योजना है, जो फ्लाइऐश से संबंधित उत्पाद तैयार कर सकेंगे। इससे स्थानीय लोगों को फ्लाइऐश के प्रदूषण और होने वाली दुर्घटनाओं से बड़ी राहत मिलेगी। स्थानीय लोगों को प्रदूषण से राहत मिलने की भी बड़ी उम्मीद है।

भर चुके हैं ज्यादातर ऐश डैम
ज्यादातर विद्युत उत्पादक कंपनियों की ओर बनाया गया फ्लाइऐश डैम पूरी तरह से भर गए हैं। डैम में और अधिक फ्लाइऐश भरने की स्थिति में खतरा उत्पन्न हो सकता है। यही वजह है कि कंपनियों ने प्रशासन से नए डैम बनाने की अनुमति मांगी गई है, लेकिन एनजीटी के निर्देशों के मद्देनजर अब उन्हें नए डैम बनाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

Ajeet shukla Reporting
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