एमपी के इस जिले में माफियाओं को अभयदान, नहीं चला कोई अभियान

राजनीतिक रसूख के चलते ऊर्जाधानी में कवायद ठंडी.....

सिंगरौली. शासन के निर्देश पर माफियाओं को चिह्नित कर प्रदेश के दूसरे जिलों भले ही ताबड़तोड़ कार्रवाईकी गई हो, लेकिन यहां ऊर्जाधानी में कवायद ठंडी पड़ी है। जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से न ही माफियाओं को चिह्नित किया जा सका है और न ही कार्रवाईहो सकी है। यह बात और है कि खनिज संपदा से भरपूर ऊर्जाधानी में एक से बढक़र एक माफिया हैं।

प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेकने के दावे के साथ ही माफियाओं को चिह्नित कर उन पर बड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।माफियाओं का मतलब भूमि, परिवहन, खनन, सूदखोरी व शराब सहित अन्य कार्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार करने वालों से है।

वैसे तो खनन, परिवहन व शराब का कारोबार यहां जिले में बड़े पैमाने पर होता है। मिलीभगत से नियमों को ताक पर भी रखा जाता है, लेकिन हर रोज रेत व गिट्टी सैकड़ों की संख्या में दूसरे राज्यों में खपाईजाती है। कोयला खनन व परिवहन में भी बड़े स्तर पर गोलमाल किया जाता है।इसके बावजूद यहां माफियाओं के खिलाफअभियान ठंडा पड़ा है।

राजनीतिक रसूख बनी चुप्पी की वजह
वैसे तो इस मामले में कोईभी अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। लेकिन हकीकत यही है कि अधिकारी माफियाओं के राजनीतिक रसूख के चलते चुप्पी साधे हुए हैं। करीब हर क्षेत्र में ऐसे कारोबारी ही सक्रिय हैं, जो मंत्री व नेताओं के बीच अच्छी पकड़ रखते हैं।

छोटे कारोबारियों को मिले राहत
जिले में सक्रिय माफियाओं पर कार्रवाई का यहां के छोटे कारोबारियों को बेसब्री से इंतजार है। इसकी मुख्य वजह यह है कि माफियाराज का खात्मा हुआ तो छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी। यहां यह बताना जरूरी है कि ज्यादातर माफिया बाहर से हैं।

Ajeet shukla Reporting
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