हाइवे बनाने उपलब्ध नहीं जमीन, निर्माण के लिए दे दिया 331 करोड़ का ठेका

सीधी-सिंगरौली हाइवे के निर्माण का सच .....

By: Ajeet shukla

Published: 10 Sep 2021, 11:58 PM IST

सिंगरौली. सीधी-सिंगरौली हाइवे का निर्माण कार्य जल्द पूरा होने की उम्मीद लगा रखे लोगों को लंबा इंतजार करना होगा। हाइवे निर्माण को लेकर चल रही प्रक्रिया की हकीकत कुछ ऐसी ही है। एमपीआरडीसी की ओर से हाइवे निर्माण के लिए ठेका तो छह महीने पहले दे दिया गया, लेकिन निर्माण के लिए जमीन का बंदोबस्त अब किया जा रहा है।

हकीकत यही है कि जहां अभी सड़क बनाई जानी है, वहां की जमीन ही उपलब्ध नहीं है। जिले के देवसर व चितरंगी की निजी स्वामित्व वाली 2.795 हेक्टेयर जमीन हाइवे के लिए तय रूट में पड़ रही है। निर्माण के लिए अभी यह जमीन एमपीआरडीसी के आधिपत्य में नहीं है। ऐसे में निर्माण एजेंसी द्वारा इस जमीन पर तब तक निर्माण नहीं किया जा सकता है, जब तक एमपीआरडीसी जमीन अर्जन नहीं कर लेती है।

हाइवे का जल्द निर्माण कराने को लेकर जनता की ओर से आ रहे दबाव के चलते शासन ने निविदा प्रक्रिया के जरिए निर्माण एजेंसी का चयन तो कर लिया गया, लेकिन निजी स्वामित्व की जमीन को लेकर भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। भू-अर्जन की प्रक्रिया एमपीआरडीसी की ओर से अब शुरू की गई है। राहत भरी बात यह है कि भू-अर्जन को लेकर सर्वे का कार्य पहले ही किया जा चुका है।

अधिकारियों के मुताबिक देवसर में कुल 0.534 हेक्टेयर जमीन का भू-अर्जन किया जाना है। देवसर क्षेत्र के बरैनिया गांव में तीन भू-स्वामियों की, डगा में सात, गोंदवाली में एक, जियावन में तीन, खोभा में एक, कोहराखोह में एक, साझार गांव में 3 भू-स्वामियों की की जमीन का अर्जन किया जाना है। इसी प्रकार चितरंगी में 2.261 हेक्टेयर भूमि का अर्जन होना है।

चितरंगी के बस्ताली विरान गांव में 3 भू-स्वामियों की, बस्ताली आबाद में एक, चुरकी में तीन, गोरबी में दो, झोको में एक, करथुआ में तीन, कसर में एक, महदेइया में नौ व रेही गांव में दो भू-स्वामियों की भूमि का अर्जन किया जाना है। देवसर व चितरंगी की यह सारी भूमि हाइवे निर्माण के लिए निर्धारित 105 किलोमीटर के रूट के मध्य स्थित है।

तिरुपति बिल्डकॉन को मिली है जिम्मेदारी
हाइवे निर्माण की जिम्मेदारी तिरुपति बिल्डकॉन प्रा. लिमि. को दी गई है। इस निर्माण एजेंसी ने 331.16 करोड़ में हाइवे निर्माण का ठेका लिया है। शर्तों के मुताबिक हाइवे का निर्माण कार्य 18 महीनों यानी डेढ़ वर्ष में पूरा करना है। यह बात और है कि ठेका हुए छह महीने का वक्त बीत गया है और अभी भू-अर्जन की प्रक्रिया शुरू की गई है।

वर्तमान में दुर्घटनाओं को दावत दे रहा हाइवे
वर्तमान में हाइवे की स्थिति दुर्घटना को दावत देने वाली है। जरा सी चूक यात्रा करने वालों के मौत की वजह बन सकता है। हाइवे का यह हाल तब है, जबकि 16 करोड़ की लागत से वर्ष की शुरुआत में हाइवे की मरम्मत कराई गई है। मरम्मत के बाद हाइवे दो महीने भी दुरुस्त स्थिति में नहीं रहा। मरम्मत करने वाली निर्माण एजेंसी हाइवे को दुरुस्त करने की जरूरत भी नहीं समझ रही है। एजेंसी रसूखदार है, इसलिए प्रशासन भी दबाव नहीं बना पा रहा है।

Ajeet shukla Reporting
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