संकट में मोड़वानी डैम का अस्तित्व, तेजी से घट रहा क्षेत्रफल

विकसित करने खर्च हुए हैं करोड़ों .....

By: Ajeet shukla

Published: 10 Sep 2020, 10:06 PM IST

सिंगरौली. करीब एक वर्ष पहले 8 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया। ताकि प्राकृतिक सौंदर्यता से भरपूर डैम को पर्यटन स्थल के रूप विकसित किया जा सके। बात उस मोड़वानी डैम की कर रहे हैं, जिसका अस्तित्व संकट में है। जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते बनी इस स्थिति पर कोई गौर फरमाने को तैयार नहीं है।

एनसीएल की जयंत परियोजना की निकट स्थित मोड़वानी डैम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का बीड़ा नगर निगम ने उठाया है। खुद एनसीएल ने इसके लिए वित्तीय सहायता दी है। पहली किस्त के रूप में कोयला कंपनी ने नगर निगम को चार करोड़ रुपए का बजट उपलब्ध भी करा दिया है। जिससे डैम के विकास को लेकर कार्य जारी है।

एक ओर जहां डैम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कवायद चल रही है। वहीं दूसरी ओर बगल में खड़े ओबी (ओवर बार्डेन यानी कोयले की खदान के उपर की मिट्टी) के पहाड़ की मिट्टी बारिश के पानी के साथ बह कर डैम में आ रही है। इससे डैम का अस्तिव खतरे में पड़ गया है। ओबी के पहाड़ से हजारों टन मिट्टी बरसात के पानी के साथ बह कर डैम में समा गई है। इसके लिए एनसीएल की सहयोगी ओबी कंपनियां जिम्मेदार हैं।

नियमों के अनुरूप नहीं है कोई सुरक्षा प्रबंध
ओबी के पहाड़ के आगे चारों में सुरक्षा के मद्देनजर सुरक्षा दीवार बनाए जाने का निर्देश है। ताकि बरसात के दौरान ओबी बहकर सार्वजनिक क्षेत्र में नहीं जाए। ओबी के पहाड़ों पर इस तरह के पौधरोपण का निर्देश भी है कि बरसात में मिट्टी बहे नहीं, लेकिन कंपनियों की ओर से ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। डैम से सटे ओबी के पहाड़ में भी निर्देशों के अनुरूप इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था नहीं है।

डैम की इस स्थिति के लिए ये हैं जिम्मेदार
मोड़वानी डैम के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट के लिए नगर निगम के अलावा एनसीएल व उसकी वह कंपनियां जिम्मेदार हैं जिनकी ओर से ओबी का पहाड़ खड़ा किया गया है। हैरत की बात है कि प्राकृतिक धरोहर के रूप में चिह्नित मोड़वानी डैम का अस्तित्व संकट में है और इसके लिए जिम्मेदार विभाग, कंपनी व अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।

Ajeet shukla Reporting
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