महानगरों से ज्यादा ऊर्जाधानी में रुला रही प्याज, 150 के पार पहुंची कीमत

भंडारण पर नहीं जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों की नजर....

सिंगरौली. प्रदूषण की तरह ही ऊर्जाधानी प्याज की कीमत में भी महानगरों की टक्कर ले रही है। जी हां, सब्जी मंडी में प्याज की कीमत 150 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। फुटकर व्यापारी अच्छी किस्म की प्याज इससे कम दाम में देने को तैयार नहीं हैं। महानगरों की तुलना में प्याज की मांग यहां भले ही कम हो, लेकिन कीमत टक्कर ले रही है।

सब्जी मंडी में प्याज की लगातार बढ़ती कीमत से ग्राहक भले ही परेशान हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों के अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर से भंडारण पर नजर रखने और छापामारी कार्रवाई करने का भले ही निर्देश है, लेकिन अधिकारी हैं कि खानापूर्ति करने की जरूरत भी नहीं समझ रहे हैं। बढ़ती कीमत और संभाग के सतना जिले में मिले अवैध भंडारण के मद्देनजर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि यहां भी प्याज का अवैध भंडारण किया गया है।

प्याज की बढ़ती कीमत को लेकर अधिकारियों की उदासीनता का अंदाजा महज इस बात से लगाया जा सकता है कि मंडी में हर रोज प्याज की कितनी मात्रा आ रही है, इस पर कोई गौर फरमाने वाला नहीं है। कृषि उपज मंडी के थोक विक्रेता खुद इस बात को स्वीकार करते हैं कि अभी तक उनसे इस संबंध में कोई पड़ताल नहीं हुई।

थोक व्यापारी सीमा पार ला रहे हैं प्याज
थोक व्यापारियों की माने तो यहां सब्जी मंडी में जबलपुर के अलावा छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर की प्याज बिक रही है। थोक व्यापारियों की ओर से इन्हीं दो जिलों के बाजार से प्याज लाई जा रही है। महंगाई को देखते हुए थोक व्यापारियों ने प्याज को तीन कैटेगरी में विभाजित किया है। थोक में उनकी कीमत 100 रुपए, 110 व 120 रुपए प्रति किलोग्राम है।

थोक कीमत भी 120 रुपए प्रति किलोग्राम
मंडी में फुटकर में अच्छे किस्म के प्याज की कीमत 150 रुपए प्रति किलोग्राम से अधिक रही। फुटकर विक्रेता श्याम कली की माने तो उन्होंने थोक में 120 रुपए प्रति किलोग्राम के रेट से प्याज खरीदा है। दलील है कि प्रति किलोग्राम 30 रुपए का मुनाफा तो लेंगे ही। क्योंकि हर रोज प्याज की कुछ मात्रा सड़ जाती है।

एक पखवाड़ा पहले हुई थी चेकिंग
प्याज के भंडारण की चेकिंग को लेकर अधिकारियों की ओर से जब बात की गई तो उन्होंने पखवाड़ा भर पहले बैढऩ व बलियरी में चेकिंग करने की बात स्वीकार की है, लेकिन इसके बाद अधिकारियों ने इधर झांकने तक की जरूरत नहीं समझी है। जबकि जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों के साथ खाद्य, सहकारिता व नापतौल विभाग को दी गई है।

Ajeet shukla Reporting
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