ढोंगा गांव में छह सौ हेक्टेयर भूमि आई अर्जन की चपेट में

ढोंगा गांव में छह सौ हेक्टेयर भूमि आई अर्जन की चपेट में

Anil Kumar | Publish: Apr, 23 2019 01:19:23 AM (IST) | Updated: Apr, 23 2019 01:19:24 AM (IST) Singrauli, Singrauli, Madhya Pradesh, India

ढोंगा गांव में छह सौ हेक्टेयर भूमि आई अर्जन की चपेट में

सिंगरौली. देवसर तहसील के गांव ढोंगा गांव में सिंचाई के लिए नए तालाब का निर्माण होने व इससे सिंचाई सुविधा मिलने में भले ही अभी देर है लेकिन इससेे पहले यह तय हो गया है कि तालाब निर्माण की चपेट में छह सौ हेक्टेयर भूमि आने वाली है।

होगा नए तालाब का निर्माण
गांव ढोंगा में सिंचाई के लिए नया तालाब निर्माण व इसमें क्षमता के अनुसार जल संग्रह करने के लिए सर्वे का कार्य लगभग पूरा हो गया है। सर्वे के अनुसार छह सौ हेक्टेयर से अधिक भूमि इसमें समा जाएगी। यह भूमि तालाब के लिए तय जगह व इसके आसपास की है। इसमें निजी व शासकीय दोनों श्रेणी की भूमि शामिल है।
चिह्नित हुई भूमि
शासन से मंजूरी के बाद निर्माणाधीन तालाब व इसके आसपास की डूब में आने वाली भूमि को स्थानीय जल संसाधन विभाग के स्तर पर चिह्नित किया गया है। इस लघु सिंचाई परियोजना के लिए विभाग की ओर से करीब दो वर्ष पहले शासन को प्रस्ताव भेजा गया। तत्कालीन समय में किए गए आरंभिक सर्वे मेंं नए तालाब के लिए गांव ढोंगा के पास छोटी नदी के पास जगह उपयुक्त मानी गई। यह प्रस्ताव दो वर्ष तक शासन के स्तर पर अटका रहा। अब फरवरी में आकर शासन ने इस नई लघु सिंचाई परियोजना को हरी झंडी दी है। मंजूरी के साथ ही राज्य के वित्त विभाग ने गांव ढोंगा में तालाब निर्माण आदि के लिए पांच करोड़ ८० लाख रुपए भी जारी किए हैं। इसके साथ ही देवसर तहसील के गांव ढोंगा मेंं सिंचित क्षेत्रफल विस्तार के लिए नए तालाब के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया।
बताया गया कि योजना के तहत ढोंगा में नए बांध का निर्माण आठ माह की अवधि में कराया जाएगा। वहां मिट्टी का कच्चा तालाब बनेगा व इसकी जल संग्रह क्षमता एक मिलियन क्यूबिक मीटर रहेगी। इसमें संग्रहित जल से ढोंगा के आसपास के २०० हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई होगी। इस तालाब के जल का खेत में सिंचाई के लिए उपयोग करने के लिए ढोंगा के किसानों को अपने पंप आदि का उपयोग करना होगा। विभाग की ओर से तालाब निर्माण के बाद इससे सिंचाई के लिए कोई नहर या नाले का निर्माण नहीं कराया जाएगा।

वन भूमि की भी होगी जरूरत
जल संसाधन विभाग सूत्रों ने बताया कि पहले हुए सर्वे में तालाब व इसके डूब मेंं आने वाली छह सौ दस हेक्टेयर भूमि को शामिल किया गया। अब नए परिप्रेक्ष्य मेंंं इस भूमि को चिह्नित कर लिया गया है। तालाब के डूब में आने वाली चिह्नित भूमि में से 225 हेक्टेयर किसानों की है जबकि 385 हेक्टेयर वन भूमि इसकी जद में आएगी। तालाब के लिए इस छह सौ दस हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होगा। इसके बदले जल संसाधन विभाग निजी भूमि मालिक किसानों को मुआवजा देगा। जबकि वन विभाग को भूमि के बदले दूसरी भूमि देनी होगी। इसके साथ ही वहां पौधरोपण कराना होगा। तालाब के डूब क्षेत्र में कुछ राजस्व भूमि आना भी पाया गया है। बताया गया कि इस राजस्व भूमि का शासन के स्तर पर ही जल संसाधन विभाग को हस्तांतरण किया जाएगा।

 

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