नजदीक में दवाओं का प्रबंध नहीं, मरीजों की हो रही फजीहत, जानिए क्या है वजह

ट्रामा सेंटर के पास नहीं हैं निजी मेडिकल स्टोर....

सिंगरौली. सब्जी मंडी स्थानंातरण में हुए विरोध के बाद नगर निगम के अधिकारी जिला अस्पताल की नई बिल्डिंग के पास स्थित मछली मार्केट को शिफ्ट करने के मामले में हाथ डालने को तैयार नहीं हैं। जबकि मार्केट को स्थानांतरित करने को लेकर न केवल निगम परिषद की सहमति मिल चुकी है। बल्कि नजदीक स्थित अस्पताल के मरीजों और कन्या महाविद्यालय की छात्राओं को दुर्गंध का सामना भी करना पड़ रहा है। मरीजों को दवाओं के लिए फजीहत उठानी पड़ रही है सो अलग।

मछली मार्केट स्थानांतरण को लेकर निगम अधिकारियों को इस बात का डर सता रहा है कि सब्जी मंडी सरीके विरोध न शुरू हो जाए। मछली मार्केट के स्थानांतरण की ठप पड़ी प्रक्रिया का खामियाजा इलाज के लिए अस्पताल की नई बिल्डिंग में पहुंच रहे मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल में प्रमुख दवाओं का टोटा रहता है। जिससे मरीजों को दो किलोमीटर तक दौड़ लगानी पड़ रही है क्योंकि यहां जिला अस्पताल के आसपास निजी मेडिकल स्टोर संचालित नहीं हुए हैं। अस्पताल के नजदीक में दवाओं का प्रबंध नहीं होने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लंबी दूरी तय करने के बाद उन्हें न्यायालय के पास संचालित मेडिकल स्टोर में दवाएं मिलती हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर नगर निगम व स्वास्थ्य अधिकारियों को आगे आकर ठोस निर्णय लेने की जरूरत है। जिससे मरीजों को राहत मिल सके।

जमीन भी नहीं तलाश पाया ननि
बतादें कि जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर के बगल में मछली मार्केट संचालित हो रहा है। मछली मार्केट को वहां से हटाने के लिए नगर निगम जमीन की तलाश नहीं कर पाया है। यही वजह है कि मछली मार्केट जिला अस्पताल व कन्या महाविद्यालय के पास संचालित हो रहा है। यह एक गंभीर समस्या है। गौरतलब है कि मछली मार्केट वाले स्थान को दवा सहित अन्य दुकानों के लिए आवंटित किए जाने की योजना है।

दुर्गंध से परेशान मरीज व छात्राएं
जिला अस्पताल व कन्या महाविद्यालय के ठीक बगल में संचालित मछली मार्केट के दुर्गंध से मरीज व कॉलेज की छात्राएं परेशान हैं। इससे न केवल मरीजों को दिक्कत है बल्कि कॉलेज की छात्राओं को संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है क्योंकि संचालित मछली मार्केट का दुर्गंध कुछ दूर तक वहां से गुजर रहे लोगों को नाक पर रूमाल रखने को मजबूर कर देता है।

निजी मेडिकल भी जरूरी:
देखा जाए तो जिला अस्पताल के आसपास मेडिकल स्टोर की बाढ़ सी रहती है। कारण यह कि गंभीर मरीजों को कब कौन सी जरूरी दवाओं की जरूरत पड़ जाए। सरकारी अस्पताल में अक्सर ऐन वक्त पर जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हो पाती और मरीजों को निजी मेडिकल का सहारा लेना पड़ता है। जिला अस्पताल की नईबिल्डिंग के पास दवा की कोईनिजी दुकान नहीं है।

नहीं मिली दवाएं:
केस-एक
रौंदी गांव के संजीव कुमार जिला अस्पताल में बच्चे को दिखाने आए थे। जहां डॉक्टर ने पर्चा देखकर दवाएं लिख दी। डॉक्टर की लिखी गई सभी दवाएं अस्पताल में मिल गई लेकिन एक सिरप नहीं मिला। जिसे बाहर से खरीदने का सलाह दिया गया।

केस-दो
काम निवासी सविता देवी ने बताया कि ओपीडी में डॉक्टर ने देख लिया है। एक दवा यहां नहीं मिली है। उसे मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए बोला गया है। पुराने अस्पताल के पास जाना पड़ेगा। इधर, आसपास तो मेडिकल नहीं दिख रहा है।

Amit Pandey
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