सरकार में सत्ता पक्ष के विधायकों की गुजारिश भी नजरअंदाज, डीएमएफ में न कम हुई कटौती, न आयुष विभाग को मिले चिकित्सक

रिहंद माइक्रो सिंचाई परियोजना, माइनिंग कॉलेज व एयरपोर्ट जैसी मांग भी अभी अधर में ....

By: Ajeet shukla

Updated: 11 Jun 2021, 09:55 PM IST

सिंगरौली. मुख्यमंत्री द्वारा जिले को सिंगापुर सरीके बनाने का वादा किए जाने के बाद सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि व नेता आए दिन इसे दोहराते हैं। इतना ही नहीं विधायकों की ओर से कोशिश भी की जाती है, लेकिन अफसोस सरकार तक पहुंचने के बाद उनकी सिफारिश फाइलों के ढेर में दब जाती है। यह हाल सत्ता पक्ष के विधायकों की ओर से की गई मांग का है।

जनता के बीच जनप्रतिनिधि वादा तो कर देते हैं, लेकिन वे यह कहने की स्थिति में नहीं हैं कि कब तक वह वादा पूरा कर देंगे। जिले के कुछ अच्छा करने की कोशिश में सबसे अधिक वादा सिंगरौली विधायक रामलल्लू वैश्य ने किया है। यह बात और है कि उनमें से ज्यादातर विकास संबंधित प्रस्ताव शासन में लंबित हैं।

यह हाल तब है जब कि लगातार तीसरी बार विधायक बने रामलल्लू वैश्य को मंत्री पद का दावेदार माना जा रहा था। यह बात और है कि मंत्रीमंडल में विधायक को स्थान नहीं मिला। फिलहाल सिंगरौली विधायक की ओर से जिले के विकास संबंधित प्रस्तावों पर सरकार में अमल होता है तो जिले की तस्वीर बदल जाएगी।

विधायक व मांग संबंधित भेजे गए प्रस्ताव
01- सिंगरौली विधायक ने डीएमएफ मद की शासन के कोष जा रही ७५ फीसदी राशि को लेकर राहत देने की मांग की थी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आगमन पर विधायक ने न केवल मंच से केवल आधी राशि लिए जाने की मांग की थी बल्कि सरकार को पत्र भी लिखा था। अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।

02- जिले में राष्ट्रीय स्तर की कोयला कंपनी होने के मद्देनजर सिंगरौली विधायक ने माइनिंग (इंजीनियरिंग) कॉलेज के लिए पिछली सरकार में ही पत्र लिखा था, लेकिन अभी तक की कवायद केवल आश्वासन तक सीमित है। छात्र-छात्राओं को इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए बाहर जाना पड़ रहा है।

03- जिले के किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिल सके। इसके लिए सिंगरौली विधायक ने रिहंड माइक्रो सिंचाई परियोजना की मांग की है। पिछले कार्यकाल में की गई मांग पर अब तक अमल संभव नहीं हो सका है। इस प्रस्ताव पर भी सारी कवायद केवल आश्वासन तक ही सीमित है।

04- जिले में एयरपोर्ट की मांग भी विधायक द्वारा ही की गई थी। तमाम प्रयासों के बावजूद जमीन चिह्नित की गई और एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया, लेकिन ऐन वक्त पर योजना में फेरबदल कर दिया गया। कार्य शुरू होते-होते प्रस्ताव हवाई अड्डा से बदल कर हवाई पट्टी में सिमट गया।

05- कोरोना की आपदा में जिला अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए सीटी स्कैन मशीन की सख्त आवश्यकता महसूस की गई। एक नहीं कई बैठकों में विधायकों ने अस्पताल के लिए सीटी स्कैन मशीन की मांग की लेकिन अभी तक अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन उपलब्ध नहीं हो पाया।

06- चितरंगी विधायक ने आयुष विभाग में चिकित्सकों के खाली पदों को भरने के लिए शासन को पत्र लिखा। पत्र लिखने के समय स्वीकृत 14 पदों में से केवल 5 चिकित्सक पदस्थ रहे। विधायक की मांग पर चिकित्सकों की संख्या बढऩे के बजाए 5 से घट कर 3 रह गई। दो चिकित्सकों को स्थानांतरित कर दिया गया।

07- जिले में संचालित कंपनियों में 70 फीसदी पद स्थानीय युवाओं के लिए आरक्षित करने की विधायकों ने मांग की है। मुख्यमंत्री ने भरे मंच से स्वीकार भी किया है, लेकिन अभी तक कंपनियों के लिए न ही ऐसा कोई निर्देश जारी किया गया है और न ही स्थानीय युवाओं के लिए 70 फीसदी पद आरक्षित किया जा सका है।

08- बरगवां रेलवे क्रासिंग पर पूरे समय जाम की स्थिति बनी रहती है। ओव्हरब्रिज को लेकर विधायक की ओर से शासन को पत्र लिखा गया, लेकिन अभी तक प्रस्ताव प्रक्रिया में उलझ कर रह गया है। नतीजा हर रोज लोगों को घंटों न केवल इंतजार करना पड़ता है। बल्कि वहां पूरे समय लंबा जाम लगा रहता है।

Ajeet shukla Reporting
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